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पत्नी की कमाई ₹1.38 लाख है, बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! पति से नहीं मांग सकती गुज़ारा भत्ता; ‘गरिमा’ का दिया हवाला।

क्या पत्नी का अधिक वेतन होना उसे भरण-पोषण के अधिकार से वंचित करता है? बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक चौंकाने वाला फैसला सुनाते हुए ₹1.38 लाख कमाने वाली पत्नी का गुजारा भत्ता रद्द कर दिया है। जानिए कोर्ट ने 'आत्मनिर्भरता' और 'गरिमा' पर क्या टिप्पणी की!

By Pinki Negi

पत्नी की कमाई ₹1.38 लाख है, बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! पति से नहीं मांग सकती गुज़ारा भत्ता; 'गरिमा' का दिया हवाला।
बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी उच्च शिक्षित है और सरकारी नौकरी से लाखों रुपये वेतन ले रही है, तो वह पति से भरण-पोषण (Maintenance) पाने की हकदार नहीं है। न्यायमूर्ति अभय एस. वाघवासे की पीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 1.38 लाख रुपये वेतन पाने वाली मेडिकल ऑफिसर पत्नी अपनी गरिमा के साथ जीवन जीने में पूरी तरह सक्षम है। कोर्ट ने माना कि गुजारा भत्ता तय करते समय यह देखना जरूरी है कि क्या पत्नी की अपनी आय उसे वही जीवन स्तर देने के लिए पर्याप्त है, जो उसे ससुराल में मिलता था।

निचली अदालत के फैसले को पति ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

यह मामला एक डॉक्टर पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद का है, जो शादी के कुछ महीनों बाद ही (2010 से) अलग रहने लगे थे। पत्नी ने घरेलू हिंसा कानून (D.V. Act) के तहत याचिका दायर कर अपने और बेटे के लिए गुजारा भत्ते की मांग की थी। निचली अदालत और सत्र न्यायालय ने पति को पत्नी और बच्चे के लिए मासिक भुगतान, किराया और मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि, पति ने इन फैसलों को स्वीकार करने के बजाय बॉम्बे हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की, जिसके बाद हाईकोर्ट ने पत्नी की ऊंची आय को देखते हुए फैसला बदल दिया।

‘लाखों कमाने वाली डॉक्टर पत्नी को भत्ते की क्या जरूरत?’

पति के वकील ने कोर्ट में ठोस सबूत पेश करते हुए बताया कि पत्नी न केवल उच्च शिक्षित (MBBS, MD) है, बल्कि सरकारी चिकित्सा अधिकारी के रूप में ₹1.38 लाख प्रति माह वेतन भी ले रही है। साक्ष्य के तौर पर उनकी ‘सैलरी स्लिप’ पेश की गई, जिससे यह साबित हुआ कि पत्नी एक टैक्सपेयर है और आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर है। पति ने कोर्ट में साफ किया कि वह अपने बेटे की जिम्मेदारी उठाने और उसका खर्च देने के लिए तैयार है, लेकिन इतनी मोटी कमाई करने वाली पत्नी को गुजारा भत्ता देना तर्कसंगत नहीं है।

‘लाखों की कमाई के बावजूद जीवन स्तर बनाए रखने के लिए भत्ता जरूरी’

पत्नी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘रजनेश बनाम नेहा’ मामले का हवाला देते हुए दलील दी कि केवल नौकरी करना भरण-पोषण से इनकार का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट को बताया गया कि पत्नी को वही सुख-सुविधाएं और जीवन स्तर मिलना चाहिए जो उसे ससुराल में मिलता था। पत्नी ने अपने हलफनामे में पति की खेती और मेडिकल प्रैक्टिस से होने वाली भारी कमाई का जिक्र किया और बताया कि उसे बेटे की पढ़ाई, घर के किराए और अपने कार व होम लोन की ईएमआई (EMI) भरने के लिए पति की आर्थिक मदद की जरूरत है।

आत्मनिर्भर पत्नी को भत्ते की जरूरत नहीं, अपनी आय ही काफी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में गहराई से विश्लेषण करते हुए कहा कि अदालत का काम यह देखना है कि क्या पत्नी की अपनी कमाई उसके जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने पाया कि पत्नी का ₹1.38 लाख का वेतन उसे एक शानदार जीवन जीने के लिए काफी है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पत्नी को पहले से ही मकान किराया भत्ता (HRA) मिल रहा है और होम व कार लोन की ईएमआई से यह साफ होता है कि उसके पास अपनी संपत्ति और वाहन मौजूद है। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने माना कि पत्नी आर्थिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र है।

हाईकोर्ट का अंतिम फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और तथ्यों को देखते हुए निचली अदालत के आदेश में बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने पति की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पत्नी को मिलने वाले 12,000 रुपये मासिक भरण-पोषण और किराए के भुगतान के आदेश को पूरी तरह रद्द (Set aside) कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि बच्चे की जिम्मेदारी पिता की भी है, इसलिए पति को अपने बेटे के लिए 10,000 रुपये प्रति माह का भुगतान जारी रखना होगा। इस फैसले ने साफ कर दिया कि सक्षम पत्नी को भत्ता नहीं मिलेगा, लेकिन संतान के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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