
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली कंपनियों के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) प्रस्ताव स्वीकार कर लिए हैं, जिससे बिजली दामों में औसतन 20% तक की बढ़ोतरी के आसार बन गए हैं। कंपनियों ने 1,18,741 करोड़ रुपये का ARR दाखिल किया है, जिसमें बिजली खरीद पर 85,305 करोड़ और स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए 3,837 करोड़ का खर्च शामिल है। 17,100 करोड़ की प्रस्तावित सरकारी सब्सिडी के बावजूद 12,453 करोड़ का घाटा दिखाया गया है, जो अप्रैल से उपभोक्ताओं पर लादा जा सकता है।
ARR स्वीकृति और टैरिफ प्रक्रिया
आयोग ने कंपनियों को श्रेणीवार टैरिफ प्रस्ताव तीन दिनों में दाखिल करने और समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता 21 दिनों में आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे, जबकि मार्च में प्रदेशव्यापी सुनवाई होगी। नियमानुसार, 120 दिनों में नई दरें तय होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों ने टैरिफ प्रस्ताव न देकर आयोग पर फैसला छोड़ दिया है, क्योंकि पंचायत चुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखा गया है। वितरण हानि 13.07% अनुमानित है, जो पिछले वर्षों जितनी ही है। नोएडा पावर जैसी निजी कंपनियों का ARR भी मंजूर हो चुका।
वर्तमान दरें और संभावित असर
पिछले छह वर्षों से घरेलू (LMV-1) दरें स्थिर हैं: 0-100 यूनिट पर ₹3.35 (सब्सिडी के बाद), 101-150 पर ₹6.65 तक। 20% बढ़ोतरी से 100 यूनिट मासिक उपभोग वाला परिवार ₹335 के बजाय ₹400+ का बिल चुकाएगा। ग्रामीण, कृषि और छोटे उद्योग सबसे प्रभावित होंगे। जनवरी 2026 में 2.33% छूट मिली थी, लेकिन अब घाटा भरने का दबाव है। स्मार्ट मीटर खर्च विवादास्पद है, जिसे ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने उपभोक्ताओं पर न डालने की बात कही थी।
उपभोक्ता संगठनों का विरोध
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने ARR को “मनगढ़ंत” बताते हुए विरोध जताया। उन्होंने कहा कि आयोग ने पहले ही 51,000 करोड़ का सरप्लस कंपनियों पर लगाया है, इसलिए दरें घटनी चाहिएं- हर साल 8% कमी। वर्मा ने चेताया कि स्मार्ट मीटर का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना गलत है। परिषद ने सुनवाई में सक्रिय भागीदारी का ऐलान किया है। पिछले वर्ष भी इसी अभियान से बढ़ोतरी टाली गई थी।
राजनीतिक और आर्थिक संदर्भ
योगी सरकार ने निर्बाध बिजली आपूर्ति पर जोर दिया है, लेकिन कंपनियों का घाटा 19,600 करोड़ तक पहुंच चुका। केंद्र सरकार की सब्सिडी निर्भरता बढ़ी है। यदि बढ़ोतरी हुई, तो महंगाई पर असर पड़ेगा- खासकर गर्मियों में एसी, कूलर के उपयोग से। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सौर ऊर्जा प्रोत्साहन और हानि कम करने से बोझ रोका जा सकता है। सरकार चुनावी साल में सब्सिडी बढ़ा सकती है। उपभोक्ताओं को सलाह: बिलिंग चेक करें, आपत्ति दर्ज कराएं। ARR प्रक्रिया निष्पक्ष हो तो बिजली सस्ती रह सकती है।









