
उत्तर प्रदेश भारत में रेलवे के सबसे बड़े नेटवर्क वाले राज्यों में से एक है, जहाँ 500 से भी अधिक छोटे-बड़े स्टेशन मौजूद हैं। ताज्जुब की बात यह है कि जहाँ प्रयागराज जैसे जिले में 47 स्टेशनों का जाल बिछा है, वहीं राज्य का एक जिला ऐसा भी है जहाँ आज तक अपना कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। अधिकांश लोग इस रोचक तथ्य से अनजान हैं। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि यूपी के इस विशाल रेल नेटवर्क के बीच वह कौन सा इलाका है जो रेल की पटरी से अब तक महरूम है, तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
यूपी का वह अनोखा जिला जहाँ आज तक नहीं पहुँची रेल
उत्तर प्रदेश अपनी विशाल आबादी और सबसे बड़े रेल नेटवर्क के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके बावजूद राज्य का एक जिला ऐसा है जहाँ एक भी रेलवे स्टेशन नहीं है। सुनने में यह थोड़ा हैरान करने वाला लग सकता है, क्योंकि यूपी में स्टेशनों और हॉल्ट की संख्या सैकड़ों में है। खुद को जनरल नॉलेज (GK) का एक्सपर्ट मानने वाले लोग भी अक्सर इस जिले का नाम बताने में चूक जाते हैं। अधिकांश लोगों को इस दिलचस्प जानकारी के बारे में पता ही नहीं है। आइए जानते हैं आखिर वह कौन सा जिला है जो आज के दौर में भी रेल की पटरियों से नहीं जुड़ सका है।
यूपी का वह जिला जहाँ स्टेशन से पहले बना एयरपोर्ट
उत्तर प्रदेश का श्रावस्ती जिला एक अनोखे कारण से चर्चा में रहता है, क्योंकि यहाँ अब तक कोई रेलवे नेटवर्क नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि इस जिले में रेल पहुँचने से पहले ही हवाई अड्डा (Airport) बनकर तैयार हो गया है। हालांकि, अब श्रावस्ती के लोगों का ट्रेन का इंतज़ार जल्द ही खत्म होने वाला है। खलीलाबाद-बहराइच के बीच बिछने वाली नई रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हो गया है। पूर्वोत्तर रेलवे के इस प्रस्ताव के पूरा होते ही श्रावस्ती भी सीधे तौर पर देश के रेल मानचित्र से जुड़ जाएगा।
बुद्ध की तपोभूमि जहाँ स्टेशन नहीं, पर है ऐतिहासिक पहचान
राप्ती नदी के तट पर बसा श्रावस्ती उत्तर प्रदेश का एक ऐसा जिला है, जो धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से बेहद खास है। देवीपाटन मंडल का हिस्सा और भगवान बुद्ध की प्रिय नगरी होने के बावजूद, यहाँ आज तक कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। हालांकि, रेल से पहले यहाँ एयरपोर्ट की सुविधा शुरू हो चुकी है। तीन तहसीलों (भिनगा, इकौना और जमुनहा) वाले इस जिले में अब खलीलाबाद-बहराइच रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही यह पावन भूमि, जहाँ बुद्ध ने अपने जीवन के कई वर्ष बिताए थे, रेल नेटवर्क से भी सीधे जुड़ जाएगी।









