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UP Expressway: यूपी के इस एक्सप्रेसवे पर मिलेगा हिल स्टेशन जैसा मजा! सड़क किनारे लगेंगे 46,000 पेड़, देखें ₹7 करोड़ का मास्टरप्लान

उत्तर प्रदेश के इस नए एक्सप्रेसवे पर अब सफर नहीं, सफर का अहसास होगा! 46,000 पेड़ों की छांव और ₹7 करोड़ के बजट से तैयार हो रहा है यह 'ग्रीन कॉरिडोर'। क्या यूपी का यह रास्ता वाकई विदेशी सड़कों को मात देगा? जानें पूरा मास्टरप्लान।

By Pinki Negi

UP Expressway: यूपी के इस एक्सप्रेसवे पर मिलेगा हिल स्टेशन जैसा मजा! सड़क किनारे लगेंगे 46,000 पेड़, देखें ₹7 करोड़ का मास्टरप्लान
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उत्तर प्रदेश का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे राज्य का पहला ‘हरित एक्सप्रेसवे’ (Green Expressway) बनने जा रहा है, जो विकास और पर्यावरण का अनूठा संगम होगा। इस 63 किलोमीटर लंबे मार्ग में से 45 किलोमीटर के हिस्से को विशेष रूप से हरा-भरा बनाया जाएगा, जहाँ सड़क के दोनों ओर 46 हजार पेड़ लगाए जाएंगे।

इतना ही नहीं, इस एक्सप्रेसवे पर सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे, जिससे सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। घने पेड़ों और आधुनिक हरियाली की वजह से यहाँ से गुजरने वाले यात्रियों को किसी ‘हिल स्टेशन’ जैसी ठंडी और सुखद अनुभूति होगी। यह प्रोजेक्ट न केवल दो बड़े शहरों के बीच की दूरी कम करेगा, बल्कि प्रदूषण घटाने में भी मददगार साबित होगा।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बिछेगी 46 हजार पेड़ों की चादर

उत्तर प्रदेश को जल्द ही अपना पहला ग्रीनफील्ड हरित एक्सप्रेस-वे मिलने जा रहा है, जो लखनऊ और कानपुर के बीच के सफर को पूरी तरह बदल देगा। इस आधुनिक एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण-अनुकूल होना है। योजना के अनुसार, इस रूट के 45 किलोमीटर के हिस्से में सड़क के दोनों किनारों पर 46 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे। यह ‘ग्रीन कॉरिडोर’ न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा, बल्कि यात्रियों को एक बेहद खूबसूरत और प्रदूषण मुक्त यात्रा का अनुभव भी देगा। यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संरक्षण के मेल का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करने वाला है।

हर किलोमीटर पर लगेंगे 1000 से ज्यादा पेड़

इस एक्सप्रेसवे को हरा-भरा बनाने के लिए एनएचएआई और वन विभाग ने हाथ मिलाया है। अधिकारियों के मुताबिक, हरियाली को एक समान बनाए रखने के लिए हर एक किलोमीटर के दायरे में औसतन 1022 पेड़ लगाए जाएंगे। इस सटीक योजना का उद्देश्य यात्रियों को पूरी सड़क पर लगातार घने पेड़ों की कतारें दिखाना है, जिससे सफर के दौरान तापमान भी कम रहेगा और आंखों को सुकून भी मिलेगा। दोनों विभागों के बीच हुए समझौते के बाद अब इस ग्रीन प्रोजेक्ट पर काम तेजी से शुरू होने वाला है, जो यूपी के हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को एक नई पहचान देगा।

वन विभाग करेगा 46 हजार पेड़ों की ‘फुल-टाइम’ सुरक्षा

इस ग्रीन कॉरिडोर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए एनएचएआई ने पौधों की देखभाल और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 7 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। अक्सर देखा जाता है कि पेड़ लगाने के बाद वे सूख जाते हैं, लेकिन इस समझौते के तहत वन विभाग सुनिश्चित करेगा कि हर पौधा एक विशाल पेड़ बने। यह निवेश न केवल सड़क की खूबसूरती को ‘हिल स्टेशन’ जैसा बनाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।

वन विभाग सुनिश्चित करेगा एक्सप्रेसवे पर स्थायी हरियाली

पौधे लगाना तो आसान है, लेकिन उन्हें बचाना बड़ी चुनौती होती है। इसी को देखते हुए वन विभाग अगले 5 सालों तक इन 46 हजार पेड़ों की पूरी जिम्मेदारी उठाएगा। इस अवधि के दौरान पेड़ों की नियमित सिंचाई, खाद-पानी और जानवरों से सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाएगा। इस लंबी अवधि की योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लगाए गए पौधे छोटे रहने के बजाय पूरी तरह विकसित होकर एक ‘स्थायी हरित आवरण’ (Permanent Green Cover) बन सकें। 5 साल बाद जब ये पेड़ बड़े हो जाएंगे, तब यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह से एक प्राकृतिक ऑक्सीजन चेंबर की तरह नजर आएगा।

एक्सप्रेसवे पर लगेंगे ये खास देशी पेड़

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को केवल हरा-भरा ही नहीं, बल्कि एक ‘ऑक्सीजन हब’ बनाने की तैयारी है। इसके लिए विशेषज्ञों ने बांस, बरगद, पीपल और पाकड़ जैसे विशाल और छायादार देशी वृक्षों का चयन किया है। ये पेड़ न केवल सड़क के तापमान को कम रखेंगे और यात्रियों को ठंडक देंगे, बल्कि भारी मात्रा में ऑक्सीजन छोड़कर वातावरण को भी शुद्ध करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, बरगद और पीपल जैसे वृक्षों की उम्र लंबी होती है, जिससे आने वाले दशकों तक इस इलाके की जैव विविधता (Biodiversity) बढ़ेगी और स्थानीय पक्षियों व जीवों को भी नया बसेरा मिलेगा।

हवा में भी लहराएगी हरियाली

एक्सप्रेसवे का जो हिस्सा एलिवेटेड (ऊंचाई पर) बना है, वहां भी हरियाली में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। इस खंड के लिए विभाग ने अलग योजना बनाई है, जिसके तहत प्रति किलोमीटर 222 पेड़ लगाए जाएंगे। ऊंचाई वाले मार्ग पर पेड़ों की सिंचाई एक बड़ी चुनौती होती है, जिसका समाधान निकालने के लिए बानी से आजाद चौक तक के रूट पर 6 शक्तिशाली सबमर्सिबल पंप लगाए जा रहे हैं। ये पंप सुनिश्चित करेंगे कि हर पौधे को नियमित रूप से पानी मिले, ताकि भीषण गर्मी में भी यह ग्रीन कॉरिडोर पूरी तरह तरोताजा बना रहे।

भीषण गर्मी में भी हरा-भरा रहेगा एक्सप्रेसवे

एक्सप्रेसवे पर सबमर्सिबल पंपों और नियमित सिंचाई का नेटवर्क खासतौर पर गर्मी के मौसम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि चिलचिलाती धूप में भी एक भी पौधा न सूखे। यह प्रोजेक्ट सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि वायु गुणवत्ता (Air Quality) सुधारने और पर्यावरणीय संतुलन बनाने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह मार्ग भविष्य में भारत के ‘हरित विकास’ (Green Development) का एक शानदार उदाहरण बनेगा। जहाँ एक ओर रफ्तार होगी, वहीं दूसरी ओर शुद्ध हवा और जैव विविधता का संरक्षण होगा, जो इस आधुनिक सड़क नेटवर्क को पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बना देगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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