
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क वाला देश है, जो 68,584 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। हर रोज लाखों यात्री 13,000 से ज्यादा ट्रेनों से सफर करते हैं, और रेलवे विभिन्न क्लास व क्षेत्रों के अनुसार सुविधाएं प्रदान करता है। लेकिन एक ऐसी ट्रेन है जो सभी को मुफ्त भोजन का अनोखा तोहफा देती है- रोजाना, बिना किसी भेदभाव के। यह है सचखंड एक्सप्रेस, जो सिख धर्म के लंगर की भावना से 29 सालों से मानवता की मिसाल पेश कर रही है।
ट्रेन का नाम, नंबर और रूट
सचखंड एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12715/12716) एक सुपरफास्ट ट्रेन है, जो महाराष्ट्र के नांदेड़ (हुजूर साहिब नांदेड़) से पंजाब के अमृतसर तक चलती है। यह प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे नांदेड़ से प्रस्थान करती है और लगभग 33 घंटे में 2,000 किलोमीटर की दूरी तय कर अमृतसर पहुंचती है। मार्ग में 39 स्टेशन आते हैं, और यह महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा व पंजाब- कुल 6 राज्यों से गुजरती है। प्रमुख स्टॉपेज में नई दिल्ली, भोपाल, जालना, औरंगाबाद, परभणी व मराठवाड़ा शामिल हैं। इस रूट पर यात्रा सरल व सुगम होती है, खासकर धार्मिक तीर्थयात्रियों के लिए।
मुफ्त भोजन की अनोखी व्यवस्था
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत है सभी यात्रियों को ब्रेकफास्ट, लंच व डिनर मुफ्त में परोसा जाना। मेन्यू में शाकाहारी व्यंजन जैसे कढ़ी-चावल, छोले, दाल, खिचड़ी, आलू-गोभी, रोटी-सब्जी आदि शामिल होते हैं। यह सेवा किसी विशेष क्लास तक सीमित नहीं- फर्स्ट एसी से जनरल कोच तक हर यात्री को समान रूप से मिलती है। छह मुख्य स्टेशनों पर स्थानीय गुरुद्वारों के स्वयंसेवक ट्रेन में चढ़कर भोजन परोसते हैं, ताकि कोई भूखा न रहे। यह व्यवस्था नांदेड़ हुजूर साहिब से अमृतसर साहिब तक पूरे सफर को कवर करती है।
29 साल पुरानी परंपरा और सिख सेवा भाव
यह सेवा 1995 से लगातार जारी है, जो सिख धर्म के ‘लंगर’ की भावना पर आधारित है। गुरुद्वारों के दान से खर्च उठता है, न कि रेलवे से। स्वयंसेवक बिना किसी शुल्क के भोजन तैयार कर परोसते हैं, जो अमीर-गरीब सभी के लिए एक जैसा होता है। देश की 13,000+ ट्रेनों में सिर्फ यही ट्रेन ऐसी है, जहां नियमित मुफ्त भोजन मिलता है। अन्य प्रीमियम ट्रेनों में देरी पर ही फ्री मील मिल सकता है, लेकिन यहां यह दैनिक परंपरा है। हालिया रिपोर्ट्स (फरवरी 2026 तक) बताती हैं कि यह सेवा अभी भी सक्रिय है।
यात्रियों की प्रतिक्रियाएं
सचखंड एक्सप्रेस भाईचारे व समानता की प्रतीक है। यात्रियों के अनुसार, यह सफर न सिर्फ सुविधाजनक बल्कि आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो दिखाते हैं कि कैसे स्वयंसेवक हर कोच में भोजन पहुंचाते हैं। यह परंपरा भारतीय रेलवे की विविधता को दर्शाती है, जहां धार्मिक सद्भाव से लाखों यात्रियों का पेट भरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहल अन्य ट्रेनों में भी अपनाई जा सकती है, लेकिन गुरुद्वारों की निस्वार्थ सेवा इसे अनुपम बनाती है।
रेलवे के इस ‘बड़े तोहफे’ से लाखों यात्री लाभान्वित हो रहे हैं। यदि आप धार्मिक यात्रा या लंबा सफर प्लान कर रहे हैं, तो सचखंड एक्सप्रेस जरूर आजमाएं। यह न केवल गंतव्य तक ले जाती है, बल्कि दिल को भी छू लेती है।









