
लखनऊ के अनवरगंज एलीवेटेड रेलवे ट्रैक प्रोजेक्ट को अब तेजी मिल गई है। शासन ने शुक्रवार को 35 करोड़ 87 लाख रुपये जारी कर दिए, जिससे जमीन अधिग्रहण और मुआवजा बांटने का काम शुरू हो सकेगा। ये 17 किलोमीटर लंबा ऊंचा ट्रैक शहर की ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या हल कर देगा।
प्रोजेक्ट की शुरुआत और बजट की डिटेल
दोस्तों, ये प्रोजेक्ट लंबे समय से इंतजार कर रहा था, और अब आखिरकार जमीन अधिग्रहण के लिए पैसे आ गए। कुल 22,306 वर्ग मीटर जमीन चाहिए, जिसके लिए लोक निर्माण विभाग को इतनी रकम मिली है। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने खुद बताया कि मुआवजा वितरण जल्द शुरू होगा। पूरी परियोजना की कीमत 1115 करोड़ रुपये है, और 2027 तक इसे पूरा करने का प्लान है।
जमीन अधिग्रहण का प्लान
लगभग 17 किमी लंबा ये एलीवेटेड ट्रैक अनवरगंज से होकर गुजरेगा, जहां करीब 18 रेलवे क्रॉसिंग हैं। इन क्रॉसिंग पर रोज ट्रेनें आने से घंटों जाम लगता था, खासकर सुबह-शाम। अब ऊंचे ट्रैक से ट्रेनें ऊपर से निकलेंगी, और नीचे सड़कें खुली रहेंगी। इसके लिए प्रभावित लोगों को मुआवजा मिलेगा, ताकि कोई परेशानी न हो। जमीन चिह्नांकन पहले ही हो चुका है।
शहरवासियों को मिलने वाले फायदे
सोचिए तो सही, 18 समपार क्रॉसिंग खत्म हो जाएंगी तो लखनऊ का ट्रैफिक कितना सुधर जाएगा! पेंट्रून, चारबाग, लालबाग जैसे इलाकों में जहां रेलवे लाइन सड़क काटती है, वहां अब फ्री फ्लो होगा। Ambulance हो या स्कूल बस, किसी को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। दुकानदारों और स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। कुल मिलाकर शहर की कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी।
पूरा होने का टाइमलाइन और चुनौतियां
2027 तक प्रोजेक्ट खत्म करने का टारगेट है, जो दो साल में काफी काम है। लेकिन बजट आने से काम तेज होगा। पहले जमीन विवाद और फंड की कमी थी, अब वो सुलझ गई। इंजीनियरिंग चैलेंजेस जैसे ऊंचा ब्रिज बनाना होगा, लेकिन योगी सरकार की स्पीड से ये हो जाएगा। प्रभावित परिवारों को निष्पक्ष मुआवजा मिलना जरूरी है।
आगे क्या होगा?
अब अगला स्टेप मुआवजा चेक बांटना और फिर कंस्ट्रक्शन शुरू करना। डीएम ऑफिस और रेलवे से अपडेट लेते रहें। लखनऊवासी खुश हैं कि उनका शहर और स्मार्ट बनेगा। ये प्रोजेक्ट न सिर्फ ट्रैफिक कम करेगा, बल्कि इकोनॉमी को भी बूस्ट देगा। अगर आप प्रभावित इलाके में रहते हैं, तो नोटिस पर नजर रखें।









