बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्यव्यापी विशेष भूमि सर्वेक्षण को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का ऐलान कर दिया है। यह खबर उन लाखों जमीन मालिकों के लिए राहत भरी है जो सालों से कागजी जाल में फसे हुए हैं। कल की उच्चस्तरीय बैठक में सिन्हा ने साफ लफ्जों में कहा कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा। भूमि विवादों का अंतिम अध्याय लिखा जाना है, ताकि हर किसान और ग्रामीण अपना हक महसूस कर सके।

बिहार में जमीन सर्वे
बिहार का यह जमीन सर्वे अभियान राज्य की करीब ढाई करोड़ हेक्टेयर जमीन को नया जीवन देने का प्रयास है। पुराने, फटे-पुराने कागजों के झगड़े अब खत्म होने को हैं। पहले चरण में नापजोख 99 फीसदी से ज्यादा पूरा हो गया और प्रारंभिक काम 94 फीसदी आगे बढ़ चुका। दूसरे चरण के 36 जिलों में हवाई नाप और गांव सभाएं खत्म हो चुकी हैं। कुल 67 फीसदी गांवों के ड्राफ्ट रिकॉर्ड जनता के सामने आ गए। रास्ता आसान नहीं था। समयसीमा बार-बार बढ़ी, क्योंकि मालिकों की शिकायतें और तकनीकी परेशानियां आईं।
समयसीमा का नया अध्याय
शुरुआत में 2025 का लक्ष्य रखा गया था, फिर 2026 तक तोड़ा गया। फरवरी में सख्त दो साल का अल्टीमेटम आया और अब मार्च के अंत में दिसंबर 2027 को अंतिम मुहर लग गई। सिन्हा जी की यह घोषणा बिहार सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “भूमि सुधार हमारी प्राथमिकता है। ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं।” यह बदलाव ग्रामीण भारत की वास्तविकता को समझते हुए आया है, जहां एक छोटा सा कागजी त्रुटि पूरे परिवार को परेशान कर देती है।
आगामी कदम और आसान प्रक्रिया
13 मार्च को राजस्व प्रशिक्षण संस्थान में बड़ी समीक्षा बैठक होगी। हर जिले की प्रगति पर नजर रखी जाएगी और रफ्तार बढ़ाने के नए निर्देश जारी होंगे। अच्छी बात यह कि अब जमीन मालिकों को थाने-तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ऑनलाइन पोर्टल से आवेदन हो जाएगा, स्थिति चेक होगी। यह डिजिटल कदम ग्रामीणों को सशक्त बनाएगा।
भविष्य की उम्मीदें
यह सर्वे न सिर्फ विवाद सुलझाएगा, बल्कि किसान सम्मान निधि, आवास योजनाओं में पारदर्शिता लाएगा। साफ रिकॉर्ड से निवेश बढ़ेगा, अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। बिहार के कोने-कोने में फैले परिवार अब चैन की सांस लेंगे। सिन्हा जी का यह फैसला इतिहास रचेगा, बशर्ते अधिकारी जमीन पर उतरें। बिहार बदल रहा है, एक साफ-सुथरी जमीन के साथ।









