
मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी योजनाओं का गलत फायदा उठाने वाले अपात्र लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश में अब तक करीब 20 लाख फर्जी नाम बीपीएल सूची से हटाए जा चुके हैं, लेकिन अभी भी 5.23 करोड़ लोग राशन (PDS) के दायरे में हैं, जिनमें कई अपात्रों के होने की आशंका है।
इन फर्जी कार्डधारकों को बाहर करने के लिए सरकार ने एक नया और सख्त सिस्टम लागू किया है। अब बीपीएल कार्ड के आवेदन के लिए कड़े मानक तय किए गए हैं, जिससे केवल पात्र गरीबों को ही राशन और अन्य सरकारी लाभ मिल सकेंगे और फर्जी कार्ड पूरी तरह रद्द कर दिए जाएंगे।
BPL कार्ड के लिए नए सख्त नियम
केंद्र सरकार की जांच में यह खुलासा हुआ है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग राशन (PDS) का लाभ ले रहे हैं जो इसके हकदार नहीं हैं। इसे रोकने के लिए मध्यप्रदेश में बीपीएल कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को बेहद कड़ा कर दिया गया है। अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों और एक हेक्टेयर से अधिक जमीन रखने वाले किसानों के बीपीएल कार्ड नहीं बनाए जाएंगे।
इसके लिए सरकार ने एक नया तकनीकी सिस्टम लागू किया है, जिसमें ‘समग्र आईडी’ और ‘पीएम किसान’ के डेटा को आपस में जोड़ दिया गया है। इससे अपात्र लोगों की पहचान तुरंत हो जाएगी और उनके फर्जी कार्ड रद्द कर दिए जाएंगे।
अब ऑटोमैटिक रिजेक्ट होंगे फर्जी BPL आवेदन
मध्यप्रदेश में बीपीएल कार्ड बनवाने की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट हो गई है। नए सिस्टम के तहत, जैसे ही कोई व्यक्ति बीपीएल कार्ड के लिए आवेदन करेगा, सॉफ्टवेयर तुरंत उसके डेटा की जांच कर लेगा। यदि आवेदक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहा है या उसके पास एक हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है, तो सिस्टम इसकी जानकारी पोर्टल पर तुरंत फ्लैश कर देगा।
ऐसी स्थिति में अपात्र व्यक्ति का आवेदन किसी मानवीय हस्तक्षेप के बिना अपने आप (स्वतः) निरस्त हो जाएगा। इस तकनीकी व्यवस्था से अब रसूखदार या साधन संपन्न लोग गरीबों का हक नहीं मार सकेंगे।
एमपी में बीपीएल राशन कार्ड पर बड़ी स्ट्राइक
मध्यप्रदेश में केवाईसी (KYC) के जरिए 20 लाख फर्जी नाम हटाए जाने के बावजूद अभी भी कई अपात्र लोग मुफ्त राशन का फायदा उठा रहे हैं। इसे पूरी तरह रोकने के लिए सरकार ने नियम और कड़े कर दिए हैं। अब समग्र आईडी को पीएम किसान निधि के डेटा से लिंक कर दिया गया है।
नया नियम यह है कि यदि परिवार के मुखिया के पास एक हेक्टेयर से अधिक जमीन है, तो परिवार का कोई भी अन्य सदस्य अब बीपीएल (BPL) सूची में शामिल नहीं रह पाएगा। वर्तमान में प्रदेश के करीब 1.28 करोड़ परिवारों को रियायती राशन मिल रहा है, लेकिन इस नए तकनीकी फिल्टर से बड़ी संख्या में अपात्रों के नाम कटना तय है।









