देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी विभागों में आउटसोर्स के माध्यम से सेवाएं दे रहे हजारों उपनल (UPNL) कर्मियों के लिए खुशियों वाली खबर है। लंबे समय से चल रहे कानूनी और प्रशासनिक गतिरोध के बाद, शासन ने उपनल कर्मियों को ‘समान पद-समान वेतन’ और महंगाई भत्ता (DA) देने की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। कार्मिक विभाग ने न केवल अनुबंध (Contract) का नया प्रारूप जारी किया है, बल्कि इसकी समय-सीमा भी दो महीने के लिए बढ़ा दी है।

22,000 कर्मियों को मिलेगा सीधा लाभ
वर्तमान में उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों में लगभग 22,000 से अधिक उपनल कर्मी तैनात हैं। सरकार के इस फैसले से उन कर्मचारियों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी जो पिछले कई वर्षों से न्यूनतम वेतन पर कठिन सेवाएं दे रहे थे।
मुख्य बिंदु:
- अनुबंध का नया प्रारूप: अब सभी विभाग शासन द्वारा तय किए गए एक समान फॉर्मेट पर ही उपनल कर्मियों के साथ अनुबंध करेंगे।
- समय-सीमा में विस्तार: पहले अनुबंध की प्रक्रिया के लिए दो माह का समय दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर अगले दो माह के लिए और विस्तार दे दिया गया है।
यह भी देखें: देहरादून में ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’: होटल, होमस्टे और वेडिंग प्वाइंट्स पर प्रशासन का बड़ा प्रहार
किसे मिलेगा पहले लाभ? (कट-ऑफ डेट)
सरकार ने इस लाभ को देने के लिए एक चरणबद्ध योजना तैयार की है ताकि राजकोष पर अचानक भारी बोझ न पड़े:
- प्रथम चरण: इसमें उन कर्मचारियों को शामिल किया गया है जिन्होंने 12 नवंबर 2018 तक अपनी सेवाएं पूरी कर ली थीं और जो 2015 से पूर्व से कार्यरत हैं (न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा)।
- द्वितीय चरण: शेष बचे हुए कर्मचारियों को वर्ष 2028 तक चरणबद्ध तरीके से इस दायरे में लाया जाएगा।
नए अनुबंध की मुख्य शर्तें: अनुशासन और सुविधाएं
शासन द्वारा जारी नए प्रारूप में कर्मचारियों के लिए अधिकारों के साथ-साथ कड़े अनुशासन के नियम भी तय किए गए हैं:
- अवकाश की सुविधा: अब उपनल कर्मियों को एक वर्ष में 12 आकस्मिक अवकाश और 15 उपार्जित अवकाश (Earned Leave) का लाभ मिल सकेगा।
- अनुशासन सर्वोपरि: यदि कोई कर्मी अनुशासनहीनता या आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसकी सेवाएं तत्काल समाप्त की जा सकेंगी।
- सेवा समाप्ति का नियम: अनुबंध के दौरान सरकार या विभाग बिना कारण बताए नोटिस देकर भी सेवा समाप्त कर सकता है, साथ ही अस्वस्थ होने की स्थिति में भी कर्तव्यों का निर्वहन न कर पाने पर सेवा समाप्त की जा सकती है।
क्या है ‘समान पद-समान वेतन’ का गणित?
अबतक उपनल कर्मियों को एक निश्चित मानदेय मिलता था, जो नियमित कर्मचारियों की तुलना में काफी कम था। अब ‘समान पद-समान वेतन’ लागू होने से उन्हें उस पद के शुरुआती वेतनमान (Basic Pay) और उस पर मिलने वाले महंगाई भत्ते के बराबर राशि मिल सकेगी। इससे कर्मियों के वेतन में 5,000 से 15,000 रुपये तक की मासिक वृद्धि होने की संभावना है।
क्या है विशेषज्ञों की राय
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस कदम से सरकार ने न केवल सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन किया है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले एक बड़े वोट बैंक को साधने की भी कोशिश की है। हालांकि, विभागों के लिए इतनी बड़ी संख्या में कर्मियों का रिकॉर्ड सत्यापित करना और नया अनुबंध करना एक चुनौती होगी, इसीलिए समय-सीमा को बढ़ाया गया है।









