
उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा की शुरुआत अब द्वार पर है। 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को भगवान बद्रीविशाल के पवित्र धाम के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। पिछले साल 2025 में बद्रीनाथ धाम में ही 16 लाख 60 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन किए थे, और इस बार रिकॉर्ड 20 लाख से ज्यादा यात्रियों के आने की उम्मीद है।
शासन-प्रशासन यात्रा को सुगम बनाने के लिए जी-जान लगा रहा है, लेकिन वैश्विक गैस संकट ने होटल-ढाबा कारोबारियों की चिंता दोगुनी कर दी है।
चारधाम यात्रा: आस्था का महायात्रा
चारधाम यात्रा भक्तों की आस्था का प्रतीक है, जहां ऊंचाई वाली चढ़ाइयों पर भगवान विष्णु-शिव के दर्शन की तीर्थयात्रा लाखों को खींच लाती है। इस बार यात्रा 11 दिन पहले शुरू हो रही है, जिससे भक्तों को ज्यादा समय मिलेगा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 6 लाख से अधिक हो चुका है, और ऑफलाइन काउंटर भी 17 अप्रैल से सक्रिय होंगे। नगर पंचायत बद्रीनाथ ने 50 सदस्यीय दल भेजा है, जो पैदल मार्ग, पथ प्रकाश, शौचालय, फास्ट ट्रैक और सफाई कार्यों में जुटा है।
सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर जोर
जिलाधिकारी गौरव कुमार के नेतृत्व में NHIDCL, BRO और लोक निर्माण विभाग सड़कों को चाक-चौबंद कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने विशेष तैयारियां की हैं। यात्रा मार्ग पर 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट स्थापित हो रहे हैं, जहां 1350 डॉक्टर तैनात होंगे। 3000 मीटर की चढ़ाई में स्वास्थ्य बिगड़ने पर तुरंत इलाज का प्लान है, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सक और ट्रांजिट कैंप शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा, यातायात और मूलभूत सुविधाओं पर फोकस किया है।
गैस संकट: कारोबारियों का सिरदर्द
लेकिन इस उत्साह के बीच गैस सिलेंडर की किल्लत ने सिरदर्द पैदा कर दिया। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध से वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने पर व्यावसायिक LPG की कमी हो गई। ऋषिकेश-बद्रीनाथ रूट पर होटल संचालक सुनील शाह बताते हैं, “सामान्य 200 सिलेंडर प्रतिदिन मिलने चाहिए, लेकिन छठे दिन आ रहे हैं। यात्रियों के लिए भोजन कैसे बनाएं?” ढाबा मालिक रघु कहते हैं, “वैकल्पिक लकड़ी या कोयला ले रहे हैं, लेकिन दाम 2000 रुपये क्विंटल पहुंच गए। प्रतिष्ठान बंद करने पड़ सकते हैं।”
प्रशासन के समाधान प्रयास
20 लाख सिलेंडरों की जरूरत है, जबकि 2.68 लाख का बैकलॉग है। पेट्रोल-डीजल पर भी असर पड़ सकता है, जिससे ट्रांसपोर्ट प्रभावित होगा। प्रशासन अलर्ट मोड में है। जिलाधिकारी ने शासन स्तर पर समन्वय शुरू किया है, और खाद्य-पेट्रोलियम विभाग अतिरिक्त सप्लाई सुनिश्चित कर रहा। घरेलू गैस का स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन व्यावसायिक पर फोकस है ताकि यात्रियों को भोजन जैसी सुविधा न गायब हो।
यात्रा का भविष्य: चुनौतियां और उम्मीदें
चारधाम यात्रा आस्था और चुनौतियों का संगम है। प्रशासन की कोशिशें रंग लाएं, तो लाखों भक्त सुरक्षित दर्शन कर सकेंगे। अन्यथा, गैस संकट यात्रा के उत्साह पर ग्रहण लगा सकता है। भक्त सतर्क रहें, रजिस्ट्रेशन कराएं और अपडेट लेते रहें।









