
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार बहुत जल्द इनकी सैलरी में वृद्धि करेगी, जिससे लाखों ग्रामीण महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। यह कदम राज्य की महिलाओं और ग्रामीण विकास पर केंद्रित नीतियों का हिस्सा है, जो पहले से ही कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान कर चुकी है।
मानदेय वृद्धि की प्रमुख घोषणा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में सदन को बताया, “हम आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स का मानदेय बढ़ाएंगे। सरकार शिक्षामित्र और अनुदेशकों के लिए भी ठोस कदम उठा रही है।” इस घोषणा से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, वृद्धि की सटीक राशि और कार्यान्वयन तिथि जल्द ही कैबिनेट में मंजूरी के बाद अधिसूचित होगी। वर्तमान में केंद्र सरकार के मानदेय के तहत मुख्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 4500 रुपये, मिनी केंद्रों पर 3500 रुपये और सहायिकाओं को 2250 रुपये मासिक मिलते हैं, जिसमें राज्य स्तर पर अतिरिक्त प्रोत्साहन जोड़ा जाता है। इससे पहले सितंबर 2025 में सीएम ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन और मानदेय वृद्धि की सौगात दी थी।
विपक्ष पर तीखा प्रहार, सपा को चेतावनी
भाषण के दौरान सीएम योगी ने विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा के तथाकथित विकास मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि जेपीएनआईसी, गोमती रिवर फ्रंट और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के प्रतीक बने रहे। “सपा ने जेपी और लोहिया के सपनों पर कुठाराघात किया,” उन्होंने आरोप लगाया।
एसआईआर मुद्दे पर बोलते हुए योगी ने सपा को संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने और समाज में विद्वेष फैलाने का दोषी ठहराया। उन्होंने चेतावनी दी, “कांग्रेस की तरह विधान परिषद से गायब हो गई, अगर सपा ने रवैया न सुधारा तो वही हाल उसका होगा।”
आर्थिक उन्नति के आंकड़े, जीडीपी दोगुनी
मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार के आठ वर्षों की उपलब्धियों का ब्योरा पेश किया। 2017 में 13 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी आज 23 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। सीडी रेश्यो 45% से बढ़कर 62% हो गया और यूपी रेवेन्यू सरप्लस राज्य बन गया। प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत विजन का हवाला देते हुए उन्होंने तीर्थ स्थलों के विकास, दीपोत्सव, देव दीपावली और रंगोत्सव जैसे आयोजनों से प्रदेश की नई पहचान गढ़ने का श्रेय लिया।
कृषि क्रांति: किसान उद्यमी बने
किसानों को संबोधित करते हुए योगी ने कहा कि अन्नदाता अब प्रदेश की शान है। 2017 से पहले कृषि नीति की कमी थी, लेकिन अब लागत घटी और उत्पादन बढ़ा। कृषि विकास दर 8% से 18% हो गई। देश के 11% कृषि भूभाग से यूपी 21% खाद्यान्न पैदा करता है। पीएम किसान निधि से 15,000 करोड़ डीबीटी के जरिए ट्रांसफर हुए। ड्रोन दीदी योजना से महिलाएं सशक्त हो रही हैं। FPO, एग्री स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा मिला है। वर्ल्ड बैंक के AGREES प्रोजेक्ट से उत्पादकता बढ़ेगी।
गो संरक्षण पर फोकस करते हुए सीएम ने बताया कि 7727 गो आश्रय स्थल बने, जहां 16 लाख गोवंश सुरक्षित हैं। यूपी दुग्ध उत्पादन में नंबर वन है। गन्ना किसानों को 8 वर्षों में 3,06,000 करोड़ का भुगतान किया गया, जो पिछली सरकारों से 60,000 करोड़ ज्यादा है। 122 चीनी मिलें सक्रिय हैं।
अन्य कल्याणकारी कदम
इससे पहले निराश्रित और वृद्धा पेंशन 1000 से बढ़ाकर 1500 रुपये की गई। सभी शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज मिलेगा। परिवहन मेला 20-21 फरवरी को सभी जिलों में लगेगा, जहां वन टाइम टैक्स की जानकारी फ्री मिलेगी।
यह घोषणा योगी सरकार की सामाजिक न्याय और विकासोन्मुखी नीतियों को मजबूत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं सशक्त होंगी। कुल मिलाकर, बजट सत्र ने विकास और सुशासन की नई इबारत लिखी।









