
लैटिन अमेरिका इस समय भय और अनिश्चितता के माहौल में डूबा हुआ है। हाल ही में कथित रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वेनेजुएला की राजधानी काराकास और अन्य प्रमुख शहरों में किए गए बड़े पैमाने पर सैन्य हमलों ने पूरे विश्व को चौंका दिया है। इस घटना ने विश्व राजनीति को एक बार फिर पुराने शीत युद्ध जैसे तनाव की याद दिला दी है।
काराकास में दहशत और अफरा-तफरी
हमलों के बाद काराकास में अंधेरा और भय का माहौल फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई इलाकों की बिजली गुल हो गई और आसमान में धुएं के घने गुबार देखे गए। नागरिक घरों में दुबक गए, मोबाइल नेटवर्क बाधित हो गए और शहर में सायरनों की आवाज़ गूंजने लगी। स्थानीय अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है, जबकि बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।
मादुरो सरकार का पलटवार और राष्ट्रीय आपातकाल
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने घटनाओं के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की। सरकार ने बयान जारी करके अमेरिकी कार्रवाई को “अत्यंत गंभीर सैन्य आक्रामकता” बताया है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि “यह हमला वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला है, और देश के नागरिक इसका डटकर मुकाबला करेंगे।”
वहीं अमेरिकी मीडिया स्रोतों में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को “सुरक्षित हिरासत” में लिया गया है, जबकि वेनेजुएला प्रशासन इस दावे को झूठा और दुष्प्रचार बता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भूचाल
हमलों की खबर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हिला कर रख दिया है। रूस और चीन ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और संयुक्त राष्ट्र में आपात बैठक बुलाने की मांग की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि “किसी भी देश की संप्रभुता पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून की खुली अवहेलना है।” वहीं कोलंबिया के राष्ट्रपति ने तटस्थ रुख अपनाते हुए संयुक्त राष्ट्र को मध्यस्थता के लिए आगे आने का आग्रह किया है। यूरोपीय संघ के कुछ देशों ने संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम की अपील की है।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि “अमेरिका ने वेनेजुएला के निरंकुश शासन से वहां के नागरिकों को मुक्त कराने के लिए यह कदम उठाया है।” व्हाइट हाउस के प्रवक्ताओं ने इसे “लोकतंत्र बहाली का ऑपरेशन” बताया, जबकि कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे “सत्ता परिवर्तन का प्रयास” मान रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई एक लंबे समय से चल रहे राजनीतिक तनाव का परिणाम है, जिसमें आर्थिक प्रतिबंध, तेल व्यापार और भू-राजनीतिक हित गहराई से जुड़े हैं।
लैटिन अमेरिका में बढ़ती अस्थिरता
लैटिन अमेरिका अब एक विभाजित महाद्वीप बन गया है। कई पड़ोसी देशों ने इस कार्रवाई पर मौन साध लिया है, जबकि कुछ ने गुपचुप रूप से अमेरिका का समर्थन किया है। जमैका, पनामा और चिली जैसे देशों के नेताओं ने अपने नागरिकों को “शांति बनाए रखने” की अपील की है।
इस बीच, हजारों वेनेजुएलावासी सुरक्षित सीमाओं की ओर पलायन कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस संभावित पलायन को “मानवीय संकट की नई लहर” करार दिया है।
स्थिति की अनिश्चित दिशा
फिलहाल स्थिति बेहद अस्थिर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की कार्रवाई पर टिकी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह विवाद केवल वेनेजुएला की सीमाओं में नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भी बड़ा बदलाव ला सकता है।
यदि यह सैन्य कार्रवाई वास्तविक होती है, तो यह आधुनिक इतिहास की सबसे विवादास्पद भू-राजनीतिक घटनाओं में से एक साबित होगी — जहां “लोकतंत्र के नाम पर हस्तक्षेप” और “संप्रभुता की रक्षा” के बीच महीन रेखा फिर से धुंधली पड़ गई है।









