
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो आरक्षण व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। आसान शब्दों में कहें तो, अगर कोई SC, ST या OBC कैटेगरी का उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा मार्क्स लाता है, तो उसे अनरिजर्व सीटों पर जगह मिलनी चाहिए। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने इसे कानून का स्थापित सिद्धांत बता दिया। ये फैसला केरल हाईकोर्ट के 2020 के एक पुराने फैसले को पलटते हुए आया है। अब सवाल ये उठता है कि ये बदलाव सरकारी नौकरियों और एडमिशन में क्या असर डालेगा? आइए, पूरी बात को समझते हैं।
अनरिजर्व सीटें किसकी जागीर नहीं हैं?
जस्टिस शर्मा ने फैसले में साफ कहा कि अनरिजर्व या ओपन कैटेगरी किसी खास ग्रुप की ‘कोटा’ नहीं है। ये पूरी तरह मेरिट पर आधारित है, जो हर योग्य उम्मीदवार के लिए खुली है। सोचिए, अगर कोई रिजर्व कैटेगरी का लड़का या लड़की मेहनत करके जनरल कट-ऑफ से ऊपर स्कोर कर ले, तो उसे क्यों नीचे रखा जाए? ये फैसला अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (नौकरी में बराबरी) की भावना को मजबूत करता है।
बेंच ने जोर दिया कि बिना किसी छूट (जैसे उम्र या फीस में रियायत) के बेहतर प्रदर्शन करने वाले को ओपन कैटेगरी में गिना जाए। इससे रिजर्व कोटे की सीट उनके कैटेगरी के अगले योग्य उम्मीदवार को मिल जाएगी। ये एक तरह का बैलेंस है, जहां मेरिट को प्राथमिकता मिलेगी।
पूरा मामला क्या था?
ये विवाद 2013 में एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की 245 जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विसेज) पदों की भर्ती से जन्मा। सिलेक्शन के बाद AAI ने 122 अनरिजर्व सीटें भरीं। इसमें जनरल कैटेगरी के साथ-साथ OBC, SC और ST के मेरिटोरियस उम्मीदवारों (जिन्होंने जनरल कट-ऑफ क्रॉस किया था) को शामिल किया। लेकिन केरल हाईकोर्ट ने 2020 में इसे गलत ठहराया और कहा कि ऐसी सीटें सिर्फ जनरल कैटेगरी वालों के लिए हैं। हाईकोर्ट ने AAI को एक अनरिजर्व उम्मीदवार को अपॉइंट करने का आदेश दिया, जिससे मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी वाले बाहर हो गए।
AAI और प्रभावित उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। बेंच ने तर्क दिया कि आरक्षण सामाजिक न्याय के लिए है, लेकिन मेरिट को कुर्बान नहीं किया जा सकता। अगर रिजर्व कैटेगरी का कोई टॉपर आता है, तो उसे रोकना अन्याय होगा। ये फैसला न सिर्फ AAI केस को सुलझाता है, बल्कि पूरे देश की भर्ती प्रक्रिया पर असर डालेगा।
उम्मीदवार कब बनता है जनरल सीट का हकदार?
साफ नियम ये है: रिजर्व कैटेगरी का उम्मीदवार तब ओपन वैकेंसी का हकदार होता है, जब उसके मार्क्स जनरल कट-ऑफ से ज्यादा हों। कोई छूट न लें, बस अपनी मेहनत से ऊपर चढ़ें। उदाहरण लीजिए, मान लीजिए जनरल कट-ऑफ 70 मार्क्स है। अगर OBC का कोई लड़का 75 स्कोर करता है, तो वो ओपन सीट ले सकता है।
इससे उसकी रिजर्व सीट उसके कैटेगरी के अगले नंबर वाले को मिलेगी। कोर्ट ने इसे ‘मेरिट-बेस्ड शिफ्टिंग’ कहा। ये पुरानी प्रथा को चुनौती देता है, जहां कई बार मेरिटोरियस कैंडिडेट्स को इग्नोर कर दिया जाता था।
सरकारी नौकरियों और आगे का रास्ता
ये फैसला UPSC, SSC जैसी परीक्षाओं में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब संस्थाओं को अपनी मेरिट लिस्ट दोबारा चेक करनी पड़ेगी। मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी वालों को न्याय मिलेगा, और ओपन कैटेगरी में सच्ची प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। लेकिन सवाल ये भी है – क्या इससे रिजर्व कोटा कमजोर होगा? कोर्ट का जवाब ना में है, क्योंकि अगले योग्य कोटा ले लेगा। सरकार और संस्थाओं को जल्दी गाइडलाइंस जारी करने होंगी। युवाओं के लिए ये अच्छी खबर है – मेहनत रंग लाएगी, कैटेगरी भले ही कोई भी हो।









