
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र कानपुर को इस साल के रेलवे बजट से काफी निराशा हाथ लगी है। देश के सबसे व्यस्त स्टेशनों में शुमार और दिल्ली-हावड़ा रूट का मुख्य केंद्र होने के बावजूद, कानपुर को 12 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम ‘हाई स्पीड रेलवे कॉरिडोर’ प्रोजेक्ट में कोई जगह नहीं मिली है। रोजाना सैकड़ों ट्रेनों की आवाजाही संभालने वाले कानपुर सेंट्रल को उम्मीद थी कि इस मेगा बजट से शहर को आधुनिक कनेक्टिविटी की बड़ी सौगात मिलेगी, लेकिन सीधे तौर पर कोई नई घोषणा न होने से स्थानीय यात्रियों और व्यापारियों में मायूसी है।
देश को मिले 7 नए हाई स्पीड कॉरिडोर
बजट 2026 में भारतीय रेलवे के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए देश को 7 नए हाई स्पीड रेलवे कॉरिडोर की सौगात दी गई है। इनमें से सबसे ज्यादा फायदा उत्तर प्रदेश को मिला है, जिसके हिस्से में दो महत्वपूर्ण कॉरिडोर आए हैं। पहला कॉरिडोर राजधानी दिल्ली से धार्मिक नगरी बनारस को जोड़ेगा, जबकि दूसरा बनारस से सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) तक जाएगा। इन आधुनिक कॉरिडोर्स के बन जाने से न केवल यूपी और पूर्वोत्तर भारत के बीच की दूरियां घटेंगी, बल्कि लंबी दूरी का सफर अब चंद घंटों में और भी आरामदायक तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
दिल्ली से बनारस का सफर
रेलवे बजट 2026 की सबसे बड़ी घोषणा के अनुसार, दिल्ली और बनारस के बीच की दूरी अब सिमट कर रह जाएगी। नए हाई स्पीड कॉरिडोर की बदौलत यह सफर महज 3 घंटे 50 मिनट में पूरा होगा। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कॉरिडोर पूरी तरह एलिवेटेड (Elevated) यानी जमीन से ऊपर होगा। एलिवेटेड ट्रैक होने की वजह से ट्रेनों को बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार मिलेगी और हादसों का खतरा भी न के बराबर रहेगा। यह कॉरिडोर देश की राजनीतिक राजधानी दिल्ली और सांस्कृतिक राजधानी बनारस के बीच व्यापार और पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
एलिवेटेड रूट
रेलवे का दिल्ली-बनारस कॉरिडोर पूरी तरह एलिवेटेड (Elevated) होगा। इसका मतलब है कि ट्रेनें जमीन से ऊपर खंभों पर दौड़ेंगी, जिससे रेल फाटकों का झंझट खत्म हो जाएगा। ट्रैक पर किसी भी तरह की बाधा (मवेशी या ट्रैफिक) न होने से हादसों का खतरा खत्म होगा और ट्रेनें बिना रुके अपनी टॉप स्पीड बनाए रख सकेंगी। इससे सफर सुरक्षित होगा और ट्रेनें हमेशा अपने सही समय पर चलेंगी।
इन 11 शहरों की बदलेगी किस्मत
रेलवे के अनुसार, यह हाई स्पीड कॉरिडोर सराय काले खां (दिल्ली) से शुरू होगा। इसके बाद ट्रेन नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली और भदोही जैसे प्रमुख शहरों में रुकते हुए बनारस के मडुआडीह स्टेशन तक पहुँचेगी। इस पूरे प्रोजेक्ट का विकास उत्तर मध्य और पूर्वोत्तर रेलवे मिलकर करेंगे, जिससे इन सभी शहरों के यात्रियों को वर्ल्ड-क्लास कनेक्टिविटी मिलेगी।
₹1.20 लाख करोड़ सिर्फ पैसेंजर्स के नाम
रेलवे के कुल ₹2.78 लाख करोड़ के बजट में से ₹1.20 लाख करोड़ सिर्फ यात्री सुरक्षा के लिए रखे गए हैं। इस फंड का इस्तेमाल एलिवेटेड पुलों के निर्माण, आधुनिक सिग्नल सिस्टम और हाई-टेक सुरक्षा मशीनें लगाने में होगा। सरकार का लक्ष्य नई तकनीक के जरिए हादसों को शून्य पर लाना और रेल सफर को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाना है।
बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, पर कानपुर के हाथ फिर भी खाली
इस साल रेलवे का बजट पिछले वित्त वर्ष के ₹2.52 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2.78 लाख करोड़ कर दिया गया है। फंड में इस बड़ी वृद्धि के बावजूद, यूपी के औद्योगिक केंद्र कानपुर को सीधे तौर पर किसी बड़े नए प्रोजेक्ट से नहीं जोड़ा गया है। देश के सबसे व्यस्त जंक्शनों में से एक होने के बाद भी कानपुर की अनदेखी से शहर के व्यापारियों और आम यात्रियों में काफी निराशा है।









