
भारत सरकार ने देश की श्रम व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार करते हुए चार नए लेबर कोड (Labour Codes) को पूरी तरह प्रभावी कर दिया है। इन बदलावों में सबसे ज्यादा चर्चा ‘ग्रेच्युटी’ (Gratuity) के नए नियमों की हो रही है। दशकों पुराने नियमों को बदलते हुए सरकार ने अब कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी हासिल करना आसान बना दिया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये नए नियम आपकी जेब और भविष्य पर क्या असर डालेंगे।
ग्रेच्युटी का नया नियम
अब तक के कानून (Payment of Gratuity Act, 1972) के अनुसार, किसी भी संस्थान में ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल की लगातार सेवा अनिवार्य थी। लेकिन नए सोशल सिक्योरिटी कोड में इस नियम को काफी लचीला बनाया गया है:
- फिक्स्ड टर्म कर्मचारी (Fixed-term Employees): जो कर्मचारी किसी निश्चित समय के कॉन्ट्रैक्ट (जैसे 1 या 2 साल) पर काम करते हैं, उन्हें अब सिर्फ 1 साल की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी मिलेगी।
- कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स: प्रोजेक्ट आधारित काम करने वाले या कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए लोगों के लिए भी अब 5 साल का इंतजार खत्म हो गया है। उन्हें उनके कार्यकाल के आधार पर ‘प्रो-राटा’ (अनुपातिक) बेसिस पर ग्रेच्युटी दी जाएगी।
- स्थायी कर्मचारी (Permanent Employees): ध्यान दें, जो कर्मचारी कंपनी में ‘परमानेंट’ रोल पर हैं, उनके लिए अभी भी 5 साल का पुराना नियम ही लागू रहेगा। हालांकि, मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में यह समय सीमा लागू नहीं होती।
50% बेसिक सैलरी का नियम
नए लेबर कोड में ‘वेतन’ (Wages) की परिभाषा बदल दी गई है। अब कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी (Basic Pay) उसके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% हो।
- असर: चूंकि ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी पर होती है, इसलिए बेसिक पे बढ़ने से आपकी रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर मिलने वाली ग्रेच्युटी की रकम पहले के मुकाबले काफी बढ़ जाएगी।
ग्रेच्युटी की गणना कैसे की जाती है?
ग्रेच्युटी की गणना के लिए एक सरकारी फॉर्मूला तय है: अंतिम महीने की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता × 15/26 × काम किए गए वर्षों की संख्या
| नौकरी की अवधि | ग्रेच्युटी की राशि (अनुमानित) |
| 1 साल | ₹11,538 |
| 2 साल | ₹23,076 |
| 3 साल | ₹34,615 |
| 4 साल | ₹46,153 |
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
नए नियमों में केवल ग्रेच्युटी ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के हक में कई और बड़े फैसले लिए गए हैं:
- F&F सेटलमेंट: अब कंपनी छोड़ने, इस्तीफा देने या हटाए जाने के दो वर्किंग डेज़ (48 घंटे) के भीतर कंपनी को कर्मचारी का पूरा हिसाब (Full & Final) करना होगा। पहले इसमें 30 से 45 दिन का समय लगता था।
- जॉइनिंग लेटर: अब हर छोटे-बड़े कामगार को लिखित में अपॉइंटमेंट लेटर देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
- छुट्टियों का नियम: अब कर्मचारी अपनी बची हुई छुट्टियों (Leaves) के बदले साल के अंत में पैसे की मांग कर सकेंगे।









