
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष में अब ब्रिटेन भी सीधे तौर पर शामिल हो गया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार ने शुक्रवार (20 मार्च) को ऐतिहासिक उलटफेर करते हुए अमेरिका को अपने प्रमुख सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है, ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमला कर रहे ईरानी मिसाइल ठिकानों पर कार्रवाई की जा सके।
ब्रिटेन का “सामूहिक आत्मरक्षा” का दावा
डाउनिंग स्ट्रीट द्वारा जारी विस्तृत बयान के अनुसार, उच्चस्तरीय मंत्रियमंडल सुरक्षा बैठक में ईरान के हमलों और वैश्विक तेल आपूर्ति के मुख्य मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते व्यवधान पर गहराई से चर्चा हुई। स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत “सामूहिक आत्मरक्षा” (Collective Self-Defence) का हिस्सा है। अमेरिका को अब दो गंभीर सैन्य अड्डों का उपयोग करने की अनुमति मिली है:
- RAF फेयरफोर्ड (ग्लूकेशियरशायर, ब्रिटेन): यह अमेरिकी वायु सेना का यूरोप में एकमात्र भारी बॉम्बर एयरफ़ील्ड है, जहाँ से B-52 और B-2 स्टील्थ बॉम्बर उड़ान भर सकते हैं।
- डिएगो गार्सिया (हिंद महासागर): अमेरिकी-ब्रिटिश संयुक्त सैन्य बेस, जो गहरे ईरानी लक्ष्यों पर मिसाइल हमलों के लिए महत्वपूर्ण है।
स्टार्मर ने कहा, “हमने यह निर्णय लिया है ताकि ईरान क्षेत्र भर में मिसाइलें दागने से रोका जा सके। हमारी विमान रहित वायुसेना और लड़ाकू जгер पहले से ही ईरानी हमलों को रोकने में सफल रहे हैं।”
ट्रंप की दबावतिक्रिया और “कागजी शेर” टिप्पणी
यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार दबाव के बाद आया है। संघर्ष शुरू होने से स्टार्मर ने ब्रिटिश बेसों के आक्रामक उपयोग से इनकार कर दिया था, जिस पर ट्रंप ने उन्हें “शॉकिंग” करार दिया था और कहा था कि “यूके-यूएस गठबंधन नहीं वैसे ही जैसा पहले था।”
सीधे तौर पर ब्रिटेन की हिस्सेदारी के बावजूद, ट्रंप ने शुक्रवार को पूरे NATO गठबंधन पर जमकर निशाना साधा। “ट्रुथ सोशल” पर एक पोस्ट में उन्होंने NATO को “कागजी शेर” बताया और कहा कि अमेरिका के बिना उसकी “कोई हैसियत नहीं”। “NATO ने ईरान के खिलाफ लड़ने में हिस्सा नहीं लिया, न ही होर्मुज को फिर से खोलने में मदद की। ये सहयोगी देश कायर हैं,” ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि NATO देश होर्मुज की सुरक्षा में मदद नहीं करते, तो गठबंधन के लिए “बहुत बुरा भविष्य” हो सकता है।
ईरान का गुस्सा और सीधी चेतावनी
ब्रिटेन के इस यू-टर्न पर तेहरान में भड़काऊ प्रतिक्रिया आई। ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि ब्रिटिश जनता के 70% से अधिक इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन स्टार्मर ने उनकी भावनाओं की अनदेखी की। “यह फैसला ब्रिटिश नागरिकों, हितों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को सीधे खतरे में डालता है। ईरान अपने आत्मरक्षा के अधिकार का पूरा उपयोग करेगा और जो कर रहा था वही कर दिखाएगा,” अराघची ने चेतावनी दी।
इस चेतावनी को Already Realization माना जा रहा है, क्योंकि 20 मार्च को ही ईरान ने डिएगो गार्सिया पर भारी मिसाइल हमला किया था, जो मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर अबतक का सबसे बड़ा हमला है।
वैश्विक प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। ब्रिटेन की एंट्री और ईरान की कड़ी चेतावनी के बीच इस मार्ग को लेकर वैश्विक तेल बाजार में घबराहट बढ़ी है। अब यह देखना शामना है कि क्या ब्रिटेन की इस “सुधारित रक्षात्मक” नीति से संघर्ष सीमित रहेगा या ईरान का बदला पूरे मध्य पूर्व को ज्वाला में डाल देगा।









