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दुनिया में सबसे ज्यादा गोल्ड किसके पास? जानें भारत इस रैंकिंग में कहां है

दुनिया के सेंट्रल बैंक चुपचाप सोने की तिजोरियां भर रहे हैं। अमेरिका टॉप पर 8100 टन के साथ, रूस-चीन तेजी से पीछा कर रहे। भारत के 800-900 टन RBI रिजर्व टॉप 10 में, लेकिन आक्रामकता की कमी। जंग, मंदी के डर से दाम आसमान पर। क्या ये de-dollarization का संकेत? भारत को रणनीति तेज करनी होगी!

By Pinki Negi

दुनिया में सबसे ज्यादा गोल्ड किसके पास? जानें भारत इस रैंकिंग में कहां है

सोचिए, दुनिया भर के बड़े-बड़े सेंट्रल बैंक चुपके-चुपके अपनी तिजोरियां सोने से भर रहे हैं। आम आदमी की नजर सिर्फ सोने के दामों पर टिकी है, जो आसमान छू रहे हैं। लेकिन ये क्या बाजार का खेल है या कोई बड़ा वैश्विक संकट का इशारा? रूस-यूक्रेन जंग, मिडिल ईस्ट का तनाव और मंदी की आहट के बीच कई देश हजारों टन सोना जमा रहे हैं। क्या ये महज निवेश है या जंग की तैयारी? और हमारा भारत इस रेस में कहां? आइए, आज हिसाब लगाते हैं – बिल्कुल साफ-साफ।

गोल्ड रिजर्व आखिर होता क्या है?

सबसे पहले बेसिक्स क्लियर कर लें। गोल्ड रिजर्व वो सोना है जो किसी देश का सेंट्रल बैंक या सरकार अपनी तिजोरी में रखती है। ये न ज्वेलरी बनाने के लिए, न मंदिरों के भंडार के लिए – बल्कि आर्थिक ताकत, मुद्रा पर भरोसा और मुसीबत के समय ढाल बनने के लिए। पुराने जमाने से ही सोना ‘अल्टीमेट पेमेंट’ माना जाता रहा है। कागजी नोट, डिजिटल करेंसी सब भूल जाओ, संकट में यही चमकता है। आजकल भू-राजनीतिक तनावों के बीच ये रिजर्व देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा हथियार बन चुके हैं।

दुनिया की टॉप तिजोरियां

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के लेटेस्ट डेटा पर नजर डालें तो सोने का बादशाह अभी भी अमेरिका है। उसके पास 8,100 टन से ज्यादा सोना है, ज्यादातर फोर्ट नॉक्स जैसी सुपर-सिक्योर जगहों पर। दूसरे स्पॉट पर जर्मनी – करीब 3,300 टन। फिर इटली और फ्रांस, 2,400-2,500 टन के साथ। रूस और चीन ने पिछले दशक में रफ्तार पकड़ी है, दोनों के पास अब 2,300 टन के आसपास। स्विट्जरलैंड, जापान और भारत 800-1,000 टन की रेंज में। भारत का RBI करीब 800-900 टन सोना रखता है, जो टॉप 10 में जगह दिलाता है, लेकिन हमारी आबादी और सोने की भूख को देखें तो ये कम लगता है।

हाल के सालों में कौन लुटा सोने का बाजार?

2010 के बाद खेल बदल गया। 2022-23 में सेंट्रल बैंकों ने 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा – रिकॉर्ड स्तर! रूस ने पश्चिमी सैंक्शंस से बचने के लिए डॉलर छोड़ सोना थोप लिया। चीन का पीपुल्स बैंक भी लगातार खरीद रहा, US बॉन्ड्स से दूरी बना रहा। तुर्की, कजाकिस्तान, कतर, पोलैंड जैसे देश भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव के लिए सोने पर दांव लगा रहे। हंगरी के सेंट्रल बैंक चीफ ने साफ कहा – सोना अब सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, राष्ट्रीय स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। ये ट्रेंड de-dollarization का संकेत देता है।

सोने के दाम क्यों फटे पड़े? तीन बड़ी वजहें

सोना आज रिकॉर्ड हाई पर है। पहली वजह – जंगें और तनाव। रूस-यूक्रेन, ईरान-इसराइल, ताइवान का मुद्दा – सब निवेशकों को ‘सेफ हेवन’ सोने की ओर धकेल रहे। दूसरी – महंगाई और मंदी का डर। कागजी एसेट्स डगमगा रहे, लोग फिजिकल गोल्ड में कूद पड़े। तीसरी – खुद बैंकों की भूख। सालाना हजार टन बाजार से सोना निकल जाए तो सप्लाई टाइट हो, दाम चढ़ें। मशहूर इन्वेस्टर रे डेलियो कहते हैं – सोना न हो तो इतिहास-अर्थशास्त्र की समझ अधूरी।

भारत का सोना: प्यार तो है, ताकत कम

हम भारतवासी सोने के दीवाने हैं – शादी, त्योहार, संस्कृति। दुनिया के टॉप उपभोक्ता हम ही। लेकिन RBI के 800-900 टन रिजर्व कुल फॉरेक्स का छोटा हिस्सा हैं। RBI ने हाल में खरीद बढ़ाई, लेकिन आक्रामक नहीं। समस्या? हम आयातक हैं, प्रोड्यूसर नहीं। दाम बढ़े तो इंपोर्ट बिल फूला, करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ा, रुपया दबा। सरकार गोल्ड बॉन्ड्स, ETF और हॉलमार्किंग से फिजिकल इंपोर्ट कम करने की कोशिश कर रही।

भारत को कितना आक्रामक होना चाहिए?

ग्लोबल रिपोर्ट्स कहती हैं – तनाव बने रहेंगे तो सोने की खरीद जारी। भारत के लिए दोहरी चुनौती: जनता की डिमांड और रिजर्व मैनेजमेंट। अगर RBI रिजर्व बढ़ाए, रिसाइक्लिंग प्रमोट करे, डिजिटल गोल्ड स्ट्रॉन्ग करे तो सोने की ‘लत’ ताकत बनेगी। क्लियर कट – सोना अब गहना नहीं, भू-राजनीतिक शील्ड है। अमेरिका से चीन तक सब जमा रहे। भारत को प्यार के साथ स्ट्रैटेजी जोड़नी होगी। आपका क्या ख्याल – RBI को कितना सोना जमा करना चाहिए?

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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