
पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक हलचल चरम पर है। चुनाव आयोग की रिपोर्ट और राज्यपाल के अचानक बदलाव ने राष्ट्रपति शासन की अटकलें तेज कर दी हैं। 49 साल बाद एक बार फिर धारा 356 की चर्चा जोरों पर है, जब 1977 में सिद्धार्थ शंकर रे की सरकार बर्खास्त होकर 52 दिनों तक राष्ट्रपति शासन लगा था।
चुनाव आयोग का दौरा और विवाद
चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने 10 मार्च को कोलकाता में राजनीतिक दलों, पुलिस और प्रशासन से कानून-व्यवस्था पर चर्चा की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति शासन पर मौन साधा, लेकिन दिल्ली में रिपोर्ट भेजने की बात कही। आयोग को TMC समर्थकों के ‘गो बैक’ नारों, काले झंडों और ‘लोकतंत्र का हत्यारा’ पोस्टर्स का सामना करना पड़ा। BJP, CPM समेत अन्य दलों ने एक या दो चरणों में मतदान की मांग की।
आयोग ने ईवीएम पर उम्मीदवारों की रंगीन फोटो, 7 दिनों में VVPAT जांच, हर बूथ पर वेबकास्टिंग और 1200 वोटरों की सीमा का ऐलान किया। लेकिन SIR (संशोधित इंडियन रेसिडेंट) विवाद ने सबको बैचेन कर दिया। 60 लाख लोगों के दस्तावेज विचाराधीन हैं, जिनकी जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कलकत्ता हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही। 10 मार्च तक सिर्फ 10.16 लाख की जांच हुई, बाकी में दो महीने लग सकते हैं।
SIR विवाद: मतदाता सूची पर संकट
नवंबर 2025 से चल रही SIR प्रक्रिया TMC के गले की हड्डी बनी हुई। ममता बनर्जी का आरोप है कि BJP और आयोग वैध वोटरों के नाम हटाने की साजिश रच रहे। TMC ने कोलकाता में 5 दिनों का धरना दिया, जिसमें ममता और अभिषेक बनर्जी शामिल हुए। BJP नेता शुभेंदु अधिकारी 2.4 करोड़ फर्जी वोटरों का दावा कर रहे। आयोग का भरोसा है कि समय पर्याप्त है, लेकिन देरी से चुनाव टलने पर राष्ट्रपति शासन संवैधानिक मजबूरी बन सकता है, क्योंकि विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 तक।
राज्यपाल बदलाव और केंद्र का दबाव
सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि की नियुक्ति ने संशय बढ़ाया। ममता ने तंज कसा, “जो तमिलनाडु में विवाद पैदा करे, उसे बंगाल क्यों?” उन्होंने धरने से कहा, “राष्ट्रपति शासन लगे तो आराम मिलेगा, फिर सड़क पर उतरूंगी।” विपक्ष में रहते ममता वाममोर्चा के खिलाफ यही मांग करती रहीं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सिलीगुड़ी दौरे पर विवाद तब भड़का जब कोई मंत्री अगवानी को नहीं पहुंचा। मोदी ने X पर TMC को राष्ट्रपति का अपमान करने वाला ठहराया। ममता का बचाव, “निजी आयोजन था, प्रोटोकॉल पाला गया।” केंद्र पर EVM, ED छापों और SIR से बंगाल को निशाना बनाने का आरोप।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
CPM नेता मोहम्मद सलीम बोले, “60 लाख वोटर अधर में, चुनाव असंभव।” BJP अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने कहा, “धारा 356 के खिलाफ, लेकिन जनता ममता सरकार चाहती नहीं।” BJP 85 मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस कर रही, 294 प्रभारियों की नियुक्ति की। TMC हिंसा और भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही।
विश्लेषक मानते हैं, SIR जांच पूरी न होने पर चुनाव टल सकते हैं, जो राष्ट्रपति शासन की जमीन तैयार करेगा। SR बोम्मई केस के बाद यह अंतिम विकल्प, लेकिन कानून-व्यवस्था विफल होने पर केंद्र कदम उठा सकता। निगाहें आयोग की रिपोर्ट पर।









