
हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए नया ड्रेस कोड और सोशल मीडिया दिशानिर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए हैं। कार्मिक विभाग द्वारा 16 मार्च को जारी अधिसूचना में कार्यालयों व अदालतों में औपचारिक, साफ-सुथरी व शालीन पोशाक अनिवार्य की गई है। जींस, टी-शर्ट, कैजुअल या पार्टी वियर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जिसका उल्लंघन CCS (Conduct) Rules, 1964 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करेगा।
यह कदम 2017 व 2021 के पुराने निर्देशों की अनदेखी के बाद उठाया गया है, जब कई कर्मचारी कैजुअल परिधान में दफ्तर आ रहे थे। मुख्य सचिव संजय गुप्ता के हस्ताक्षरित आदेश में कहा गया कि कर्मचारी का पहनावा पेशेवरता व कार्यस्थल की गरिमा का प्रतीक है। विभाग प्रमुखों को अनुपालन सुनिश्चित करने व उल्लंघन पर कार्रवाई का जिम्मा सौंपा गया है।
ड्रेस कोड के स्पष्ट नियम
- पुरुष कर्मचारी: कॉलर वाली शर्ट के साथ ट्राउजर/पैंट अनिवार्य। फुटवियर में फॉर्मल जूते या सैंडल। सादे रंगों की औपचारिक पोशाक ही स्वीकार्य।
- महिला कर्मचारी: साड़ी, फॉर्मल सूट, सलवार-कमीज, चूड़ीदार, कुर्ता विद दुपट्टा या ट्राउजर-शर्ट। चप्पल, सैंडल या जूते के साथ। भड़कीले रंग व कैजुअल कपड़े वर्जित।
सरकार ने ग्रूमिंग व पर्सनल हाइजीन पर भी बल दिया है, ताकि सेवाओं में शालीनता बनी रहे।
सोशल मीडिया पर नकेल
आदेश में सोशल मीडिया उपयोग पर भी सख्ती की गई है। कर्मचारियों को सरकारी नीतियों की आलोचना या आधिकारिक जानकारी बिना अनुमति साझा करने से रोका गया। CCS Rules के Rule-3(1)(iii) के तहत ऐसा व्यवहार जो सरकारी गरिमा के विपरीत हो, दंडनीय होगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा, “डिसेंट ड्रेस पहनें। 2021 के निर्देशों को ही सख्ती से लागू किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी अनुशासन जरूरी।”
उद्देश्य व प्रतिक्रिया
ड्रेस कोड का मुख्य लक्ष्य कार्यालयी मर्यादा व पेशेवर छवि मजबूत करना है। पहले राजस्थान (2024) व मेरठ जैसे क्षेत्रों में समान नियम लागू हो चुके हैं। कर्मचारी संगठनों में हलचल है, लेकिन सरकार अनुपालन पर अडिग। यह कदम सुक्खू सरकार के अनुशासन अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।









