
दिल्ली सरकार अपनी वृद्धावस्था पेंशन योजना को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए एक विशेष अध्ययन (Study) शुरू करने जा रही है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि बुजुर्गों को दी जाने वाली पेंशन की राशि उनके लिए कितनी मददगार साबित हो रही है। साथ ही, सरकार इस प्रक्रिया के जरिए उन लोगों की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करेगी जो नियमों के अनुसार इस पेंशन के पात्र नहीं हैं। योजना विभाग ने इस मूल्यांकन कार्य के लिए एक विशेषज्ञ एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि पेंशन का लाभ केवल जरूरतमंद और सही लाभार्थियों तक ही पहुँच सके।
दिल्ली ओल्ड एज पेंशन किसे और कितनी मिलती है आर्थिक मदद?
दिल्ली सरकार का समाज कल्याण विभाग ‘ओल्ड एज असिस्टेंस स्कीम’ के जरिए राजधानी के बुजुर्गों को सीधे बैंक खाते में वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इस योजना का लाभ 60 साल या उससे अधिक उम्र के योग्य नागरिकों को मिलता है। पेंशन की राशि उम्र और श्रेणी के आधार पर तय की गई है: 60 से 70 साल के बुजुर्गों को हर महीने ₹2,000 मिलते हैं (SC/ST और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए यह राशि ₹2,500 है)। वहीं, 70 साल से अधिक उम्र के सभी बुजुर्गों को प्रतिमाह ₹2,500 की पेंशन दी जाती है। साल 2010-11 से चल रही यह योजना हर साल लगभग 4 लाख बुजुर्गों को सहारा दे रही है।
50 सर्वेयर की टीम करेगी 4 लाख बुजुर्गों की जांच, जानें क्या है पूरा प्लान
दिल्ली सरकार का प्लानिंग डिपार्टमेंट पेंशन योजना की जमीनी हकीकत जानने के लिए एक बड़ा सर्वे शुरू करने जा रहा है। इस स्टडी के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- लक्ष्य: इस सर्वे में वर्तमान के 4 लाख पेंशनभोगियों के साथ-साथ उन पात्र बुजुर्गों को भी शामिल किया जाएगा, जिन्हें अब तक इस स्कीम का लाभ नहीं मिल पाया है।
- सैंपल साइज: दिल्ली के सभी जिलों से कम से कम 2,500 बुजुर्गों का डेटा सैंपल के तौर पर लिया जाएगा ताकि योजना की कमियों और खूबियों का पता चल सके।
- ग्राउंड टीम: इस काम के लिए कम से कम 50 अनुभवी सर्वेयर की एक टीम तैनात की जाएगी। चुनी गई एजेंसी को यह आजादी होगी कि वह सर्वे के लिए सबसे सटीक और बेहतर तरीका अपना सके।
बुजुर्गों के सम्मान और सेहत पर पेंशन का असर
दिल्ली सरकार की यह स्टडी केवल पेंशन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों के जीवन स्तर पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का आकलन करना है। सरकार यह जांचना चाहती है कि क्या वर्तमान पेंशन राशि बुजुर्गों की भोजन, दवाओं और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और क्या इसने उनकी आर्थिक असुरक्षा को कम किया है।
इसके साथ ही, अध्ययन में यह भी देखा जाएगा कि वित्तीय आत्मनिर्भरता आने से परिवार और समाज में बुजुर्गों के सम्मान और सामाजिक जुड़ाव में कितनी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, सरकार PFMS के माध्यम से सीधे बैंक खाते में पैसा भेजने की प्रक्रिया को और भी पुख्ता बनाने पर विचार कर रही है ताकि भुगतान प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित रहे।
दिल्ली पेंशन नीति में बड़े बदलाव की तैयारी
दिल्ली सरकार की इस स्टडी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पेंशन से जुड़ी नीतियों में सुधार करना है। सरकार यह जांचना चाहती है कि क्या वर्तमान नियम और दस्तावेज़ों की शर्तें गरीब और बेसहारा बुजुर्गों के लिए काफी सरल हैं या उनमें बदलाव की जरूरत है।
इस प्रक्रिया के दौरान उन कमियों को दूर किया जाएगा जिससे गलत लोग या तय आय सीमा से अधिक वाले परिवार इस योजना का अनुचित लाभ उठा रहे हैं। यह पूरी जांच मार्च 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है, जिसमें आधुनिक तकनीकों और सर्वे के जरिए लाभार्थियों की संतुष्टि और उनके सामने आने वाली चुनौतियों का आकलन किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस योजना को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।









