
उत्तर प्रदेश में यातायात को बेहतर बनाने के लिए पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे को अब कुशीनगर तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। लगभग 750 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे के लिए विशेषज्ञों की टीम ने सर्वे शुरू कर दिया है, जिसके बाद नक्शा तैयार कर मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। गोरखपुर के पीपीगंज इलाके में पत्थरों के जरिए निशान लगाने और जियो टैगिंग का काम तेजी से चल रहा है। यह एक्सप्रेस-वे संत कबीर नगर में 22.5 किलोमीटर, गोरखपुर में 34 किलोमीटर और कुशीनगर में 3 किलोमीटर का रास्ता तय करेगा। बजट और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होते ही इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
अब हरियाणा से बंगाल तक का सफर होगा आसान
पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अब इस एक्सप्रेस-वे को कुशीनगर में सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जाएगा, जिससे हरियाणा से पश्चिम बंगाल तक का सफर बेहद आसान हो जाएगा। खास बात यह है कि यह एक ‘ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे’ होगा, जिसे बनाते समय पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। सर्वे के दौरान विशेषज्ञों की टीम ऐसा रास्ता (एलाइनमेंट) तैयार कर रही है जिससे कम से कम पेड़ काटने पड़ें। पहले यह शामली तक ही बनना था, लेकिन अब इसके विस्तार से कई राज्यों के बीच कनेक्टिविटी और व्यापार को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
इन 21 जिलों से होकर गुजरेगा नया एक्सप्रेस-वे, किसानों में मुआवजे को लेकर चर्चा
पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के 20 से अधिक जिलों को आपस में जोड़ेगा। यह विशाल मार्ग कुशीनगर से शुरू होकर गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, लखनऊ, बरेली और मेरठ होते हुए हरियाणा के पानीपत तक जाएगा। जहाँ एक ओर इस प्रोजेक्ट से विकास की उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनकी जमीन के बदले उन्हें क्या दाम मिलेंगे। प्रशासन जल्द ही जमीन अधिग्रहण की दरों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
जमीन मुआवजे को लेकर किसानों की मांग और प्रशासन का जवाब
एक्सप्रेस-वे के लिए होने वाले जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों ने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। किसानों का कहना है कि 2016 के बाद से सर्किल रेट नहीं बढ़ा है, जबकि जमीन की असल कीमतें काफी ज्यादा हो चुकी हैं। उनकी मांग है कि छोटी जोत वाले किसानों को आवासीय दर पर मुआवजा मिले। इस बीच, एसडीएम सिद्धार्थ पाठक ने साफ किया है कि अभी सिर्फ एलाइनमेंट (रास्ता तय) हुआ है और आधिकारिक गजट आना बाकी है। नियमों के मुताबिक, शहरी क्षेत्र में सर्किल रेट का दोगुना और ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना तक मुआवजा देने का प्रावधान है, जिसकी सही स्थिति गजट जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।









