
मध्य प्रदेश में सरकारी विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवजा राशि पर अब से कोई भी आयकर (Income Tax) नहीं लगाया जाएगा। नए वित्त वर्ष (1 अप्रैल 2026) से लागू हुए केंद्र सरकार के इस ऐतिहासिक प्रावधान से उन हजारों किसानों और भू-स्वामियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने वाली है, जिनकी जमीन सड़क, मेट्रो और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए अधिग्रहित की जा रही है। शहर के तीन सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स- पश्चिमी बाइपास, अयोध्या बाइपास और मेट्रो ट्रेन परियोजना– से जुड़े लगभग 400 एकड़ भूमि के मालिकों को इस निर्णय का सीधा फायदा होगा।
200 करोड़ रुपये बचेंगे किसानों की जेब में
इन तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित 400 एकड़ जमीन के बदले प्रभावित परिवारों को कुल मिलाकर करीब 200 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि दी जानी है। पुराने नियमों के तहत इस राशि पर 10% से लेकर 30% तक का आयकर कट सकता था, जिससे किसानों को मिलने वाली राशि कम हो जाती थी और उनमें आर्थिक असमंजस बना रहता था। अब नए नियम के तहत यह पूरी राशि बिना किसी कर कटौती के सीधे भू-स्वामियों के बैंक खाते में जमा की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम न केवल किसानों की जेब पर പറ്റा बेड़ हटाएगा, बल्कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी कई गुना तेज कर देगा।
तीन बड़े प्रोजेक्ट्स का विस्तृत विवरण
इंदौर में चल रहे इन प्रोजेक्ट्स की मांग और अधिग्रहण का विवरण इस प्रकार है:
- पश्चिमी बाइपास: यह 41 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट 11 मील रतनपुर से शुरू होकर फंदा-जोड़ इंदौर रोड तक जाएगा। इसके लिए 176 एकड़ जमीन की आवश्यकता है, जिसका अधिग्रहण टैक्स-फ्री मुआवजे के तहत हो रहा है।
- अयोध्या बाइपास: रत्नागिरी तिराहा से आशाराम तिराहा तक 16 किलोमीटर लंबे इस बाइपास के लिए 100 एकड़ जमीन चाहिए। वर्तमान में कुछ हिस्सों पर मौजूदा सड़क पर काम चल रहा है, जबकि शेष भाग के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया जारी है। हालांकि, कुछ पेड़ों से जुड़े मामलों को लेकर उच्च न्यायालय में also विचारधीन हैं।
- मेट्रो ब्लू लाइन: भदभदा से रत्नागिरी तिराहा तक 14 किलोमीटर लंबी मेट्रो ट्रैक (ब्लू लाइन) के लिए 32 हेक्टेयर (लगभग 80 एकड़) जमीन का अधिग्रहण तय किया गया है। इसके लिए प्रशासन द्वारा уже चार स्थानों पर नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।
प्रशासन का स्पष्टीकरण
अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। “संबंधित एजेंसी प्रोजेक्ट के लिए जमीन की जरूरत बताती है। उसके अनुसार तय नियम-प्रक्रिया से अधिग्रहण शुरू करते हैं। एजेंसी तय नियमों से मुआवजा राशि प्रशासन के माध्यम से वितरित करती है। अलग-अलग क्षेत्रों में हमारी टीम इसके लिए काम कर रही है,” यह जानकारी प्रकाश गोयल, एडीएम (इंदौर) ने दी।
विकास को मिलेगी गति
पिछले कुछ वर्षों में जमीन अधिग्रहण को लेकर विवादों और टैक्स की अनिश्चितता के कारण कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लंबित थे। केंद्र की 2026-27 के बजट में आयकर अधिनियम के तहत इस छूट को कानूनी रूप से स्पष्ट करने के बाद, अब MP सरकार के हाथ मजबूत हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि स्वामियों को “पूरा पैसा” मिलने की गारंटी से विरोध कम होगा और पश्चिमी बाइपास जैसी महत्वकांक्षी परियोजनाएं समय से पूरी हो सकेंगी। यह निर्णय किसानों के साथ-साथ प्रदेश की आर्थिक विकास रणनीति के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।









