
कर्नाटक के गडग जिले में एक 8वीं कक्षा के छात्र, प्रज्वल रिट्टी ने अपनी सच्चाई से सबको हैरान कर दिया है। प्रज्वल और उसकी विधवा मां, जो बेहद गरीबी में अपना जीवन बिता रहे हैं, अपने घर के लिए जमीन की खुदाई कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें मिट्टी के नीचे दबा हुआ करीब 100 साल पुराना खजाना मिला, जिसमें 466 ग्राम सोने के कीमती गहने और प्राचीन अवशेष शामिल थे।
खजाने में भारी सोने की माला, कंगन और कीमती रत्न जैसी बहुमूल्य चीजें थीं, जिन्हें देखकर किसी का भी मन डोल सकता था। लेकिन प्रज्वल ने लालच न करते हुए इस पूरे खजाने को सरकारी अधिकारियों को सौंप दिया। उसकी इस ईमानदारी ने साबित कर दिया कि संस्कार और सच्चाई दौलत से कहीं बढ़कर होते हैं।
“ईमानदारी खजाने से भी बड़ी”: मुख्यमंत्री ने की प्रज्वल के साहस की सराहना
प्रज्वल की इस अद्भुत सच्चाई को देखकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कानून मंत्री एचके पाटिल ने उसकी जमकर तारीफ की है। मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि प्रज्वल की ईमानदारी किसी भी धन-दौलत या खजाने से कहीं ज्यादा कीमती है और ऐसी मिसाल पेश करने वाले बच्चे को उचित सम्मान मिलना ही चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस गरीब परिवार की पूरी मदद करेगी और उन्हें इनाम भी देगी। गडग जिले के प्रभारी मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से प्रज्वल के परिवार से मुलाकात की और कहा कि कैबिनेट में चर्चा कर जल्द ही परिवार को विशेष सहायता और सम्मान देने का फैसला लिया जाएगा।
मिट्टी से निकला सोने का मटका, फिर प्रज्वल ने जो किया वो मिसाल बन गया
प्रज्वल और उसकी मां गंगव्वा लंबे समय से गरीबी का सामना कर रहे हैं। मां मजदूरी करके घर चलाती है और पूरा परिवार फिलहाल दादी के घर में रहने को मजबूर है। अपनी थोड़ी सी जमीन पर छोटा सा घर बनाने का सपना लिए जब उन्होंने खुदाई शुरू करवाई, तो करीब 5 फीट की गहराई पर मजदूर का फावड़ा एक धातु से टकराया।
वहां मिट्टी के नीचे एक मटका दबा था, जो सोने के गहनों, कीमती पत्थरों और तांबे के अवशेषों से लबालब भरा था। इतनी संपत्ति देखकर भी प्रज्वल ने लालच नहीं किया। उसने तुरंत खजाने को सुरक्षित स्थान पर रखा और परिवार से चर्चा कर यह साहसी फैसला लिया कि यह संपत्ति सरकार की है। मंगलवार को उसने सारा खजाना प्रशासन को सौंप दिया, जो अब सरकारी संरक्षण में सुरक्षित है।
सरकार प्रज्वल के परिवार को देगी बड़ा रिवॉर्ड
प्रज्वल की माँ गंगव्वा ने सरकार से अपील की है कि उनके बेटे की ईमानदारी के बदले परिवार को आर्थिक सहायता, प्रज्वल को सरकारी नौकरी और उनके घर के रुके हुए निर्माण कार्य को पूरा करने की अनुमति दी जाए। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि कानून के मुताबिक, खोजा गया खजाना लौटाने पर उसके मूल्य का 20 प्रतिशत हिस्सा परिवार को दिया जा सकता है।
सरकार जल्द ही कैबिनेट बैठक में इस विशेष इनाम और सहायता राशि पर मुहर लगाएगी। आज प्रज्वल पूरे इलाके के लिए एक ‘हीरो’ बन चुका है। उसकी इस कहानी ने समाज को यह बड़ा संदेश दिया है कि असली खजाना सोने के जेवर नहीं, बल्कि इंसान की नैतिकता और ईमानदारी होती है।









