
जब भी कोई भारतीय परिवार होम लोन, पर्सनल लोन या एजुकेशन लोन लेता है, तो उसकी जेब पर हर महीने EMI का बोझ तय हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आर्थिक तनाव के समय इस EMI से कुछ महीनों के लिए अस्थायी ब्रेक भी लिया जा सकता है? बैंकिंग którą इसे मोराटोरियम पीरियड (Moratorium Period) या ‘EMI हॉलिडे’ कहते हैं। यह लोन माफ़ी नहीं, बल्कि भुगतान का एक नियंत्रित विराम है, जो कर्जदार को वित्तीय संकट से उबरने का समय देता है।
मोराटोरियम पीरियड क्या है?
मोराटोरियम पीरियड वह निर्धारित समय-अवधि है, जिसमें उधारकर्ता को लोन की मासिक किश्त (EMI) से छूट मिलती है । यह अवधि लोन डिसबर्समेंट के तुरंत बाद भी हो सकती है (जैसे नए घर के निर्माण में देरी होने पर) या लोन चलते हुए आर्थिक कठिनाई (नौकरी जाना, व्यापार में घाटा, मेडिकल इमरजेंसी) के दौरान बैंक की स्वीकृति से । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान सभी टर्म लोन पर 3 से 6 महीने का मोराटोरियम देने की अनुमति दी थी, जिसका लाभ करोड़ों कर्जदारों ने उठाया ।
यह कैसे काम करता है?
- ब्याज रुकता नहीं: मोराटोरियम के दौरान भी लोन पर ब्याज लगातार जमा होता रहता है ।
- ब्याज का जुड़ाव: यह ब्याज आमतौर पर मूल लोन (principal) में जोड़ दिया जाता है, जिससे कुल लोन राशि बढ़ जाती है ।
- EMI का पुनरारंभ: अवधि समाप्त होने के बाद EMI या तो थोड़ी बड़ी हो जाती है या लोन की कुल अवधि उतने ही महीनों से बढ़ जाती है ।
- विकल्प: कुछ बैंक कर्जदार को तीन विकल्प देते हैं- (1) बकाया ब्याज का एकमुश्त भुगतान, (2) ब्याज को लोन में जोड़कर EMI बढ़ाना, (3) लोन अवधि बढ़ाकर EMI समान रखना।
जेब बचाने के चार ठोस फायदे
- बेहतर कैश‑फ्लो – 3‑6 महीने तक EMI न भरने से मासिक बजट में अतिरिक्त नकदी मिलती है, जिससे जरूरी खर्च (इलाज, बच्चों की फीस, भोजन) पूरे किए जा सकते हैं ।
- वित्तीय योजना में सुधार – EMI के दबाव से मुक्त होकर कर्जदार अपना खर्च‑बचत मॉडल दोबारा गढ़ सकता है, अनावश्यक खर्च काट सकता है ।
- निवेश का अवसर – बची नकदी को यदि उचित रिटर्न वाले निवेश (FD, म्यूचुअल फंड) में लगाया जाए, तो कभी‑कभी निवेश का रिटर्न मोराटोरियम के अतिरिक्त ब्याज से भी ज्यादा हो सकता है ।
- नेगोसिएशन पावर – सही समय पर मोराटोरियम लेने से कर्जदार का भुगतान रिकॉर्ड साफ़ रहता है, जिससे बाद में बैंक से ब्याज‑दर में छूट या लोन री‑स्ट्रक्चरिंग की बातचीत आसानी से होती है ।
सावधानियां: फायदे के साथ जोखिम भी
- कुल ब्याज बोझ बढ़ता है – चूंकि ब्याज compound होता है, अंतिम में कर्जदार को अधिक कुल ब्याज चुकाना पड़ सकता है ।
- भविष्य की EMI महंगी – अगर लोन अवधि नहीं बढ़ाई गई, तो बाद की EMIs थोड़ी बड़ी हो सकती हैं, जिससे बजट फिर से तनावग्रस्त हो सकता है ।
- योग्यता शर्तें – कुछ बैंक केवल उन ग्राहकों को देते हैं, जिनका 2‑3 महीने का भुगतान रिकॉर्ड साफ़ हो; लेट फीस या डीफॉल्ट पर मोराटोरियम मिलना मुश्किल होता है ।
- क्रेडिट स्कोर पर असर – यदि मोराटोरियम बैंक की औपचारिक स्वीकृति के बिना लिया जाए, तो CIBIL स्कोर खराब हो सकता है ।
कैसे लें मोराटोरियम?
- अपने बैंक/NBFC की ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप पर लॉग‑इन करें।
- “EMI Moratorium”, “Payment Holiday” या “COVID‑19 Relief” सेक्शन चुनें।
- लोन विवरण, आर्थिक कठिनाई का प्रमाण (नौकरी छूटने की सूचना, मेडिकल बिल, बिज़नेस बीच‑स्टेटमेंट) अपलोड करें।
- नियम‑शर्तों को ध्यान से पढ़ें (कितने महीने, ब्याज कैसे जोड़ा जाएगा) और सबमिट करें ।









