
उत्तराखंड के चमोली जिले में भारी बारिश और बर्फबारी ने एक बार फिर चारधाम रूट पर हालात मुश्किल कर दिए हैं। ज्योतिर्मठ क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद पहाड़ दरकने लगे हैं, जबकि बदरीनाथ धाम बर्फ की मोटी चादर से ढक गया है, जिससे यहां का नज़ारा अद्भुत तो है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बन चुके हैं।
तीन दिन तक लगातार बारिश और बर्फबारी के बाद मौसम साफ हुआ तो बदरीनाथ धाम के कपाट क्षेत्र से लेकर आसपास की चोटियां तक सफेद बर्फ से ढकी दिखीं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार धाम क्षेत्र में तापमान माइनस के करीब पहुंच गया है और ग्लेशियर तेज़ी से खिसक रहे हैं, जिससे हिमस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है।
पिनोला और कंचन नाले के पास बदरीनाथ हाईवे ठप
इधर बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह ठप है। गोविंदघाट के पास पिनोला नामक स्थान पर पहाड़ से बड़े‑बड़े पत्थर और मलबा सड़क पर आ गिरा, जिससे हाईवे दोनों ओर से बंद हो गया है और वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं। कंचन नाले के पास भी हिमखंड टूटकर गिरने से बदरीनाथ हाईवे बाधित हो गया, जिस कारण धाम और निचले इलाकों के बीच आवाजाही लगभग थम सी गई है।
नीति–मलारी राजमार्ग और सीमांत क्षेत्र पर असर
सीमांत क्षेत्र को जोड़ने वाला नीति‑मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग भी सालधर/स्योन के पास भूस्खलन के कारण बाधित हो गया है। प्रशासन ने सीमा सड़क संगठन (BRO) को दोनों हाईवे को युद्धस्तर पर खोलने के निर्देश दिए हैं, लेकिन लगातार भूस्खलन और ढलानों से गिर रहे पत्थरों के कारण मशीनरी को भी जोखिम के बीच काम करना पड़ रहा है।
गंगोत्री-यमुनोत्री मार्ग भी बाधित
चारधाम में दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की ओर जाने वाले मार्ग भी प्रभावित हैं। बर्फबारी के कारण बंद गंगोत्री हाईवे को खोलने के लिए बीआरओ की टीमें तैनात हैं, वहीं यमुनोत्री हाईवे जंगलचट्टी के पास बाधित है और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से यहां भी सड़क से बर्फ और मलबा हटाने का कार्य किया जा रहा है। दो दिन बाद धूप तो निकल आई, लेकिन मार्ग बंद रहने से स्थानीय लोगों और यात्रियों की आवाजाही बेहद मुश्किल बनी हुई है।
मास्टर प्लान के काम पर मौसम की मार
बदरीनाथ धाम में चल रहे मास्टर प्लान के काम पर भी मौसम की मार पड़ी है। धाम में करीब 100 से अधिक श्रमिक और परियोजना इकाई (PIU) के अभियंता तैनात हैं, लेकिन दो दिन से लगातार बर्फबारी और मौसम विभाग के अलर्ट के बाद प्रशासन ने एहतियातन यहां काम रुकवा दिया है। श्रमिकों के टेंट और टिन शेड पर बर्फ की मोटी परत जम चुकी थी, जिस पर ग्लेशियर खिसकने और हिमस्खलन का जोखिम बढ़ता जा रहा था।
श्रमिकों की वापसी और सुरक्षा व्यवस्था
परियोजना से जुड़े अधिशासी अभियंता योगेश मनराल के अनुसार श्रमिकों को सुरक्षित स्थान पर भेजने का फैसला लिया गया। योजना थी कि उन्हें बदरीनाथ से पांडुकेश्वर की ओर भेजा जाए, लेकिन कंचन नाले के पास हाईवे पर हिमखंड गिरने से मार्ग बीच में ही बाधित हो गया। इस खतरनाक हिस्से को पैदल पार कराना भी जोखिम भरा माना गया, इसलिए सभी श्रमिकों को वापस बदरीनाथ की ओर ही लौटा दिया गया और उन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया।
प्रशासन की निगरानी और राहत प्रयास
एसडीएम ज्योतिर्मठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि नीति‑मलारी और बदरीनाथ दोनों हाईवे बंद होने से श्रमिकों और स्थानीय लोगों की मूवमेंट प्रभावित हुई है, हालांकि प्रशासन स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है। बीआरओ और संबंधित एजेंसियों को मौसम में थोड़ी भी राहत मिलते ही मलबा हटाकर मार्ग जल्द खोलने के निर्देश दिए गए हैं।
भूधंसाव–भूस्खलन से बढ़ती चिंता
ज्योतिर्मठ और चमोली क्षेत्र पहले से ही भू‑धंसाव और भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में यहां भूधंसाव की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे शहरों और गांवों की ज़मीन अस्थिर हुई है और अब भारी बारिश के बाद सक्रिय भूस्खलन ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार चरम मौसमीय घटनाएं, ढलानों पर बढ़ता दबाव और अनियोजित निर्माण भविष्य में भी ऐसी आपदाओं का खतरा बढ़ा सकते हैं, इसलिए स्थायी समाधान के साथ ही समय रहते सुरक्षित और वैज्ञानिक विकास की दिशा में ठोस कदम उठाना ज़रूरी हो गया है।









