
उत्तराखंड में नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही आम जनता को महंगाई का दोहरा झटका लगने जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से पानी के बिलों में आधिकारिक रूप से वृद्धि हो जाएगी, जबकि बिजली दरों पर अंतिम फैसला 31 मार्च को होने वाला है। जल संस्थान ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 9% और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 15% की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। इससे राज्य के लाखों परिवारों और छोटे व्यापारियों की जेब पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
पानी के बिलों में निश्चित वृद्धि
हर साल की तरह इस बार भी जल संस्थान ने 2013 के बेस रेट के आधार पर ऑटोमैटिक एडजस्टमेंट लागू किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक पानी का बिल 117 रुपये से बढ़कर 121 रुपये हो जाएगा, जबकि शहरी इलाकों में 360 रुपये से 373 रुपये प्रति माह तक पहुंचेगा। यह बढ़ोतरी राज्य के सभी जिलों में एकसमान लागू होगी, जिससे गढ़वाल और कुमाऊं के ग्रामीण परिवारों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते रखरखाव खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के नाम पर यह कदम उठाया गया है, लेकिन उपभोक्ता संगठन इसे अन्यायपूर्ण बता रहे हैं।
बिजली दरों पर सस्पेंस
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) 31 मार्च को नई बिजली दरें घोषित करेगा। ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों- पीवीवीएनएल, यूजेवीएनएल और यूकेदी- ने अपने प्रस्ताव भेज दिए हैं, जिनका अध्ययन चल रहा है। पिछले साल 2025 में 5.62% की बढ़ोतरी हुई थी, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को 33 पैसे प्रति यूनिट, व्यावसायिक को 42 पैसे और लघु उद्योगों को 36 पैसे का अतिरिक्त बोझ मिला था।
इस बार चुनावी वर्ष होने से घरेलू उपभोक्ताओं को मामूली राहत मिलने की संभावना है, लेकिन फ्यूल पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) के चलते हर महीने बिल में 10-15% का अतिरिक्त चार्ज जुड़ता रहेगा।
उपभोक्ताओं पर दोहरा असर
यह डबल झटका राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। घरेलू बजट में 5-10% की बढ़ोतरी से मध्यम वर्ग परिवार परेशान होंगे, जबकि छोटे व्यापारी और होटल व्यवसायी अपने खर्चों की नई गणना करने को मजबूर हो जाएंगे। देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जैसे शहरों में जहां बिजली-पानी की खपत अधिक है, वहां महंगाई का असर और गहरा जाएगा। उपभोक्ता संगठनों ने विरोध जताया है और सरकार से सब्सिडी या टैरिफ रिलीफ की मांग की है। ऊर्जा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि गरीब परिवारों के लिए योजनाएं चलेंगी, लेकिन वास्तविक राहत का इंतजार बाकी है।
फिलहाल, उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे ऊर्जा संरक्षण अपनाएं और बिलों की निगरानी रखें। अप्रैल से शुरू हो रही यह महंगाई राज्य सरकार के लिए भी चुनौती बनेगी, खासकर आगामी बजट सत्र में।









