
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों के कारण पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल के दाम घटने के आसार हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि 31 जनवरी तक के लिए सरकार तेल की कीमतों में कटौती कर सकती है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो गुरुवार से पेट्रोल की कीमत में ₹4.50 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.75 प्रति लीटर तक की कमी आ सकती है। कीमतों में यह 1% से अधिक की गिरावट वहां की महंगाई से जूझ रही जनता के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।
पाकिस्तान में ईंधन के दामों में कटौती का अनुमान
न्यूज चैनल ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों के दाम घटने की उम्मीद है। मौजूदा टैक्स दरों को देखते हुए पेट्रोल में ₹4.50 और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में ₹2.75 प्रति लीटर की कमी आ सकती है। इसके साथ ही, आम घरों में इस्तेमाल होने वाले केरोसिन (मिट्टी का तेल) के दाम ₹1.80 और लाइट डीजल ऑयल (LDO) की कीमत ₹2 प्रति लीटर तक गिर सकती है। हालांकि अंतिम कीमतों का फैसला गणना के बाद ही होगा, लेकिन इस संभावित कटौती से जनता को महंगाई के मोर्चे पर थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का गणित
पाकिस्तान में वर्तमान में पेट्रोल की सरकारी (एक्स-डिपो) कीमत ₹253.17 प्रति लीटर है, लेकिन आम जनता को रिटेल पंपों पर इसके लिए ₹254.40 से भी ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। चूंकि पेट्रोल का इस्तेमाल मुख्य रूप से बाइक, रिक्शा और छोटी गाड़ियों में होता है, इसलिए इसकी बढ़ी हुई कीमतों की सीधी मार मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग की जेब पर पड़ती है।
दूसरी ओर, भारी वाहनों और ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत फिलहाल ₹257.08 प्रति लीटर है। उम्मीद जताई जा रही है कि 15 जनवरी से इसमें कुछ कटौती होगी और यह ₹254 के आसपास आ सकता है, जिससे माल ढुलाई सस्ती होने और महंगाई कम होने की संभावना है।
डीजल की कीमतों का सीधा कनेक्शन
परिवहन और कृषि क्षेत्र पूरी तरह से डीजल पर निर्भर हैं, इसलिए डीजल की कीमतों में होने वाली बढ़ोत्तरी को सीधे तौर पर ‘महंगाई बढ़ाने वाला’ माना जाता है। ट्रक, बस और ट्रेन जैसे बड़े वाहनों के साथ-साथ खेती-किसानी के उपकरणों जैसे ट्रैक्टर, ट्यूबवेल और थ्रेशर में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
जब भी डीजल महंगा होता है, माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर सब्जियों, अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ता है। यही कारण है कि डीजल के दामों में मामूली बदलाव भी आम आदमी के रसोई के बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकता है।









