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NASA Moon Mission लगा तगड़ा झटका! NASA ने फिर टाली Artemis II की लॉन्चिंग, अंतरिक्ष में आई इस नई खराबी ने बढ़ाई चिंता

चाँद की ओर बढ़ते कदम फिर ठिठके! नासा के सबसे महत्वपूर्ण मून मिशन, आर्टेमिस II, को एक नई तकनीकी खराबी ने ब्रेक लगा दिया है। हीलियम सिस्टम में आई इस गड़बड़ी ने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है। आखिर क्या है यह रहस्यमयी फाल्ट जिसने मिशन को खतरे में डाला?

By Pinki Negi

NASA Moon Mission लगा तगड़ा झटका! NASA ने फिर टाली Artemis II की लॉन्चिंग, अंतरिक्ष में आई इस नई खराबी ने बढ़ाई चिंता
NASA Moon Mission

नासा (NASA) के महत्वपूर्ण ‘आर्टेमिस II’ मून मिशन को एक बार फिर तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने जानकारी दी है कि रॉकेट के ऊपरी हिस्से (ICPS) में हीलियम के प्रवाह (Helium Flow) में रुकावट देखी गई है। इस समस्या की जांच और मरम्मत के लिए विशाल ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) रॉकेट को वापस लॉन्च पैड से ‘व्हीकल असेंबली बिल्डिंग’ (VAB) ले जाया जा रहा है। इस तकनीकी खराबी के कारण अब मार्च में होने वाली ऐतिहासिक लॉन्चिंग टल गई है। नासा की टीमें अब अप्रैल की लॉन्च विंडो को सुरक्षित करने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं।

हीलियम की खराबी से नासा की लॉन्चिंग टली

नासा के आर्टेमिस II मिशन की मार्च में होने वाली लॉन्चिंग अब लगभग रद्द मानी जा रही है। नासा प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया कि रातों-रात मिले डेटा से रॉकेट के ऊपरी हिस्से में हीलियम के प्रवाह में बाधा का पता चला है। इस समस्या को सुलझाने के लिए रॉकेट को वापस ‘व्हीकल असेंबली बिल्डिंग’ (VAB) ले जाने की तैयारी की जा रही है। इसाकमैन ने स्पष्ट किया कि इस तकनीकी खराबी के कारण मार्च की ‘लॉन्च विंडो’ का इस्तेमाल करना अब मुमकिन नहीं होगा। नासा की टीमें वर्तमान में फॉल्ट की जांच कर रही हैं और जल्द ही नई तारीखों की घोषणा की जा सकती है।

लॉन्च से ठीक पहले रुका नासा का मून मिशन

मंगलवार शाम को एक सामान्य प्रक्रिया के दौरान आर्टेमिस II रॉकेट में तकनीकी समस्या सामने आई। इंजीनियरों ने पाया कि रॉकेट को दोबारा प्रेशराइज करने के दौरान हीलियम का प्रवाह (Helium Flow) नहीं हो पा रहा है। एहतियात के तौर पर, नासा ने रॉकेट को सुरक्षित मोड में डाल दिया है और अब इंजन की सफाई के लिए बाहरी सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि शनिवार तक नासा ने 6 मार्च की लॉन्चिंग की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन इस आखिरी वक्त की खराबी ने पूरे मिशन को फिलहाल रोक दिया है। अब रॉकेट की बारीकी से जांच करने के लिए उसे वापस मुख्य बिल्डिंग में ले जाया जा रहा है।

ICPS क्या करता है?

  • ईंधन टैंक को प्रेशराइज करना: ICPS में लगी हीलियम बोतलें बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये तरल हाइड्रोजन ($LH2$) और तरल ऑक्सीजन ($LOX$) के टैंकों में दबाव (Pressure) बनाए रखती हैं ताकि इंजन को ईंधन मिलता रहे।
  • इंजन की सफाई (Purging): हीलियम का उपयोग इंजनों को साफ करने के लिए भी किया जाता है ताकि लॉन्च के दौरान कोई दुर्घटना न हो।
  • चंद्रमा की राह दिखाना: मुख्य रॉकेट के अलग होने के बाद, ICPS ही वह हिस्सा है जो अंतरिक्ष यान को सही रफ्तार और दिशा देता है।

अभी समस्या क्या है?

नासा ने पाया कि इस बार हीलियम का प्रवाह (Flow) सही से नहीं हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसा ही तकनीकी फॉल्ट Artemis I के दौरान भी देखा गया था। हालांकि पहले के दो परीक्षणों (WDR1 और WDR2) में यह सिस्टम बिल्कुल ठीक था, लेकिन ऐन मौके पर इस पुरानी समस्या का दोबारा उभरना नासा के लिए चिंता का विषय बन गया है।

नासा के इंजीनियर आखिर किस ‘दुश्मन’ को ढूंढ रहे हैं?

आर्टेमिस II की लॉन्चिंग रुकने के बाद अब इंजीनियर इस खराबी की असली वजह तलाश रहे हैं। शक की सुई तीन मुख्य तकनीकी पहलुओं पर है: पहला, ग्राउंड सिस्टम और रॉकेट के बीच लगा ‘फिल्टर’; दूसरा, ‘क्विक-डिस्कनेक्ट’ इंटरफेस (जहाँ से पाइप रॉकेट से जुड़ते हैं); और तीसरा, एक ‘चेक वॉल्व’ की खराबी।

गौर करने वाली बात यह है कि ऐसा ही वॉल्व फेलियर आर्टेमिस I मिशन में भी हुआ था, जिसे नासा ने ठीक करने का दावा किया था। नासा के अधिकारियों का कहना है कि समस्या चाहे जो भी हो, उसे ठीक करने के लिए रॉकेट को वापस वर्कशॉप (VAB) ले जाना ही होगा। इस मिशन और भविष्य के मून मिशनों की नई योजना को लेकर इस हफ्ते के अंत में एक बड़ी ब्रीफिंग होने वाली है।

अपोलो मिशन की याद दिला रही आर्टेमिस II की रुकावट

आर्टेमिस II मिशन में आई इस बाधा ने अंतरिक्ष प्रेमियों को थोड़ा निराश जरूर किया है, लेकिन नासा इसे एक सामान्य प्रक्रिया मान रहा है। नासा ने इस स्थिति की तुलना ‘अपोलो युग’ से करते हुए याद दिलाया कि नील आर्मस्ट्रांग का ‘जेमिनी 8’ मिशन भी तकनीकी खराबी के कारण समय से पहले खत्म हो गया था, लेकिन उसके ठीक तीन साल बाद उन्होंने चांद पर कदम रखकर इतिहास रच दिया था।

नासा का कहना है कि इतने जटिल मिशनों में ऐसी चुनौतियां आना आम बात है। एजेंसी का लक्ष्य सिर्फ चांद पर पहुंचना नहीं, बल्कि वहां एक स्थायी बेस बनाना है। भले ही अभी समय लग रहा हो, लेकिन नासा का दीर्घकालिक लक्ष्य अटूट है—इंसानों को चांद पर बसाना और वहां से निरंतर मिशन संचालित करना।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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