
भारत सरकार के 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) की कुल संपत्ति ₹171 लाख करोड़ से अधिक है, जो देश के बैंकिंग सेक्टर का 55% हिस्सा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में हाई-लेवल कमेटी गठित करने का ऐलान किया, जो निजीकरण, मर्जर और FDI सीमा बढ़ाने पर विचार करेगी। IDBI बैंक का पूर्ण निजीकरण मार्च 2026 तक पूरा हो सकता है, जबकि अन्य छोटे बैंकों पर भी नजर टिकी है।
FDI सीमा 49% तक बढ़ने के संकेत
वर्तमान में PSU बैंकों में FDI की सीमा 20% है, लेकिन रॉयटर्स रिपोर्ट के मुताबिक सरकार मंत्रालयों और RBI के साथ चर्चा कर रही है कि इसे 49% तक बढ़ाया जाए। फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्रेटरी एम नागराजू ने पुष्टि की कि विचार-विमर्श जारी है। सरकार 51% हिस्सेदारी अपने पास रखना चाहती है, बाकी निजी निवेशकों को बेचकर पूंजी जुटाई जाएगी। यह कदम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति देगा।
हाई-लेवल कमेटी का मकसद
बजट भाषण में सीतारमण ने कहा कि PSU बैंकों का मुनाफा रिकॉर्ड ₹2 लाख करोड़ पार कर चुका है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सुधार जरूरी। कमेटी बैंकिंग सेक्टर की व्यापक समीक्षा करेगी, मर्जर से संख्या 12 से घटाकर 6-8 हो सकती है। बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक विलय के प्रमुख उम्मीदवार। SBI जैसे बड़े बैंक मजबूत होंगे।
संपत्ति और वैश्विक स्थिति
मार्च 2025 के आंकड़ों में PSU बैंकों की एसेट्स ₹171 लाख करोड़ हैं। एसेट्स के हिसाब से SBI (0.9 ट्रिलियन डॉलर) दुनिया के टॉप 10 में शामिल, HDFC (0.5 ट्रिलियन डॉलर) भी मजबूत। हालांकि, टॉप 4 चीन के बैंक हैंI CBC (6.7 ट्रिलियन डॉलर) सबसे बड़ा। निजीकरण से पूंजी जुटेगी, लेकिन यूनियनों का विरोध 10 लाख नौकरियां दांव पर। RBI गवर्नर ने कहा, “कंसॉलिडेशन से दक्षता बढ़ेगी।”
संभावित प्रभाव और भविष्य
निजीकरण से शेयर बाजार में उछाल आएगा, लेकिन ग्राहक खातों पर असर न पड़े, इसका निर्देश। 2026 में अप्रैल तक बड़े ऐलान संभव। सरकार का लक्ष्य: PSU बैंक वैश्विक दिग्गज बनें। यह सुधार अर्थव्यवस्था को नई गति देगा, लेकिन सावधानी बरतनी होगी।









