
मध्य प्रदेश सरकार ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक नई और सटीक गणना प्रणाली (कैलकुलेशन सिस्टम) शुरू की है, जिससे उन्हें अब लाखों रुपए का अतिरिक्त लाभ होगा। पहले फैमिली बेनिफिट फंड और ग्रुप इंश्योरेंस (GIS) जैसी योजनाओं में होने वाली कटौती का सही हिसाब न मिल पाने के कारण कर्मचारियों को 25 हजार से 2 लाख रुपए तक का नुकसान हो रहा था।
अब नए सिस्टम के आने से वेतन से कटने वाली राशि और उस पर मिलने वाले ब्याज में कोई गड़बड़ी नहीं होगी। इस पारदर्शी व्यवस्था के कारण रिटायरमेंट या अन्य मौकों पर कर्मचारियों को उनकी बचत का पूरा और सही पैसा मिलेगा, जो उनके लिए किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है।
एमपी सरकार का नया आदेश
मध्य प्रदेश के वित्त विभाग ने बचत राशि और ब्याज की गणना में होने वाली गड़बड़ियों को जड़ से खत्म करने के लिए एक नया डिजिटल सिस्टम तैयार किया है। इसके लिए एक विशेष एप्लीकेशन https://www.pension.mp.gov.in विकसित की गई है, जिससे अब फंड की सही-सही गणना की जा सकेगी। विभाग ने शनिवार को आधिकारिक आदेश जारी करते हुए सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में कर्मचारियों की बचत योजनाओं का भुगतान इसी पोर्टल के माध्यम से किया जाए। इस पारदर्शी तकनीक के आने से अब प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को उनके हक का पूरा पैसा और सही ब्याज समय पर मिल सकेगा।
एमपी कर्मचारियों के वेतन से कटौती का गणित
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के वेतन से हर महीने श्रेणी के अनुसार बचत योजनाओं के लिए कटौती की जाती है। इसमें प्रथम श्रेणी अधिकारियों के 600 रुपये, द्वितीय श्रेणी के 400 रुपये, तृतीय श्रेणी के 200 रुपये और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 100 रुपये काटे जाते हैं।
इस काटी गई कुल राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा बचत खाते में जमा होता है, जिस पर ब्याज मिलता है, जबकि शेष 30 प्रतिशत हिस्सा बीमा योजना में जाता है। सरकार के नए पोर्टल से अब इसी जमा राशि और उसके ब्याज का हिसाब पारदर्शी तरीके से रखा जाएगा, ताकि कर्मचारियों को भविष्य में उनका पूरा लाभ मिल सके।
एमपी बना देश का पहला राज्य
मध्य प्रदेश ने सरकारी कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बचत राशि और ब्याज की सटीक गणना के लिए नया एप्लीकेशन लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इस नई ‘केंद्रीकृत व्यवस्था’ (Centralized System) के आने से अब फंड के हिसाब-किताब में मानवीय गलतियों या गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। अब प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को उनके वेतन से कटने वाली पाई-पाई का सही हिसाब और उस पर मिलने वाला पूरा ब्याज सीधे डिजिटल सिस्टम के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा।









