
मध्यप्रदेश सरकार 1 अप्रैल 2026 से नए पेंशन नियम लागू करने जा रही है, जिससे प्रदेश के लगभग 4.60 लाख कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा। अब अंशदायी पेंशन योजना (NPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारी भी ‘परिवार पेंशन’ के हकदार होंगे।
सबसे खास बदलाव यह है कि विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और अविवाहित बेटियों के लिए पेंशन पाने की 25 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, यानी वे अब जीवनभर इस पेंशन की पात्र होंगी। वित्त विभाग ने इन नए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें आश्रितों की आय सीमा का निर्धारण न्यूनतम पेंशन और महंगाई राहत के आधार पर किया जाएगा।
पेंशन नियमों में ऐतिहासिक बदलाव
प्रदेश में करीब 50 साल पुराने (1976 के) पेंशन नियमों को अब भारत सरकार के आधुनिक प्रावधानों के अनुसार बदल दिया गया है। नए नियमों के तहत, परिवार पेंशन के लिए पात्रता की आय सीमा अब न्यूनतम पेंशन (7,750 रुपये) और उस पर मिलने वाली महंगाई राहत को जोड़कर तय की जाएगी, जिससे अधिक लोगों को लाभ मिल सकेगा। सबसे मानवीय बदलाव यह है कि अब मानसिक रूप से दिव्यांग आश्रितों को भी जीवनभर परिवार पेंशन का सहारा मिलेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह लंबे समय से चली आ रही कर्मचारियों की मांग को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पेंशन रोकने और गणना के नियमों में महत्वपूर्ण सुधार
नए नियमों के तहत अब कर्मचारियों की पेंशन रोकने की प्रक्रिया में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े फैसले अब संबंधित विभाग खुद ले सकेंगे, जबकि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामलों पर अंतिम निर्णय कैबिनेट द्वारा लिया जाएगा।
इसके अलावा, जो कर्मचारी केंद्रीय सेवा से राज्य सेवा में आते हैं, उनकी पेंशन गणना की प्रक्रिया को भी सरल और लाभदायक बनाया गया है। अब उनकी पेंशन तय करते समय केंद्रीय सेवा में बिताई गई अवधि को भी जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें रिटायरमेंट के बाद बेहतर वित्तीय लाभ मिल सके।
रिटायरमेंट के बाद नौकरी के लिए नए नियम
यदि कोई पेंशनभोगी अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) के एक साल के भीतर कोई नया व्यावसायिक काम या नौकरी शुरू करना चाहता है, तो उसे अपने पुराने नियुक्तिकर्ता अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया को और भी आसान बनाने के लिए एक समय सीमा तय की गई है—यदि आवेदन जमा करने के 60 दिनों के भीतर अधिकारी की ओर से कोई मनाही या सूचना नहीं आती है, तो यह मान लिया जाएगा कि अनुमति मिल गई है। यह बदलाव पेंशनभोगियों के लिए राहत भरा है क्योंकि अब उन्हें अनुमति के लिए अंतहीन इंतजार नहीं करना पड़ेगा।









