
भारतीय सेना के वाहनों की नंबर प्लेट पर आपने अक्सर ऊपर की ओर इशारा करता हुआ एक तीर का निशान देखा होगा, जिसे ‘ब्रॉड एरो’ (Broad Arrow) कहा जाता है। यह निशान कोई साधारण डिजाइन नहीं, बल्कि सेना की एक खास पहचान और परंपरा है। इस निशान का इस्तेमाल मुख्य रूप से ब्रिटिश काल से चला आ रहा है ताकि सैन्य वाहनों को आम गाड़ियों से अलग पहचाना जा सके।
यह तीर सेना की संपत्ति को दर्शाता है और इसके इस्तेमाल से नंबर प्लेट पर लिखे अंकों को किसी भी स्थिति में—चाहे नंबर प्लेट उलटी हो या गंदी—सही दिशा में पढ़ने में मदद मिलती है। आम नागरिकों के लिए इस निशान का इस्तेमाल करना पूरी तरह प्रतिबंधित है क्योंकि यह केवल रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले वाहनों के लिए आरक्षित है।
मिलिट्री गाड़ियों पर बने ‘ब्रॉड एरो’ का असली सच
भारतीय सेना के वाहनों पर दिखने वाला चौड़ा तीर का निशान, जिसे तकनीकी भाषा में ‘ब्रॉड एरो’ कहा जाता है, दरअसल ब्रिटिश सैन्य परंपरा की देन है। यह निशान केवल एक डिजाइन नहीं, बल्कि सरकारी स्वामित्व (Government Ownership) का प्रतीक है।
इसे इस तरह से बनाया जाता है कि युद्ध या आपातकालीन स्थिति में अगर नंबर प्लेट क्षतिग्रस्त भी हो जाए या कीचड़ से ढक जाए, तो भी यह तीर गाड़ी के नंबर को सही ढंग से पढ़ने के लिए एक ‘गाइड’ का काम करता है। यह तीर सेना की गाड़ियों को आम नागरिक वाहनों से अलग पहचान देता है और यह दर्शाता है कि यह वाहन सीधे रक्षा मंत्रालय के अधीन है।
दुर्घटना में भी नहीं छिपेगी आर्मी गाडी की पहचान
भारतीय सेना के वाहनों पर दिखने वाला यह ‘ब्रॉड एरो’ ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही एक ऐतिहासिक परंपरा है। इसे नंबर प्लेट पर लगाने का सबसे मुख्य उद्देश्य आसान पहचान सुनिश्चित करना है। सेना के वाहनों के लिए यह निशान एक ‘गाइड’ की तरह काम करता है; अगर युद्ध या किसी बड़े हादसे के दौरान गाड़ी पलट जाए या नंबर प्लेट क्षतिग्रस्त हो जाए, तो भी इस तीर की दिशा को देखकर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर आसानी से और बिल्कुल सही पढ़ा जा सकता है। यह तीर न केवल सैन्य संपत्ति की पहचान है, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में डेटा रिकॉर्ड करने का एक अचूक तरीका भी है।
रक्षा मंत्रालय के विशेष नियमों से चलती हैं सेना की गाड़ियाँ
सेना की गाड़ियों पर ऊपर की ओर इशारा करता यह तीर एक स्पष्ट संकेत है कि वाहन का उपयोग रक्षा उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, न कि किसी निजी या नागरिक काम के लिए। यह प्रतीक ब्रिटिश कॉमनवेल्थ देशों की विरासत से लिया गया है, जो सरकारी सैन्य संपत्ति को दर्शाता है।
एक और दिलचस्प बात यह है कि सेना के ये वाहन आम ‘मोटर वाहन अधिनियम’ (Motor Vehicle Act) के बजाय सीधे रक्षा मंत्रालय के कड़े नियमों और प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं। यही कारण है कि इनकी नंबर प्लेट का फॉर्मेट और उन पर बने निशान आम गाड़ियों से बिलकुल अलग और अनूठे होते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी है सेना का यह ‘ब्रॉड एरो’ ज्ञान
अब आप समझ गए होंगे कि सेना के वाहनों पर दिखने वाले इस तीर के निशान का महत्व कितना गहरा है। यह न केवल सैन्य वाहनों की पहचान और उनकी कानूनी स्थिति को दर्शाता है, बल्कि UPSC, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के सामान्य ज्ञान (General Knowledge) खंड के लिए भी एक महत्वपूर्ण विषय है। अक्सर इंटरव्यू या लिखित परीक्षाओं में रक्षा क्षेत्र से जुड़े ऐसे प्रतीकों और उनके इतिहास के बारे में सवाल पूछ लिए जाते हैं। इसलिए, सेना की परंपराओं और उनके नियमों की यह छोटी सी जानकारी आपके सामान्य ज्ञान को और भी मजबूत बनाती है।









