
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी में संपत्तियों के प्रबंधन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा बदलाव लागू करने की तैयारी कर ली है। साल 2026 से दिल्ली में हर संपत्ति की यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन कोड (UPIC) यानी प्रॉपर्टी आईडी को अब आधार कार्ड से लिंक करना अनिवार्य किया जाएगा। यह कदम टैक्स चोरी पर रोक लगाने और संपत्ति स्वामित्व की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
क्यों जरूरी है यह नई व्यवस्था?
दिल्ली जैसे बड़े मेट्रो शहर में प्रॉपर्टी टैक्स MCD की आय का सबसे बड़ा स्रोत है। लेकिन अब तक कई ऐसी संपत्तियां थीं जो टैक्स रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज नहीं थीं या फिर उनसे जुड़ा डेटा अधूरा था। आधार लिंकिंग की व्यवस्था से अब यह सुनिश्चित होगा कि हर संपत्ति का मालिक सिस्टम में सही ढंग से पहचाना जा सके। इससे टैक्स चोरी और फर्जी पंजीकरण जैसी समस्याओं पर बड़ा अंकुश लगेगा।
क्या है UPIC या प्रॉपर्टी आईडी?
MCD ने कुछ साल पहले दिल्ली की हर संपत्ति को एक यूनिक 10 या 15 अंकों का कोड दिया था, जिसे UPIC (Unique Property Identification Code) कहा जाता है। यह कोड किसी संपत्ति की पहचान का आधार है, जैसे किसी व्यक्ति की पहचान के लिए आधार नंबर होता है। अब जब यह कोड आधार से जुड़ जाएगा, तो हर संपत्ति का स्वामित्व डेटा प्रमाणिक और सत्यापित बन जाएगा।
आधार से लिंक करने के फायदे
नई व्यवस्था के कई प्रत्यक्ष लाभ हैं जो संपत्ति मालिकों और प्रशासन दोनों के लिए उपयोगी होंगे:
- पारदर्शिता में वृद्धि: आधार से लिंक होने के बाद संपत्ति स्वामित्व का स्पष्ट डेटाबेस बनेगा, जिससे बेनामी और विवादित संपत्तियों की पहचान करना आसान होगा।
- टैक्स चोरी पर रोक: अब नगर निगम यह पता लगा सकेगा कि कौन-सी संपत्तियां टैक्स के दायरे में नहीं हैं या गलत जानकारी के आधार पर टैक्स से बच रही हैं।
- सरकारी योजनाओं का आसान लाभ: जब संपत्ति विवरण और व्यक्तिगत डेटा एक साथ हो, तो सरकार नागरिकों तक सब्सिडी, योजनाएं और नागरिक सुविधाओं का लाभ सीधे पहुंचा सकेगी।
- डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा: प्रॉपर्टी रिकॉर्ड, टैक्स भुगतान रसीदें, और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज अब एक क्लिक पर उपलब्ध होंगे। यह दिल्ली को स्मार्ट सिटी मॉडल की दिशा में एक और कदम साबित होगा।
संपत्ति मालिकों के लिए जरूरी कदम
MCD ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल्द ही अपना UPIC नंबर और आधार कार्ड लिंक करें। इसके लिए दिल्ली नगर निगम का आधिकारिक पोर्टल और मोबाइल ऐप उपलब्ध रहेगा। संपत्ति मालिक अपने रिकॉर्ड की स्थिति जांच सकते हैं और यदि किसी प्रकार की गलती है, तो उसे ऑनलाइन ही सुधार सकते हैं।
जल्द ही एक ऑनलाइन वेरीफिकेशन प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें संपत्ति मालिक को अपने आधार कार्ड का सत्यापन करना होगा। यह प्रक्रिया सुरक्षित डिजिटल इंटरफेस के ज़रिए पूरी की जाएगी ताकि डाटा लीक या दुरुपयोग की कोई गुंजाइश न रहे।
दिल्ली में डिजिटल स्वच्छता की दिशा में कदम
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली सरकार और एमसीडी ने राजधानी के प्रशासनिक ढांचे को डिजिटल फॉर्म में बदलने के लिए कई कदम उठाए हैं — जैसे ई-प्रॉपर्टी टैक्स, ऑनलाइन बिल भुगतान, और डिजिटल स्वामित्व प्रमाणपत्र। अब आधार लिंकिंग योजना इस डिजिटल परिवर्तन को और अधिक सशक्त बनाने जा रही है।
यह पहल केवल टैक्स वसूली या डेटा प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि शहर की भूमि, भवन, और आवासीय संपत्तियों की कोई गलत एंट्री या डुप्लीकेट रजिस्ट्री सिस्टम में न रहे।
विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
MCD का कहना है कि इस व्यवस्था से उसकी राजस्व वसूली में बड़ा इजाफा होगा, जिससे दिल्ली में सड़क, सफाई, जलनिकासी और अन्य नागरिक सेवाओं के लिए अधिक धन उपलब्ध कराया जा सकेगा। टैक्स चोरी पर रोक लगने से निगम के फंड स्थायी रूप से मजबूत होंगे। नागरिकों को इसके लाभ दीर्घकाल में दिखाई देंगे, जब दिल्ली में पारदर्शी टैक्स प्रणाली के कारण बुनियादी सुविधाओं में सुधार और क्षेत्रवार विकास कार्य तेजी से हो सकेंगे।









