
बिहार के लिए एक ऐतिहासिक खबर आ रही है। केंद्र सरकार ने वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा कर दी है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगी। इस बुलेट ट्रेन से बिहार को सबसे ज्यादा लाभ होगा, क्योंकि यह पटना सहित कम से कम 6 बड़े शहरों से गुजरेगी। लगभग 750 किलोमीटर लंबे इस रूट पर ट्रेन 350 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी, जिससे वाराणसी से सिलीगुड़ी का सफर महज 3 घंटे में पूरा हो जाएगा। वर्तमान में यह यात्रा 12 घंटे से ज्यादा लेती है।
यह परियोजना नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के तहत चल रही है। केंद्रीय रेल मंत्री ने हाल ही में बिहार में पहली बुलेट ट्रेन चलाने का ऐलान किया। रूट चार्ट तैयार हो चुका है, लेकिन फाइनल डीपीआर (Detailed Project Report) और स्टेशन स्थानों पर अंतिम मुहर 2026 तक लगने की उम्मीद है। फिलहाल सर्वे, मिट्टी जांच और जमीन अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा। बिहार शरीफ के भोजपुर जिले में 95 हेक्टेयर जमीन चिह्नित हो चुकी, जहां 38 गांवों से एलिवेटेड ट्रैक गुजरेगा।
बिहार के शहर और स्टेशन
बुलेट ट्रेन का मुख्य स्टेशन पटना में तय है, जो पूरे कॉरिडोर का हब बनेगा। रूट वाराणसी से शुरू होकर बिहार में प्रवेश करेगा। अनुमानित शहरों में बक्सर, आरा, पटना, गया, जहानाबाद और मुजफ्फरपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार, बक्सर से पटना तक का सेक्शन तेजी से विकसित होगा। उत्तर बिहार में दरभंगा, सहरसा और पूर्णिया भी कनेक्ट हो सकते हैं, जो सिलीगुड़ी की ओर रूट को मजबूत बनाएंगे। भोजपुर में उदवंतनगर के पास आरा स्टेशन प्रस्तावित है, जो पहले सोन वैली स्कूल इलाके में सोचा गया था। कुल 5-6 स्टॉपेज बिहार में होंगे, जो यात्रियों को सीधी पहुंच देंगे।
समय की बचत और फायदे
ट्रेन की स्पीड से पटना-सिलीगुड़ी की दूरी 2 घंटे 55 मिनट में कवर हो जाएगी। दिल्ली-हावड़ा वेरिएंट में भी पटना शामिल है, जिससे पूरे पूर्वी भारत का कनेक्टिविटी बढ़ेगा। आर्थिक रूप से यह बिहार के लिए वरदान साबित होगी। पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। उत्तर बिहार के पिछड़े इलाकों में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, खासकर निर्माण और रखरखाव में। जमीन अधिग्रहण से प्रभावित गांवों को मुआवजा और विकास योजनाओं का लाभ मिलेगा। यह कॉरिडोर पूर्वी UP और उत्तर बंगाल को भी जोड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा।
प्रोजेक्ट की प्रगति
प्रोजेक्ट प्रपोजल स्टेज से आगे बढ़ चुका है। 2025-26 में जमीन अधिग्रहण शुरू हो चुका, जैसा कि हालिया अपडेट्स बताते हैं। हालांकि, फुल-स्केल कंस्ट्रक्शन 2027 के बाद शुरू होगा। भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद के बीच 2027 तक दौड़ने वाली है, लेकिन बिहार वाला कॉरिडोर उसके बाद फेज में आएगा। चुनौतियां जैसे जमीन विवाद और फंडिंग हैं, लेकिन केंद्र की प्राथमिकता इसे तेज कर रही।
बिहारवासियों के लिए यह सपना साकार होने की कगार पर है। बुलेट ट्रेन न सिर्फ समय बचेगी, बल्कि राज्य को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ेगी। स्थानीय निवासियों और व्यवसायियों से अपील है कि वे सर्वे में सहयोग करें। जल्द ही बिहार की धरती पर जापान-चीन जैसी चमचमाती ट्रेनें दौड़ेंगी।









