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UP Ration Card: यूपी में 17 लाख राशन कार्ड होंगे रद्द? दावे से मचा हड़कंप; अपात्रों की पहचान के लिए नई जांच शुरू

उत्तर प्रदेश में राशन कार्ड धारकों के बीच हड़कंप! क्या 17 लाख परिवारों का राशन बंद होने वाला है? सरकार ने अपात्रों की पहचान के लिए जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। जानें किन नियमों के आधार पर रद्द हो सकते हैं कार्ड और सांसद ने राज्यसभा में क्या बड़ी मांग उठाई है।

By Pinki Negi

UP Ration Card: यूपी में 17 लाख राशन कार्ड होंगे रद्द? दावे से मचा हड़कंप; अपात्रों की पहचान के लिए नई जांच शुरू।
UP Ration Card

समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने राज्यसभा में सरकार से मांग की है कि मुफ्त राशन पाने वालों के लिए तय की गई आय की सीमा (Income Criteria) को बढ़ाया जाए। उन्होंने चिंता जताई कि उत्तर प्रदेश में लगभग 17 लाख लोग अपना राशन कार्ड खोने की कगार पर हैं, क्योंकि उनकी आय अब पुरानी निर्धारित सीमा से थोड़ी ज्यादा हो गई है। शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने कोविड काल में करोड़ों लोगों की जान बचाई थी, इसलिए नियमों में बदलाव जरूरी है ताकि गरीब परिवारों को मिल रहा मुफ्त राशन बंद न हो।

13 साल पुराने नियमों से छिड़ सकता है राशन

सपा सांसद जावेद अली खान ने राज्यसभा में तर्क दिया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू हुए 13 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके पात्रता नियम (Eligibility Criteria) आज भी 2013 के स्तर पर ही टिके हैं। उन्होंने बताया कि उस समय गांवों में ₹2 लाख और शहरों में ₹3 लाख तक की वार्षिक आय वालों को गरीब मानकर योजना का लाभ दिया गया था। सांसद का कहना है कि महंगाई के इस दौर में अब इन पुरानी सीमाओं को बदलने की जरूरत है, क्योंकि पुरानी आय सीमा की वजह से लाखों पात्र गरीब परिवार योजना से बाहर हो रहे हैं।

महंगाई बढ़ी, सैलरी बढ़ी, फिर राशन के नियम पुराने क्यों? राज्यसभा में उठे सवाल

सपा सांसद जावेद अली खान ने सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि पिछले 13 वर्षों में देश में महंगाई काफी बढ़ चुकी है, लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिनियम (FSA) के नियम वहीं के वहीं हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब, वेतन आयोग (Pay Commission) और मनरेगा की मजदूरी तक में समय के साथ बदलाव किए हैं, तो फिर गरीबों के राशन के लिए आय की सीमा क्यों नहीं बढ़ाई गई? सांसद ने जोर देकर कहा कि लोगों की कागजी आय तो बढ़ी है, लेकिन महंगाई के कारण उनकी आर्थिक स्थिति अब भी कमजोर है, इसलिए पुराने मापदंडों के कारण उन्हें राशन से वंचित करना गलत है।

17 लाख परिवारों का राशन बचाने की अपील

सपा सांसद जावेद अली खान ने राज्यसभा में अर्थशास्त्रियों के आंकड़ों का हवाला देते हुए मांग की है कि राशन कार्ड के लिए आय की सीमा तुरंत बढ़ाई जाए। उन्होंने बताया कि 2013 के ₹2 लाख आज के ₹3.60 लाख के बराबर हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों के लिए यह सीमा ₹5.40 लाख होनी चाहिए। सांसद ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि नियमों में संशोधन नहीं हुआ, तो अकेले उत्तर प्रदेश में ही 17 लाख गरीबों के राशन कार्ड रद्द हो जाएंगे। उन्होंने इसे गरीबों के साथ बड़ा अन्याय बताते हुए अपील की कि बढ़ती महंगाई और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) को देखते हुए पात्रता के नियमों को जल्द से जल्द बदला जाए।

1.4 अरब की आबादी को सुरक्षा, जानें किसे कितना मिलता है राशन

देश में 5 जुलाई 2013 को लागू हुआ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) आज भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी के लिए जीवन रेखा बना हुआ है। इस कानून के तहत सरकार करोड़ों लोगों को सस्ता और मुफ्त अनाज उपलब्ध कराती है। इसके दो मुख्य हिस्से हैं: पहला ‘प्राथमिकता प्राप्त परिवार’ (PHH), जिसमें हर सदस्य को हर महीने 5 किलो अनाज मिलता है, और दूसरा ‘अंत्योदय अन्न योजना’ (AAY), जिसके तहत सबसे गरीब परिवारों को प्रति माह 35 किलो अनाज दिया जाता है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि देश का कोई भी व्यक्ति आर्थिक तंगी के कारण भूखा न रहे।

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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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