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UP के सरकारी कर्मचारियों की बढ़ी मुश्किलें! अब शेयर बाजार और सोने में निवेश का भी देना होगा हिसाब; योगी सरकार का नया फरमान

यूपी योगी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों पर शेयर बाजार सोने और संपत्ति निवेश के नए कड़े नियम लगाए। छह महीने के मूल वेतन से ज्यादा निवेश पर विभाग को सूचना देनी होगी। भ्रष्टाचार रोकने का यह बड़ा कदम लाखों कर्मचारियों को प्रभावित करेगा।

By Manju Negi

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के वित्तीय लेन-देन पर कड़े ब्रेक लगाने का फैसला किया है। राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली में व्यापक बदलाव कर शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, सोना और संपत्ति जैसे निवेशों का पूरा हिसाब मांगने का प्रावधान किया गया है। यह कदम भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और आय के स्रोतों को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।

UP के सरकारी कर्मचारियों की बढ़ी मुश्किलें! अब शेयर बाजार और सोने में निवेश का भी देना होगा हिसाब; योगी सरकार का नया फरमान

निवेश की नई सीमाएं तय

अब कोई कर्मचारी एक साल में अपने छह महीने के मूल वेतन से ज्यादा रकम शेयर, स्टॉक, म्यूचुअल फंड या बॉन्ड में नहीं लगा सकेगा। इतना निवेश करने पर विभाग को तुरंत जानकारी देनी पड़ेगी। मिसाल के तौर पर, अगर किसी अधिकारी का बेसिक पे 60,000 रुपये महीना है, तो 3.6 लाख से ऊपर का शेयर बाजार निवेश जांच के घेरे में आ जाएगा। चल संपत्ति जैसे सोना, गहने या गाड़ी खरीदने पर भी दो महीने के मूल वेतन से अधिक खर्च की सूचना फौरन करनी होगी। पहले यह सीमा सिर्फ एक महीने की थी।

संपत्ति घोषणा का वार्षिक दायरा

अचल संपत्ति के मोर्चे पर बदलाव और भी सख्त हैं। जमीन, मकान या प्लॉट का ब्योरा अब हर साल देना जरूरी होगा, जबकि पहले पांच साल में एक बार होता था। इसमें खुद, जीवनसाथी या बच्चों के नाम पर हासिल कोई भी संपत्ति शामिल रहेगी, चाहे वह खरीदी हो, उपहार में मिली हो या पट्टे पर ली गई हो। मूल वेतन से ज्यादा फंडिंग का मामला पकड़े जाने पर विभागीय जांच शुरू हो जाएगी, जो नौकरी पर संकट ला सकती है।

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भ्रष्टाचार रोकने की मजबूत रणनीति

सरकार का स्पष्ट इरादा अवैध कमाई पर रोक लगाना है। शेयर बाजार के तेज उछाल और सोने के रिकॉर्ड दामों के दौर में यह नियम काले धन पर नकेल कसेंगे। कैबिनेट ने 30 प्रस्तावों के बीच यह फैसला लिया, जो जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूत करेगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि छोटे निवेशकों को परेशानी हो सकती है, लेकिन प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि पारदर्शिता ही मुख्य लक्ष्य है।

कर्मचारियों के जीवन पर पड़ेगा असर

लाखों यूपी कर्मचारियों की जिंदगी बदलेगी, खासकर शहरी इलाकों में जहां ट्रेडिंग और प्रॉपर्टी डीलिंग आम है। विभागों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने होंगे ताकि रिपोर्टिंग आसान हो। विपक्ष इसे कर्मचारी विरोधी बता रहा है, मगर समर्थक पारदर्शिता की तारीफ कर रहे हैं। आने वाले महीनों में इन नियमों का असर साफ दिखेगा।

Author
Manju Negi
अमर उजाला में इंटर्नशिप करने के बाद मंजु GyanOk में न्यूज टीम को लीड कर रही है. मूल रूप से उत्तराखंड से हैं और GyanOk नेशनल और राज्यों से संबंधित न्यूज को बारीकी से पाठकों तक अपनी टीम के माध्यम से पहुंचा रही हैं.

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