
क्रिप्टोकरेंसी के वैश्विक बाजार में पिछले 48 घंटों से ‘डिजिटल सुनामी’ आई हुई है। दुनिया की सबसे पुरानी और मूल्यवान करेंसी, बिटकॉइन (Bitcoin), ने गुरुवार को निवेशकों को ऐसा जख्म दिया है जिसे भरने में महीनों लग सकते हैं। एक ही दिन में 12.6% की भारी गिरावट के साथ बिटकॉइन $63,300 के स्तर पर आ गया है। यह अक्टूबर 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है, जिसने बाजार की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है।
बाजार में मची भगदड़
अक्टूबर 2025 में जब क्रिप्टो मार्केट अपने शिखर पर था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि महज कुछ महीनों में $2 ट्रिलियन (लगभग 160 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति हवा हो जाएगी। बिटकॉइन के साथ-साथ दूसरी बड़ी करेंसी ईथर भी 13% से ज्यादा टूट चुकी है। बाजार में छाई इस निराशा ने निवेशकों के बीच ‘पैनिक सेलिंग’ की स्थिति पैदा कर दी है।
तबाही के पीछे के 5 बड़े कारण
- लिक्विडेशन का ‘डोमिनो इफेक्ट’: कॉइनग्लास की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 24 घंटों में करीब $1 बिलियन की लॉन्ग पोजीशन जबरन बंद की गईं। जब कीमतें गिरीं, तो जिन निवेशकों ने उधार (Leverage) लेकर पैसा लगाया था, उन्हें बाजार से बाहर होना पड़ा, जिससे बिकवाली और बढ़ गई।
- वॉर्श का डर और फेड पॉलिसी: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व का अगला अध्यक्ष चुने जाने की संभावना ने आग में घी का काम किया है। वॉर्श को ‘हॉकिश’ (सख्त नीति वाला) माना जाता है, जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं।
- ETF से भारी निकासी: बड़े संस्थानों का मोहभंग हो रहा है। जनवरी 2026 में स्पॉट बिटकॉइन ETF से $3 बिलियन से ज्यादा का फंड निकाला गया, जो बाजार की सेहत के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।
- टेक और AI शेयरों में कमजोरी: बिटकॉइन अब ‘डिजिटल गोल्ड’ की तरह नहीं, बल्कि टेक शेयरों की तरह व्यवहार कर रहा है। AI और सॉफ्टवेयर सेक्टर में इस हफ्ते आई गिरावट का सीधा असर क्रिप्टो पर पड़ा है।
- कमोडिटी मार्केट में संकट: केवल डिजिटल एसेट्स ही नहीं, बल्कि चांदी (Silver) में आई 18% की गिरावट ने यह साबित कर दिया है कि निवेशक फिलहाल जोखिम भरे निवेश से दूर भाग रहे हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
कॉइन ब्यूरो के निक पकरिन का मानना है कि यह कोई मामूली गिरावट नहीं, बल्कि ‘कैपिटुलेशन’ है। इसका मतलब है कि बाजार अब एक लंबे ‘रीसेट’ की ओर बढ़ रहा है। वहीं जेफरीज के रणनीतिकार मोहित कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि बिटकॉइन और नीचे गया, तो माइनर्स के लिए लागत निकालना मुश्किल होगा, जो कीमतों को और भी नीचे धकेल सकता है।









