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सोशल मीडिया ऐप्स छीन रहे हैं आपकी खुशियां! वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट के इन आंकड़ों ने उड़ाए होश

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग युवाओं, खासकर लड़कियों में डिप्रेशन व एंग्जायटी बढ़ा रहा है। अंग्रेजी देशों में 25 साल से कम उम्रवालों की लाइफ सैटिस्फैक्शन 1 पॉइंट गिरी। 5 घंटे रोज उपयोग 'डेंजर जोन', पैसिव स्क्रॉलिंग सबसे घातक। फिनलैंड सबसे खुशहाल।

By Pinki Negi

world happiness report 2026 social media becoming major cause depression anxiety among children

आज की डिजिटल दुनिया में सोशल मीडिया बच्चों और जेन जेड की जिंदगी का अभिन्न अंग बन चुका है। लेकिन वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 ने एक चौंकाने वाले खुलासे के साथ चिंता की घंटी बजा दी है। 19 मार्च को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स का अत्यधिक उपयोग युवाओं में डिप्रेशन, एंग्जायटी और मेंटल स्ट्रेस को बढ़ावा दे रहा है, जो उनकी समग्र खुशहाली पर गहरा असर डाल रहा है।

डिजिटल लत की चेतावनी

रिपोर्ट, जो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर द्वारा तैयार की गई है, स्पष्ट रूप से बताती है कि 25 साल से कम उम्र के युवाओं, खासकर अंग्रेजी बोलने वाले देशों जैसे अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में, जीवन संतुष्टि (लाइफ सैटिस्फैक्शन) के स्तर में पिछले दशक में 0-10 स्केल पर करीब 1 पॉइंट की गिरावट आई है। इसके उलट, बाकी दुनिया में यह बढ़ी है। औसतन किशोर रोजाना 2.5 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं, लेकिन 1 घंटे से कम उपयोग करने वाले सबसे ज्यादा खुश पाए गए।

5 घंटे का ‘डेंजर जोन’

रिसर्चर्स ने ‘5 घंटे के डेंजर जोन’ की पहचान की है। जो बच्चे दिन में 5 घंटे या इससे ज्यादा सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं, उनमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षण उनसे दोगुने पाए गए जो 1 घंटे से कम उपयोग करते हैं। यूके की मिलेनियम कोहोर्ट स्टडी में 10,904 किशोरों पर आधारित आंकड़ों से साबित हुआ कि भारी उपयोग डिप्रेशन का जोखिम दोगुना कर देता है। रिपोर्ट फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, रेडिट और यूट्यूब को खतरनाक श्रेणी में रखती है।

2010 के बाद बिगड़े हालात

ट्रेंड की शुरुआत 2010 के आसपास हुई, जब स्मार्टफोन और हाई-स्पीड इंटरनेट ने आम जन तक पहुंच बनाई। तब से पश्चिमी यूरोप और अंग्रेजी भाषी देशों में युवाओं की खुशहाली में लगातार गिरावट आ रही है। वैश्विक स्तर पर फिनलैंड नौवें साल सबसे खुशहाल देश बना (स्कोर 7.764/10), उसके बाद आइसलैंड, डेनमार्क, स्वीडन। अमेरिका 23वें और न्यूजीलैंड 11वें स्थान पर खिसक गया।

लड़कियां ज्यादा प्रभावित

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि लड़कियां लड़कों से ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। 15 साल की लड़कियों में 5 घंटे से ज्यादा उपयोग से लाइफ सैटिस्फैक्शन में भारी गिरावट दर्ज की गई। कारण? बॉडी इमेज इश्यूज- परफेक्ट फोटोज से खुद को कमतर समझना; इन्फ्लुएंसर कल्चर से तुलना; और ऑनलाइन चैटिंग से अकेलापन। साइबर बुलिंग, पोर्नोग्राफी, वायलेंस वीडियोज और डीपफेक भी खतरा बढ़ा रहे हैं।

पैसिव स्क्रॉलिंग का जहर

रिपोर्ट पैसिव स्क्रॉलिंग को सबसे घातक बताती है- रील्स या वीडियोज को घंटों स्क्रॉल करना। व्हाट्सएप जैसी कम्युनिकेशन ऐप्स से फायदा होता है, लेकिन एल्गोरिदम-ड्रिवन प्लेटफॉर्म्स नुकसानदेह। ऑक्सफोर्ड के डायरेक्टर जान-एमैनुएल डी नेव कहते हैं, “सोशल मीडिया का प्रभाव प्लेटफॉर्म, उपयोगकर्ता और तरीके पर निर्भर है। भारी उपयोग से वेलबीइंग घटती है।”

समाधान की राह

रिपोर्ट नीति निर्माताओं को चेतावनी देती है कि यह समस्या पूरे समाज को प्रभावित कर रही है। ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया ने युवाओं पर प्रतिबंध लगाए, भारत में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश ने बैन की घोषणा की, बिहार विचाराधीन। पेरेंट्स को सलाह: उपयोग सीमित करें, ‘सोशल’ को प्राथमिकता दें। पॉजिटिव इंटरनेट उपयोग (कम्युनिकेशन, लर्निंग) से खुशहाली बढ़ सकती है।सोशल मीडिया ऐप्स छीन रहे हैं आपकी खुशियां! वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट के इन आंकड़ों ने उड़ाए होश

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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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