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दुनिया की 10 खुफिया एजेंसियां, जिनके नाम से थर्राते हैं दुश्मन – जानें कैसे करती हैं काम

हैकर्स, जासूस और खतरनाक गुप्त मिशन! जानें दुनिया की उन 10 खूंखार खुफिया एजेंसियों के बारे में, जो दुश्मन के घर में घुसकर तबाही मचाती हैं। सैटेलाइट ट्रैकिंग से लेकर फोन टैपिंग तक, इनके काम करने का तरीका जानकर आप दंग रह जाएंगे।

By Pinki Negi

दुनिया की 10 खुफिया एजेंसियां, जिनके नाम से थर्राते हैं दुश्मन – जानें कैसे करती हैं काम
दुनिया की 10 खुफिया एजेंसियां

दुनिया के हर देश के पास अपनी एक ऐसी खुफिया एजेंसी होती है, जिसका मुख्य काम देश की सीमाओं की सुरक्षा करना और बाहरी खतरों को भांपना होता है। ये एजेंसियां इतनी रहस्यमयी और खतरनाक होती हैं कि वे दुश्मन के बड़े से बड़े मंसूबों को पल भर में नाकाम करने की ताकत रखती हैं।

चाहे बात आतंकियों के खात्मे की हो या दूसरे देशों की साजिशों को उजागर करने की, ये सीक्रेट सर्विस एजेंसियां अपने देश की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहती हैं। आज हम आपको दुनिया की उन टॉप 10 खुफिया एजेंसियों के बारे में बताएंगे, जिनका नाम सुनते ही दुश्मन देशों के पसीने छूट जाते हैं।

भारत

रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) भारत की वह ताकतवर विदेशी खुफिया एजेंसी है, जिसका मुख्य काम देश की सीमाओं के बाहर हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नज़र रखना है। इसकी स्थापना साल 1968 में की गई थी ताकि विदेशी खतरों से देश को सुरक्षित रखा जा सके।

जहाँ देश के भीतर की सुरक्षा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) संभालती है, वहीं RAW बाहरी देशों में गुप्त ऑपरेशन चलाकर दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम करती है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में RAW की रणनीतियों ने जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। आज अपनी सटीक सूचनाओं और साहसी गुप्त मिशनों के कारण RAW का लोहा पूरी दुनिया मानती है।

मोसाद

इज़राइल की मोसाद को दुनिया की सबसे घातक और अचूक खुफिया एजेंसी माना जाता है। इसकी शुरुआत 13 दिसंबर 1949 को इज़राइल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन के निर्देश पर हुई थी। मोसाद अपनी “घर में घुसकर मारने” की नीति और कभी न चूकने वाले सटीक ऑपरेशनों के लिए मशहूर है। हज़ारों सीक्रेट एजेंट्स और विशाल बजट के दम पर यह एजेंसी पूरी दुनिया में आतंकवादियों और देश के दुश्मनों का पीछा करती है। मोसाद की कार्यप्रणाली इतनी रोमांचक और चालाकी भरी है कि इस पर हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक कई फिल्में और बेस्टसेलर किताबें बन चुकी हैं।

CIA

  • RAW (भारत): 1968 में बनी यह एजेंसी भारत के बाहर दुश्मनों पर नजर रखती है। 1971 के युद्ध में इसकी भूमिका ने इसे दुनिया की सबसे असरदार एजेंसियों में शामिल कर दिया।
  • Mossad (इज़राइल): 1949 में स्थापित मोसाद अपने सटीक ‘खात्मे के मिशन’ (Assassination) के लिए जानी जाती है। इसके सीक्रेट ऑपरेशन्स पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं।
  • CIA (अमेरिका): 1947 में शुरू हुई यह एजेंसी जासूसी के लिए हाई-टेक मशीनों और अनोखे तरीकों का इस्तेमाल करती है। यह वैश्विक साइबर हमलों और जासूसी को रोकने में माहिर है।

MI6 (ब्रिटेन)

ब्रिटेन की MI6 (मिलिट्री इंटेलिजेंस, सेक्शन 6) एक बेहद गोपनीय विदेशी खुफिया एजेंसी है। इसका मुख्य काम दुनिया भर से ब्रिटेन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और आतंकवाद व साइबर हमलों जैसे खतरों को रोकना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बनाए रखने के लिए यह एजेंसी पर्दे के पीछे रहकर काम करती है। MI6 अपनी गोपनीयता के लिए इतनी प्रसिद्ध है कि इसके अधिकांश ऑपरेशन्स कभी सार्वजनिक नहीं होते।

ISI (पाकिस्तान)

पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की स्थापना साल 1948 में हुई थी, जिसका मुख्यालय इस्लामाबाद में है। यह एजेंसी अपने बेहद गुप्त और प्रभावशाली ऑपरेशन्स के लिए जानी जाती है, लेकिन साथ ही यह दुनिया की सबसे विवादित खुफिया एजेंसियों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ISI पर कई बार आतंकवादी संगठनों को मदद देने और पड़ोसी देशों में अस्थिरता फैलाने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। विवादों के बावजूद, इसे पाकिस्तान की सुरक्षा नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

FSB (रूस)

रूस की FSB (फेडरल सिक्योरिटी सर्विस) को दुनिया की सबसे सख्त और निडर खुफिया एजेंसियों में गिना जाता है। इसकी स्थापना 1995 में सोवियत संघ की मशहूर एजेंसी KGB के उत्तराधिकारी के रूप में हुई थी। FSB का कार्यक्षेत्र काफी बड़ा है, जो रूस के भीतर और बाहर दोनों जगह सक्रिय रहती है। आतंकवाद को कुचलना, विदेशी जासूसी को रोकना और रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा को अभेद्य बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है। अपने कठोर अनुशासन और खतरनाक ऑपरेशनों के कारण इस एजेंसी का पूरी दुनिया में एक अलग ही खौफ है।

MSS (चीन)

चीन की मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी (MSS) दुनिया की सबसे रहस्यमयी और सक्रिय खुफिया एजेंसियों में से एक है। इसका मुख्य काम देश के भीतर और बाहर जासूसी करना, विरोधियों पर नज़र रखना और विदेशी ताकतों की जवाबी कार्रवाई को रोकना है। MSS को विशेष रूप से उसकी साइबर जासूसी (Cyber Espionage) क्षमताओं के लिए जाना जाता है, जहाँ यह दुनिया भर के डेटा और तकनीकी जानकारी को जुटाने में माहिर मानी जाती है। राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के नाम पर यह एजेंसी तकनीकी जासूसी और विदेशी निगरानी के जरिए चीन के वैश्विक हितों की रक्षा करती है।

ASIS, MSS और FSB की ताकत

  • ASIS (ऑस्ट्रेलिया): यह ऑस्ट्रेलिया की विदेशी खुफिया एजेंसी है, जिसका मुख्य ध्यान एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और गुप्त सूचनाएं जुटाने पर रहता है।
  • MSS (चीन): चीन की यह एजेंसी अपनी साइबर जासूसी के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यह तकनीक और विदेशी निगरानी के जरिए डेटा जुटाने में सबसे सक्रिय मानी जाती है।
  • FSB (रूस): पूर्व सोवियत संघ की KGB की उत्तराधिकारी यह एजेंसी अपने बेहद सख्त और खतरनाक ऑपरेशन्स के लिए जानी जाती है, जो रूस के अंदर और बाहर सुरक्षा संभालती है।

DGSE (फ्रांस)

DGSE (जनरल डायरेक्टोरेट फॉर एक्सटर्नल सिक्योरिटी) फ्रांस की बेहद प्रभावशाली विदेशी खुफिया एजेंसी है। इसका मुख्य कार्य फ्रांस की सीमाओं के बाहर से खुफिया जानकारी जुटाना और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के नेटवर्क को ध्वस्त करना है। यह एजेंसी यूरोप और दुनिया भर की अन्य खुफिया संस्थाओं के साथ तालमेल बिठाकर काम करती है, ताकि वैश्विक स्तर पर उभरते नए सुरक्षा खतरों और साइबर चुनौतियों का मुकाबला किया जा सके। अपनी सटीक रणनीतियों के कारण इसे यूरोप की सबसे भरोसेमंद खुफिया सेवाओं में से एक माना जाता है।

कैसे काम करती हैं खुफिया एजेंसियां?

खुफिया एजेंसियां एक सुनियोजित प्रक्रिया के तहत काम करती हैं, जिसकी शुरुआत सरकार की प्राथमिकताओं और सुरक्षा जरूरतों को तय करने से होती है। जानकारी जुटाने के लिए ये एजेंसियां मानवीय संपर्कों (HUMINT), फोन टैपिंग, सैटेलाइट निगरानी और साइबर हैकिंग जैसे आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करती हैं।

इन कच्ची जानकारियों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद इन्हें देश के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों तक पहुँचाया जाता है, ताकि सही समय पर सटीक फैसले लिए जा सकें। इसके अलावा, ये एजेंसियां आतंकवाद को खत्म करने और दुश्मन की साजिशों को नाकाम करने के लिए देश के बाहर जाकर बेहद जोखिम भरे गुप्त मिशन भी अंजाम देती हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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