
मध्यप्रदेश के 5 लाख पेंशनरों के लिए एक बड़ी समस्या सामने आ रही है क्योंकि 1 अप्रैल से जिलों में स्थित पेंशन कार्यालय बंद होने जा रहे हैं। इस फैसले के बाद अब बुजुर्ग पेंशनरों को अपने छोटे-बड़े कामों के लिए राजधानी भोपाल के चक्कर लगाने होंगे, जिससे उनकी परेशानी काफी बढ़ जाएगी। पेंशन समस्या निवारण एसोसिएशन ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है ताकि पेंशनरों को उनके अपने ही जिले में सुविधा मिलती रहे।
पेंशन कार्यालय बंद होने से बुजुर्गों पर बढ़ेगा बोझ
मध्यप्रदेश सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लाखों बुजुर्ग पेंशनरों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। स्थानीय पेंशन कार्यालय बंद होने के कारण अब उन्हें मामूली सुधार या पेंशन से जुड़ी छोटी समस्याओं के लिए भी दूर भोपाल जाना होगा। पेंशनर्स एसोसिएशन का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर लंबी यात्रा करना बुजुर्गों के लिए न केवल शारीरिक रूप से थकाने वाला होगा, बल्कि इससे उन पर आर्थिक और मानसिक दबाव भी बढ़ेगा। एसोसिएशन ने मांग की है कि इस फैसले को तुरंत रोका जाए ताकि बुजुर्गों को उनके घर के पास ही सुविधाएं मिलती रहें।
अब जिलों में नहीं, सिर्फ भोपाल में होगा पेंशन कार्यालय
मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल से जिला पेंशन कार्यालयों को बंद कर पूरी व्यवस्था को भोपाल स्थित एक केंद्रीकृत कार्यालय (Centralized Office) से संचालित किया जाएगा। हालांकि, सरकार का कहना है कि पेंशनरों के लिए ऑनलाइन सुविधाएं जारी रहेंगी, जिससे वे अपनी समस्याओं का समाधान पा सकेंगे।
दूसरी ओर, पेंशनर एसोसिएशन का तर्क है कि कार्यालय बंद करने के बजाय जिला स्तर के अधिकारियों को बेहतर ट्रेनिंग दी जानी चाहिए थी। एसोसिएशन के अनुसार, छोटे कामों के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर निर्भर रहना या भोपाल जाना बुजुर्गों के लिए व्यावहारिक नहीं है।









