
सड़क हादसों को रोकने और नियमों को सख्त बनाने के लिए सरकार मोटर वाहन कानून (Motor Vehicle Act) में बड़े बदलाव करने जा रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय के नए प्रस्ताव के अनुसार, अब सड़क पर बिना बीमा (Insurance) के दौड़ने वाले वाहनों को पुलिस तुरंत ज़ब्त या डिटेन कर सकेगी। इसके अलावा, उन लोगों पर भी बड़ी पाबंदी लगाने की तैयारी है जिनका ड्राइविंग लाइसेंस पिछले तीन सालों में किसी गंभीर गलती की वजह से रद्द किया गया है; ऐसे लोगों को अब नया लाइसेंस नहीं मिल पाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर असुरक्षित ड्राइविंग को रोकना और हर वाहन का बीमा सुनिश्चित करना है।
अब आपकी ड्राइविंग हिस्ट्री तय करेगी गाड़ी के बीमा की कीमत
सड़क परिवहन मंत्रालय के नए प्रस्तावों के अनुसार, अब गाड़ी के इंश्योरेंस का प्रीमियम केवल उसकी उम्र पर नहीं, बल्कि आपके ड्राइविंग रिकॉर्ड पर भी निर्भर करेगा। राज्यों के साथ साझा किए गए इस नए नियम के तहत बीमा नियामक IRDAI को यह अधिकार मिलेगा कि वह ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और आपके पुराने चालानों के आधार पर बीमा की दरें तय करे।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप बार-बार नियम तोड़ते हैं और आपके नाम पर ज़्यादा चालान दर्ज हैं, तो आपको अपनी गाड़ी के बीमा के लिए ज़्यादा पैसे चुकाने होंगे। सरकार इस बदलाव के ज़रिए लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है।
नियम तोड़ने वालों को दोबारा देना होगा ड्राइविंग टेस्ट
सड़कों पर बढ़ती लापरवाही को देखते हुए सरकार अब ड्राइविंग लाइसेंस (DL) के नियमों को और कड़ा करने जा रही है। मंत्रालय के नए प्रस्ताव के अनुसार, जिन ड्राइवरों का पिछला रिकॉर्ड खराब रहा है या जिनके नाम पर असुरक्षित ड्राइविंग के कई चालान हैं, उन्हें लाइसेंस रिन्यू कराते समय दोबारा ड्राइविंग टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा।
वर्तमान में, लाइसेंस खत्म होने के एक साल के भीतर रिन्यू कराने पर दोबारा टेस्ट नहीं देना पड़ता, लेकिन अब ‘असुरक्षित ड्राइवरों’ के लिए यह छूट खत्म हो सकती है। साथ ही, बड़ी संख्या में बिना इंश्योरेंस के चल रहे दोपहिया वाहनों पर लगाम लगाने के लिए भी कानून में बदलाव किए जा रहे हैं ताकि सड़क सुरक्षा को पुख्ता किया जा सके।
लाइसेंस रिन्यूअल पर विशेषज्ञों की राय
दिल्ली के पूर्व उप परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा ने सरकार के नए प्रस्तावों पर एक महत्वपूर्ण पहलू सामने रखा है। उनका मानना है कि 15 साल की लंबी लाइसेंस अवधि के दौरान किसी का चालान कटना एक सामान्य बात हो सकती है, इसलिए केवल चालान के आधार पर नियम तय करना थोड़ा पक्षपाती हो सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया है कि बजाय केवल नियम तोड़ने वालों के, हर किसी के लिए रिन्यूअल से पहले ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य कर देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि अगर किसी का लाइसेंस रद्द होता है, तो उस पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के बजाय उसे अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका मिलना चाहिए और जांच में सही पाए जाने पर नया लाइसेंस जारी कर देना चाहिए।
अब 60 साल की उम्र तक मेडिकल सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं
सड़क परिवहन मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर कई बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। अब भारी और बड़े वाहनों को चलाने के लिए ‘ग्रेडेड लाइसेंस’ सिस्टम शुरू किया जा सकता है, जिसमें ड्राइवर के अनुभव और उसके कौशल को परखने के बाद ही लाइसेंस मिलेगा।
साथ ही, आम जनता को बड़ी राहत देते हुए मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने की अनिवार्य उम्र को 40 से बढ़ाकर 60 साल करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, प्राइवेट गाड़ियों के लिए भी ‘थर्ड पार्टी बीमा’ का दायरा बढ़ाने की योजना है, जिससे अब एक्सीडेंट होने पर गाड़ी के मालिक, ड्राइवर और उसमें बैठे यात्रियों को भी बीमा कवर मिल सकेगा, जो सुविधा अभी केवल कमर्शियल गाड़ियों को मिलती है।









