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FD होल्डर की मौत के बाद पैसा किसे मिलेगा? नॉमिनी या कानूनी वारिस? जान लें बैंक का ये पेचीदा नियम

क्या आप भी नॉमिनी को ही बैंक FD का असली मालिक समझते हैं? सावधान! कानूनी रूप से नॉमिनी और वारिस के अधिकार बिल्कुल अलग होते हैं। जानें बैंक और सुप्रीम कोर्ट का वह पेचीदा नियम, जो आपके परिवार की जमा-पूंजी की सुरक्षा के लिए जानना बेहद जरूरी है।

By Pinki Negi

FD होल्डर की मौत के बाद पैसा किसे मिलेगा? नॉमिनी या कानूनी वारिस? जान लें बैंक का ये पेचीदा नियम
FD होल्ड

अगर किसी व्यक्ति ने अपनी वसीयत (Will) नहीं बनाई है और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसकी संपत्ति और बैंक FD पर अधिकार कानून के अनुसार तय होता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहला कानूनी हक मृतक के पति या पत्नी और उनके बच्चों का होता है।

कानून की नज़र में बेटे और बेटियां दोनों ही बराबर के हकदार माने जाते हैं और FD की जमा राशि सबसे पहले इन्हीं निकटतम परिजनों में समान रूप से बांटी जाती है। वसीयत न होने पर यह व्यवस्था परिवार को आर्थिक विवादों से बचाने और सही वारिस को हक दिलाने में मदद करती है।

क्या दादा-दादी की FD पर पोते-पोतियों का हक होता है?

आम तौर पर लोग सोचते हैं कि दादा-दादी की संपत्ति या बैंक FD पर पोते-पोतियों का सीधा अधिकार होता है, लेकिन कानूनी नियम इसके विपरीत हैं। कानून के अनुसार, यदि मृतक का बेटा या बेटी (यानी पोते-पोतियों के माता-पिता) जीवित हैं, तो पोते-पोतियों का उस FD पर कोई सीधा दावा नहीं बनता। पोते-पोतियां केवल तभी हकदार माने जाते हैं जब उनके माता-पिता की मृत्यु पहले ही हो चुकी हो। ऐसी स्थिति में, वे अपने माता-पिता के प्रतिनिधि के रूप में उनका हिस्सा प्राप्त करते हैं। सरल शब्दों में, जब तक पहली पीढ़ी (बेटे-बेटी) मौजूद है, तब तक दूसरी पीढ़ी (पोते-पोती) को कानूनन उत्तराधिकारी नहीं माना जाता।

सावधान! नॉमिनी (Nominee) बैंक FD का मालिक नहीं होता

ज्यादातर लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि बैंक FD में जिसे नॉमिनी बनाया गया है, पैसा उसी का हो जाता है। लेकिन वित्तीय और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, नॉमिनी केवल एक ‘ट्रस्टी’ या केयरटेकर होता है, मालिक नहीं। कानून की नजर में नॉमिनी की भूमिका सिर्फ बैंक से पैसा प्राप्त करने वाले एक प्रतिनिधि की है।

बैंक की जिम्मेदारी नॉमिनी को पैसा देकर खत्म हो जाती है, लेकिन नॉमिनी का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह उस रकम को मृतक के असली कानूनी वारिसों (Legal Heirs) को सौंपे। अदालतें भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि उत्तराधिकार कानून (Succession Law) हमेशा नॉमिनेशन से ऊपर होता है।

बैंक में नॉमिनी का क्या है असली काम? जानें

बैंक खातों या FD में नॉमिनी का नाम दर्ज करना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य पैसा निकालने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में, बैंक केवल डेथ सर्टिफिकेट (Death Certificate) और KYC जैसे जरूरी दस्तावेज देखकर पूरी राशि नॉमिनी को सौंप देता है।

एक बार भुगतान होने के बाद बैंक अपनी कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। इसके बाद वह पैसा किसका है या परिवार के सदस्यों के बीच उसका बंटवारा कैसे होगा, इसमें बैंक का कोई दखल नहीं होता। यदि कानूनी वारिसों और नॉमिनी के बीच कोई विवाद होता है, तो उसे आपसी समझ या कोर्ट के जरिए सुलझाना पड़ता है, क्योंकि बैंक इसे पूरी तरह से परिवार का निजी मामला मानता है।

बिना नॉमिनी वाली FD से पैसा निकालना है मुश्किल

अगर किसी बैंक FD में नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं है, तो खाताधारक की मृत्यु के बाद पैसा वापस पाना एक लंबी और कानूनी प्रक्रिया बन जाती है। ऐसी स्थिति में बैंक बेहद सतर्क हो जाता है और सभी संभावित दावेदारों से पहचान पत्र, शपथ पत्र (Affidavits) और अन्य कानूनी सबूत मांगता है।

यदि FD की राशि बड़ी है, तो बैंक अनिवार्य रूप से कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) लाने की शर्त रखता है। यह प्रक्रिया आसान होने पर भी कुछ महीनों का समय लेती है, लेकिन यदि वारिसों के बीच आपसी सहमति न हो या दस्तावेज अधूरे हों, तो मामला एक साल या उससे अधिक समय तक भी खिंच सकता है।

सावधान! इन 5 वजहों से फंस सकता है आपकी FD का पैसा

बैंक FD का पैसा मिलने में होने वाली देरी अक्सर छोटी गलतियों का परिणाम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नॉमिनी का अपडेट न होना या रिकॉर्ड में KYC (नाम और जन्मतिथि) की गलतियाँ सबसे बड़ी रुकावट बनती हैं।

इसके अलावा, परिवार में बच्चों और पोते-पोतियों के बीच आपसी विवाद मामले को और उलझा देते हैं। लेकिन सबसे गंभीर स्थिति तब पैदा होती है जब व्यक्ति वसीयत (Will) नहीं बनाता; ऐसे में एक साधारण सी प्रक्रिया जटिल कानूनी लड़ाई में बदल जाती है। इन समस्याओं से बचने के लिए समय रहते दस्तावेजों को दुरुस्त करना और स्पष्ट कानूनी उत्तराधिकारी तय करना बेहद ज़रूरी है।

परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए 3 जरूरी कदम

अपने जाने के बाद परिवार को बैंक और अदालतों के चक्करों से बचाने का समाधान बहुत सरल है। बस तीन बातों का ध्यान रखें: सबसे पहले अपनी बैंक FD में सही नॉमिनी का नाम दर्ज करें और सुनिश्चित करें कि वह अपडेटेड है।

दूसरा, बैंक रिकॉर्ड में अपना KYC (नाम, पता, जन्मतिथि) हमेशा सही रखें ताकि बाद में कोई तकनीकी रुकावट न आए। और सबसे महत्वपूर्ण, एक साधारण वसीयत (Simple Will) जरूर बना लें। ये छोटे-छोटे कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई बिना किसी विवाद के सही व्यक्ति तक पहुँच जाए और आपका परिवार मुश्किल समय में भी आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करे।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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