
भारत सरकार के नियमों का पालन करते हुए, व्हाट्सएप अब ‘सिम बाइंडिंग’ (SIM Binding) फीचर पर काम कर रहा है। इस नए अपडेट के बाद, आपका व्हाट्सएप अकाउंट केवल उसी फोन में चलेगा जिसमें वह सिम कार्ड मौजूद है जिससे अकाउंट बना है। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी को रोकना और आपके व्हाट्सएप को पहले से अधिक सुरक्षित बनाना है। वर्तमान में व्हाट्सएप के एंड्रॉइड बीटा वर्जन पर इसकी टेस्टिंग चल रही है और जल्द ही इसे सभी भारतीय यूजर्स के लिए अनिवार्य कर दिया जाएगा।
क्या है सिम बाइंडिंग और यह कैसे काम करता है?
सिम बाइंडिंग एक ऐसी तकनीक है जो आपके व्हाट्सएप अकाउंट को सीधे आपके फिजिकल सिम कार्ड से जोड़ देती है। इसका मतलब है कि व्हाट्सएप केवल उसी फोन में चलेगा जिसमें वह सिम कार्ड लगा होगा जिससे आपने अकाउंट बनाया है। जैसे ही आप फोन से सिम कार्ड निकालेंगे या बदलेंगे, व्हाट्सएप सुरक्षा के लिहाज से काम करना बंद कर देगा। ठीक वैसे ही जैसे अभी UPI (Google Pay या PhonePe) ऐप्स काम करते हैं, अब व्हाट्सएप भी उसी तरह सुरक्षित हो जाएगा ताकि कोई दूसरा व्यक्ति आपके नंबर का गलत इस्तेमाल न कर सके।
व्हाट्सएप वेरिफिकेशन और सिम बाइंडिंग में अंतर
अभी तक व्हाट्सएप में लॉगिन करने के लिए केवल 6-अंकों के ओटीपी (OTP) की जरूरत होती है, जिसे किसी भी फोन में डालकर अकाउंट चलाया जा सकता है। एक बार लॉगिन होने के बाद व्हाट्सएप यह चेक नहीं करता कि उस नंबर का सिम कार्ड फोन में लगा है या नहीं। लेकिन सिम बाइंडिंग आने के बाद यह पूरी तरह बदल जाएगा। अब सिस्टम लगातार यह सुनिश्चित करेगा कि सिम कार्ड फोन के अंदर मौजूद और एक्टिव है; सिम निकलते ही सुरक्षा के लिए आपका व्हाट्सएप एक्सेस बंद हो जाएगा।
सिम बाइंडिंग का मुख्य उद्देश्य और फायदे
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) का लक्ष्य इस सिस्टम के जरिए साइबर अपराधों और धोखाधड़ी पर लगाम लगाना है। अक्सर अपराधी बंद हो चुके नंबरों या दोबारा बेचे गए सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल करके लोगों के व्हाट्सएप अकाउंट एक्सेस कर लेते हैं। सिम बाइंडिंग यह सुनिश्चित करेगी कि व्हाट्सएप केवल असली सिम मालिक के फोन में ही चले। इससे न केवल पुराने नंबरों का मिसयूज रुकेगा, बल्कि स्कैमर्स के लिए किसी दूसरे के नाम पर फर्जी अकाउंट चलाना भी नामुमकिन हो जाएगा।









