आज के डिजिटल दौर में आम नागरिक की परेशानियां अब सिर्फ स्थानीय दफ्तरों तक सीमित नहीं रहतीं। सरकारी योजनाओं में देरी हो या भ्रष्टाचार का मामला, आप सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं। यह प्रक्रिया इतनी सरल है कि घर बैठे मोबाइल से ही शिकायत दर्ज हो जाती है और उसका पूरा हिसाब रखा जाता है। लाखों लोग इससे लाभान्वित हो चुके हैं, जिससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है।

ऑनलाइन शिकायत का आसान रास्ता
सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां होमपेज से प्रधानमंत्री को संदेश भेजने का विकल्प चुनें। यह आपको एक विशेष पोर्टल पर ले जाएगा, जहां नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और पूरा पता भरना होता है। समस्या का स्पष्ट विवरण लिखें, जिसमें क्या हुआ है, कब हुआ और सबूत के तौर पर फोटो या दस्तावेज जोड़ें। संबंधित विभाग चुनने के बाद सबमिट बटन दबाएं। तुरंत एक अनोखा रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा, जो आपकी शिकायत का पहचान पत्र है।
इस नंबर से आप कभी भी स्थिति जांच सकते हैं। शिकायत संबंधित मंत्रालय या राज्य स्तर पर भेज दी जाती है। अधिकारी जांच करते हैं और समय के अंदर जवाब देते हैं। अगर समाधान पसंद न आए तो फीडबैक दें। खराब रेटिंग पर अपील का मौका मिलता है, जिसे उच्च स्तर पर देखा जाता है। यह पूरी प्रक्रिया 24 घंटे उपलब्ध रहती है, चाहे शहर हो या गांव।
पारंपरिक माध्यमों से संपर्क
अगर इंटरनेट की सुविधा न हो तो डाक का सहारा लें। एक साफ-सुथरा पत्र लिखें, जिसमें समस्या का पूरा ब्योरा हो। इसे दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय के पते पर भेजें। पत्र में अपना नाम, पता और संपर्क नंबर जरूर लिखें ताकि जवाब मिल सके। फैक्स या ईमेल भेजने का विकल्प भी मौजूद है। ये तरीके उन लोगों के लिए वरदान हैं जो तकनीक से कम परिचित हैं। प्राप्त शिकायतें डिजिटल सिस्टम में दर्ज हो जाती हैं और ट्रैकिंग नंबर जारी होता है।
ग्रामीण इलाकों में किसानों या मजदूरों की शिकायतें जैसे फसल बीमा या आवास योजना में देरी, इसी तरह सुलझती हैं। भ्रष्टाचार के मामलों को विशेष प्राथमिकता मिलती है, जिससे जिम्मेदार अधिकारी सक्रिय हो जाते हैं।
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शिकायत प्रक्रिया की मजबूती
यह सिस्टम सभी मंत्रालयों और राज्यों से जुड़ा हुआ है। शिकायत मिलते ही प्रारंभिक जांच होती है। फिर इसे सही अधिकारी के पास भेजा जाता है, जो निवारण कर याचिकाकर्ता को सीधे सूचित करता है। समय सीमा तय है, ज्यादातर मामलों में 30 दिनों में कार्रवाई पूरी हो जाती है। असंतोष होने पर दोबारा जांच का प्रावधान है। इससे न केवल व्यक्तिगत समस्या सुलझती है बल्कि सिस्टम में सुधार भी आता है।
मोबाइल ऐप के जरिए भी यह सुविधा उपलब्ध है, जो युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रही है। पंजाब जैसे राज्यों में आधार से जुड़ी योजनाओं की शिकायतें तेजी से निपट रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक की आवाज सुनी जाए।
वास्तविक बदलाव की कहानियां
कई मामलों में देखा गया है कि छोटी-सी शिकायत ने बड़े बदलाव लाए। एक किसान की जमीन विवाद की शिकायत से लेकर पेंशन में देरी तक, सबका समाधान हुआ। यह प्रणाली डिजिटल इंडिया का सशक्त माध्यम बन चुकी है। नागरिकों को बस इतना ध्यान रखना है कि शिकायत सटीक और सच्ची हो। झूठे मामलों से बचें, क्योंकि सिस्टम पारदर्शी है।
आज ही अपनी परेशानी साझा करें। आपकी एक कोशिश से न सिर्फ आपकी जिंदगी बदलेगी बल्कि आसपास के लोगों को भी राह दिखेगी। शासन जनता का है, और यह प्लेटफॉर्म उसी का प्रमाण है।









