
उत्तर प्रदेश, भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य, अब आधुनिक डिजिटल जनगणना की ओर बढ़ रहा है। 2021 की जनगणना कोविड और अन्य कारणों से 2025-26 तक स्थगित होने के बाद, अब मई 2026 से यह प्रक्रिया शुरू होगी। 7 से 21 मई तक ऑनलाइन स्व-गणना (self-enumeration) की सुविधा मिलेगी, जहां लोग मोबाइल ऐप पर खुद जानकारी भर सकेंगे। लेकिन सावधान! गलत डेटा या असहयोग पर Census of India Act, 1948 के तहत 3 साल जेल या 1000 रुपये जुर्माना हो सकता है।
2011 जनगणना में यूपी की आबादी 19.98 करोड़ थी, जो अब अनुमानित 24.63 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है। यह राज्य सरकार की योजनाओं, आरक्षण और संसाधन वितरण के लिए महत्वपूर्ण है। पहली बार जाति-आधारित विवरण भी शामिल होगा, जिससे राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में हालिया बैठक में 6 लाख कर्मियों की ड्यूटी तय की गई।
सख्त कानून और सजाएं
जनगणना अधिनियम की धारा 8 हर व्यक्ति को सटीक जानकारी देना बाध्य करती है। धारा 11 में उम्र, पेशा, आय, परिवार, धर्म या मकान विवरण में झूठ पर अधिकतम 3 साल कैद या 1000 रुपये जुर्माना (या दोनों) का प्रावधान है। अधिकारी को बाधा डालना या जानकारी छिपाना भी अपराध है। सरकारी कर्मचारियों के लिए लापरवाही पर यही सजा लागू। डिजिटल मोड में ऐप पर गलत एंट्री भी दंडनीय।
दो चरणों में प्रक्रिया
जनगणना दो चरणों में होगी। पहला: मई-जून 2026 में हाउस लिस्टिंग (मकान सूची, वाहन, सुविधाएं)। दूसरा: फरवरी 2027 में जनसांख्यिकी (उम्र, लिंग, पेशा, जाति, शिक्षा)। डेटा मोबाइल ऐप से रीयल-टाइम अपडेट होगा, ऑफलाइन-ऑनलाइन दोनों मोड में। अक्टूबर-नवंबर में फुल रिहर्सल होगा। स्व-गणना से पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन गोपनीयता सुनिश्चित।
महत्व और चुनौतियां
सही डेटा से कल्याण योजनाएं, पंचायत चुनावों का परिसीमन और बजट आवंटन प्रभावी होगा। यूपी सरकार ने जातिगत गणना को स्वीकारा, जो 16 साल बाद हो रही है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच और जागरूकता चुनौती। विशेषज्ञों का कहना है कि गलत डेटा राष्ट्रीय हानि पहुंचा सकता है। सरकार ने जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। लापरवाही से बचें, क्योंकि अभियोजन के लिए मजिस्ट्रेट अनुमति जरूरी। यह न केवल कानूनी बाध्यता, बल्कि नागरिक कर्तव्य है।









