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विधवा पेंशन पर दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! पुनर्विवाह के बाद भी मिलती रहेगी पति की पेंशन? जानें नियम 54

क्या विधवा महिला दूसरी शादी के बाद भी अपने दिवंगत पति की पेंशन पाने की हकदार है? दिल्ली हाई कोर्ट ने पेंशन 'नियम 54' पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विधवाओं के हक में बड़ी व्यवस्था दी है। इस फैसले के कानूनी आधार और शर्तों को विस्तार से जानने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

By Pinki Negi

विधवा पेंशन पर दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! पुनर्विवाह के बाद भी मिलती रहेगी पति की पेंशन? जानें नियम 54
दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने विधवाओं के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी दिवंगत सरकारी कर्मचारी की पत्नी का कोई बच्चा नहीं है, तो वह दोबारा शादी करने के बाद भी पारिवारिक पेंशन की हकदार रहेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा उन महिलाओं को मिलेगी जिनकी अपनी कोई स्वतंत्र कमाई नहीं है। जस्टिस अनिल क्षतरपाल और अमित महाजन की बेंच के अनुसार, यह नियम समाज कल्याण के उद्देश्य से बनाया गया है ताकि विधवाओं को आर्थिक सहारा मिल सके और वे बिना किसी वित्तीय चिंता के अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकें।

CRPF जवान की पेंशन पर विवाद

यह कानूनी मामला केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक शहीद जवान की पेंशन से जुड़ा है। जवान की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी को नियमानुसार पेंशन मिल रही थी, लेकिन उनके पुनर्विवाह के बाद मृतक जवान के माता-पिता ने इस पर अपना दावा पेश कर दिया। माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में दलील दी कि दूसरी शादी के बाद विधवा को पेंशन नहीं मिलनी चाहिए और यह राशि आश्रित माता-पिता को दी जानी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस चुनौती को खारिज करते हुए विधवा के हक में फैसला सुनाया और सरकारी नियमों की वैधता को सही ठहराया।

क्या दूसरी शादी के बाद खत्म हो जाता है विधवा का हक?

कोर्ट में मृतक जवान के माता-पिता ने एक भावुक दलील पेश की। उनका कहना था कि पुनर्विवाह के बाद विधवा का अपने पूर्व पति के परिवार से कानूनी नाता टूट जाता है, इसलिए उसे पेंशन मिलना गलत है। माता-पिता ने तर्क दिया कि एक ओर बुजुर्ग और आश्रित माता-पिता इस आर्थिक मदद से वंचित हैं, वहीं दूसरी ओर पुनर्विवाह कर चुकी महिला को यह लाभ मिल रहा है, जो न्याय के खिलाफ है। उन्होंने इस नियम को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की, ताकि पेंशन का लाभ मृतक के माता-पिता को मिल सके।

पेंशन विरासत नहीं, सामाजिक सुरक्षा है

दिल्ली हाईकोर्ट ने माता-पिता की दलीलों को नामंजूर करते हुए एक बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। अदालत ने साफ कहा कि पारिवारिक पेंशन कोई विरासत में मिलने वाली संपत्ति नहीं है, बल्कि यह सरकार द्वारा दी जाने वाली एक सामाजिक सुरक्षा है जो तय नियमों के आधार पर चलती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार पेंशन पाने वालों की एक प्राथमिकता सूची होती है, जिसमें मृतक की पत्नी का स्थान सबसे ऊपर है। जब तक विधवा जीवित है और नियमों के तहत पात्र है, तब तक माता-पिता पेंशन पर दावा नहीं कर सकते।

विधवाओं का पुनर्विवाह और आर्थिक सुरक्षा

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में एक बहुत ही मानवीय दृष्टिकोण पेश किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार की इस नीति का मकसद केवल पैसा देना नहीं, बल्कि विधवाओं को दोबारा घर बसाने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। कोर्ट के अनुसार, विधवाओं के पुनर्विवाह को बढ़ावा देना एक सराहनीय कदम है ताकि वे समाज में असुरक्षित महसूस न करें। इसके अलावा, पीठ ने जोर देकर कहा कि देश के लिए जान देने वाले जवानों के परिवारों और उनके आश्रितों को आर्थिक संकट से बचाना सरकार की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।

हाईकोर्ट ने बताया कब मिलता है माता-पिता को लाभ

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया है कि पारिवारिक पेंशन पर पहला हक पत्नी और बच्चों का ही होता है। अदालत के अनुसार, माता-पिता को पेंशन का लाभ केवल उसी स्थिति में मिल सकता है जब कर्मचारी के पीछे कोई विधवा या संतान न हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई विधवा निःसंतान है और उसके पास आय का कोई ठोस जरिया नहीं है, तो दोबारा शादी करने के बावजूद उसका पेंशन का हक खत्म नहीं होता। माता-पिता को इस प्रक्रिया से बाहर रखना पूरी तरह से संवैधानिक और नियमों के दायरे में है।

पारिवारिक पेंशन उत्तराधिकार नहीं बल्कि आर्थिक सहारा है

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बार फिर जोर देकर कहा है कि पारिवारिक पेंशन का असली उद्देश्य परिवार को तुरंत और लगातार आर्थिक मदद पहुँचाना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसे कोई निजी संपत्ति या उत्तराधिकार का हिस्सा नहीं माना जा सकता जिसे वारिसों के बीच बांटा जाए। अदालत के अनुसार, पेंशन नियमों के तहत जो प्राथमिकता तय की गई है, वह पूरी तरह सोच-समझकर बनाई गई नीति पर आधारित है और इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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