
भारत में सरकारी नौकरी केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और सुरक्षा का सबसे बड़ा पैमाना है। हाल ही में जारी श्रम विभाग और विभिन्न राज्य भर्ती बोर्डों के ताज़ा आंकड़ों ने देश के ‘जॉब मार्केट’ की एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सेवा में भागीदारी के मामले में उत्तर प्रदेश ने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है, वहीं राजस्थान का एक जिला पूरे देश के लिए मिसाल बनकर उभरा है।
8 साल, 8.5 लाख नियुक्तियां और नंबर-1 का ताज
सरकारी भर्ती पोर्टल्स (e-Adhiachan) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले आठ वर्षों (2017-2025) में उत्तर प्रदेश ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य में इस दौरान 8.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्तियां दी गई हैं।
- पसंदीदा विभाग: यूपी के युवाओं की पहली पसंद आज भी बैंकिंग, एसएससी (SSC), पुलिस और रेलवे बनी हुई है।
- पारदर्शिता: राज्य सरकार का दावा है कि ‘ई-अधियाचन’ पोर्टल के जरिए ग्रुप ए, बी और सी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक तेज और पारदर्शी बनाया गया है।
राजस्थान का ‘झुंझुनू’ मॉडल
राजस्थान सरकारी नौकरी के क्रेज में दूसरे स्थान पर है, लेकिन यहाँ का झुंझुनू जिला एक विशेष उपलब्धि रखता है। आंकड़ों के अनुसार, इस जिले से देश की सेना, पुलिस और शिक्षण संस्थानों में सबसे ज्यादा युवा भर्ती होते हैं।
- प्रमुख क्षेत्र: यहाँ के युवा शिक्षक, नर्स, आरएएस (RAS), और भारतीय सेना में जाने को प्राथमिकता देते हैं।
- सफलता का राज: झुंझुनू में कोचिंग संस्कृति और सेना के प्रति जज्बा इसे ‘सरकारी नौकरी का हब’ बनाता है।
बिहार, केरल और महाराष्ट्र
सूची में तीसरे स्थान पर बिहार का नाम आता है, जहाँ रेलवे और बैंकिंग परीक्षाओं के प्रति दीवानगी उत्तर भारत में सबसे अधिक देखी जाती है। इसके विपरीत, दक्षिण भारतीय और पश्चिमी राज्यों में रुझान थोड़ा अलग है:
- केरल: यहाँ के युवा कृषि विभाग, चिकित्सा (Doctors/Nurses) और इंजीनियरिंग क्षेत्र में सरकारी पदों पर अधिक संख्या में हैं।
- महाराष्ट्र: यहाँ रक्षा क्षेत्र (सेना), रेलवे और राज्य स्तरीय तकनीकी विभागों में युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर भारत में सरकारी नौकरी के प्रति अधिक झुँकाव का कारण निजी क्षेत्र में सीमित विकल्प और ‘जॉब सिक्योरिटी’ की चाहत है। वहीं, केरल जैसे राज्यों में उच्च साक्षरता दर ने युवाओं को तकनीकी और विशेषज्ञ पदों की ओर मोड़ा है।









