
आगामी यूनियन बजट 2026 में मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को टैक्स में बड़ी राहत मिल सकती है। चर्चा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण टैक्स-सेविंग डिडक्शंस (Tax-Saving Deductions) की सीमा को बढ़ाकर ₹2.5 लाख कर सकती हैं। वित्त मंत्री 1 फरवरी को लगातार नौवीं बार देश का बजट पेश करेंगी। बता दें कि पिछले बजट में भी सरकार ने टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए ₹12 लाख तक की सालाना आय को टैक्स-फ्री कर दिया था, और इस बार भी उम्मीद जताई जा रही है कि निवेश पर मिलने वाली छूट का दायरा बढ़ने से लोगों की बचत में इजाफा होगा।
क्या 80C के तहत टैक्स छूट की सीमा ₹2.5 लाख होगी?
अमेरिकन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) ने सरकार को सलाह दी है कि इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत मिलने वाली डिडक्शन लिमिट को ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹2.5 लाख किया जाए। वर्तमान में टैक्सपेयर्स को विभिन्न निवेश माध्यमों (जैसे LIC, PPF) में एक वित्त वर्ष के दौरान अधिकतम ₹1.5 लाख तक की ही छूट मिलती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सेक्शन 80C का यह लाभ केवल पुरानी टैक्स रीजीम (Old Tax Regime) चुनने वाले करदाताओं को ही मिलता है। यदि सरकार इस सुझाव को बजट 2026 में शामिल करती है, तो मध्यम वर्ग के पास बचत करने और टैक्स बचाने के ज्यादा अवसर होंगे।
सेक्शन 80C में बदलाव की मांग
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत निवेश के करीब एक दर्जन विकल्प मिलते हैं, जिनमें ELSS, लाइफ इंश्योरेंस, PPF और बच्चों की ट्यूशन फीस जैसे खर्च शामिल हैं। यहाँ तक कि होम लोन के मूलधन (Principal) पर भी इसी सेक्शन में छूट मिलती है। एमचैम (AMCHAM) का तर्क है कि सरकार ने साल 2014 के बाद से इस ₹1.5 लाख की सीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। पिछले 12 वर्षों में लोगों की आय और खर्च दोनों बढ़े हैं, लेकिन निवेश पर छूट की सीमा स्थिर रहने से टैक्स का बोझ भी बढ़ गया है। इसलिए अब समय आ गया है कि बजट 2026 में इस लिमिट को संशोधित किया जाए।
80C की लिमिट बढ़ने से मिडिल क्लास की बढ़ेगी बचत
अगर बजट 2026 में सरकार सेक्शन 80C के तहत निवेश की सीमा को बढ़ाकर ₹2.5 लाख करती है, तो इससे करोड़ों करदाताओं को सीधा लाभ होगा। जानकारों का मानना है कि यह सेक्शन भारतीय परिवारों की बचत की आदतों को सुधारने में सबसे महत्वपूर्ण रहा है। आज भी बड़ी संख्या में लोग पुरानी टैक्स रीजीम (Old Regime) को ही पसंद करते हैं, क्योंकि यह उन्हें टैक्स बचाने के साथ-साथ भविष्य के लिए निवेश करने के लिए प्रेरित करता है। PPF और ELSS जैसे विकल्पों में निवेश करने से मिडिल क्लास न केवल टैक्स बचाता है, बल्कि लंबी अवधि में एक मजबूत रिटायरमेंट फंड भी तैयार कर पाता है।
क्या इस बार पुरानी रीजीम वालों की किस्मत चमकेगी?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2020 में नई टैक्स रीजीम (New Tax Regime) पेश की थी, जिसे और अधिक आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े कदम उठाए हैं। इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 करना, इसे ‘डिफ़ॉल्ट’ मोड बनाना और पिछले बजट में ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री करना शामिल है।
हालांकि, इन बदलावों के बीच उन करदाताओं को निराशा हाथ लगी है जो अभी भी पुरानी टैक्स रीजीम (Old Regime) का पालन कर रहे हैं। पिछले कई सालों से पुरानी रीजीम के टैक्स स्लैब या निवेश छूट की सीमाओं में कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है, जिसके कारण अब बजट 2026 से पुरानी रीजीम के समर्थकों को बड़ी उम्मीदें हैं।









