
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों ने तबाही मचा दी है, वहीं अब कुर्द लड़ाकों की जमीनी घुसपैठ ने तेहरान को अंदर से तोड़ने की साजिश रच दी है। ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति के तहत CIA कुर्द विपक्षी गुटों को हथियार दे रही है, जिससे पश्चिमी ईरान में स्वतंत्र कुर्दिस्तान का सपना साकार हो सकता है। क्या दुनिया एक नए देश के जन्म की गवाह बनेगी?
कुर्दों का ग्राउंड ऑपरेशन शुरू
इराकी कुर्दिस्तान से हजारों कुर्द लड़ाके ईरान-इराक बॉर्डर पार कर पश्चिमी ईरान में घुस चुके हैं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सशस्त्र बल ईरानी सुरक्षा ताकतों पर हमला बोलने को तैयार हैं, इजरायल-अमेरिका से इंटेलिजेंस और हथियारों का समर्थन मिल रहा है। ईरानी कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी (KDPI) के अध्यक्ष मुस्तफा हिजरी के साथ ट्रंप की बैकडोर बातचीत ने इस अभियान को हवा दी है।
KDPI और ईरान की IRGC के बीच 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से खुली दुश्मनी चली आ रही है, जहां ईरान ने कई बार कुर्द अड्डों को नष्ट किया। अब कुर्द बदला लेने को बेताब हैं, उत्तरी ईरान में बफर जोन बनाने की योजना है।
ट्रंप की ‘प्लान बी’: गृहयुद्ध की चिंगारी
वॉशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को घुटनों पर लाने के लिए दोहरी रणनीति चला रहे हैं। एक तरफ नेतन्याहू के साथ मिलकर तेहरान पर बमबारी, दूसरी ओर CIA के जरिए ईरानी विपक्ष को मजबूत करना। जगरण की खबरों के अनुसार, CIA कुर्दों को हथियार देने पर विचार कर रही है ताकि तेहरान शासन अस्थिर हो। इराकी कुर्दिस्तान में मौजूद ये लड़ाके इराक युद्ध और ISIS के खिलाफ अमेरिका के पुराने सहयोगी रहे हैं। ट्रंप अब इन्हें ईरान के खिलाफ ‘कुर्द बम’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था और आंतरिक असंतोष इस मौके को कुर्दों के लिए सुनहरा बना रहा है।
कुर्द: दुनिया का सबसे बड़ा बेसहारा समूह
कुर्द दुनिया के सबसे बड़े बिना देश वाले जातीय समूह हैं, जिनकी आबादी 2.5-3 करोड़ है। तुर्की, इराक, ईरान, सीरिया समेत कई देशों में फैले ये सुन्नी मुस्लिम अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता देते हैं। ईरान में वे स्वायत्तता या स्वतंत्र कुर्दिस्तान की मांग कर रहे हैं। अमेरिका ने इन्हें ISIS के खिलाफ इस्तेमाल किया, लेकिन बाद में तुर्की के दबाव में धोखा दिया।
अब ईरान युद्ध में कुर्दों को समर्थन मिला तो पश्चिमी ईरान का बड़ा हिस्सा अलग हो सकता है, मिडिल ईस्ट का नक्शा बदल सकता है। TV9 हिंदी की रिपोर्ट में ट्रंप के ‘ग्रेटर इजरायल’ वाले बयान पर OIC के 57 देश चिंतित हैं।
चुनौतियां और वैश्विक प्रभाव
ईरान ने इन रिपोर्ट्स को प्रोपगैंडा करार दिया है, IRGC कुर्द ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दे रहा है। तुर्की ने पहले ऐसी कोशिशें नाकाम की हैं, जबकि रूस-चीन ईरान के साथ खड़े हैं। यदि कुर्द सफल हुए तो नया ‘आजाद कुर्द देश’ बन सकता है, लेकिन क्या अमेरिका फिर इन्हें ठग जाएगा? ABP लाइव के अनुसार, तीसरे विश्व युद्ध की आशंका मंडरा रही है। भारत जैसे देशों को भी ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ेगा। अगले दिनों स्थिति स्पष्ट होगी।









