
आज के दौर में इमरजेंसी में पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए ‘गोल्ड लोन’ सबसे आसान और लोकप्रिय जरिया बन गया है। कम कागजी कार्रवाई और तुरंत पैसा मिल जाने के कारण लोग अपनी मेहनत की कमाई से जुड़ी ज्वेलरी बैंक या फाइनेंस कंपनियों के पास गिरवी रख देते हैं। लेकिन, कई बार आर्थिक तंगी या किसी अन्य कारण से लोग इस लोन की किश्तें (EMI) समय पर नहीं चुका पाते। ऐसे में मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि क्या बैंक हमारा सोना बेच देगा? गोल्ड लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति में बैंक के पास क्या अधिकार हैं और एक ग्राहक के तौर पर आपके पास क्या विकल्प बचते हैं, आइए जानते हैं?
डिफॉल्ट होने पर बैंक की पहली कार्रवाई
जब आप गोल्ड लोन की किश्त या ब्याज समय पर नहीं चुकाते, तो बैंक इसे तुरंत ‘डिफॉल्ट’ की श्रेणी में डाल देता है। हालांकि, बैंक तुरंत आपकी ज्वेलरी नीलाम नहीं करता। शुरुआत में बैंक आपको रिमाइंडर भेजना शुरू करता है। ये रिमाइंडर एसएमएस, ईमेल या फोन कॉल के जरिए हो सकते हैं। बैंक का मकसद आपको यह याद दिलाना होता है कि आपका भुगतान बकाया है। अगर आप फिर भी जवाब नहीं देते, तो बैंक ‘पैनल इंटरेस्ट’ (Penal Interest) यानी दंडात्मक ब्याज लगाना शुरू कर देता है। यह ब्याज आपकी सामान्य ब्याज दर से 2% से 3% तक अधिक हो सकता है, जिससे आपके ऊपर कर्ज का बोझ और बढ़ जाता है ।
नीलामी की प्रक्रिया कब शुरू होती है?
बैंक आपकी ज्वेलरी को नीलाम करने का फैसला तभी लेता है जब आप लंबे समय तक (आमतौर पर 90 दिनों से अधिक) कोई भुगतान नहीं करते और बैंक के नोटिसों का जवाब भी नहीं देते। कानूनन, बैंक को ज्वेलरी नीलाम करने से पहले ग्राहक को एक ‘फाइनल नोटिस’ भेजना अनिवार्य है। इस नोटिस में आमतौर पर 15 से 30 दिन का समय दिया जाता है। इस अवधि के दौरान भी अगर आप बकाया राशि का भुगतान कर देते हैं, तो आपकी ज्वेलरी सुरक्षित रहती है ।
लेकिन अगर आप इस नोटिस की समय सीमा को भी पार कर जाते हैं, तो बैंक सार्वजनिक नीलामी की तारीख तय कर देता है और अखबारों में इसकी सूचना जारी कर देता है। नीलामी से पहले उधारकर्ता को कम से कम 15 दिन पहले सूचित किया जाता है और इसके बाद 21 दिनों में नीलामी सूचना नोटिस जारी होता है ।
क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर
गोल्ड लोन डिफॉल्ट करने का एक बड़ा नुकसान आपके सिबिल (CIBIL) या क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है। कई लोगों को लगता है कि चूंकि सोना बैंक के पास है, इसलिए स्कोर खराब नहीं होगा, लेकिन यह गलत है। लोन न चुकाने की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को दी जाती है, जिससे आपका स्कोर तेजी से गिरता है । भविष्य में जब आप होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के लिए आवेदन करेंगे, तो बैंक आपके खराब रिकॉर्ड को देखते हुए लोन देने से मना कर सकता है। इसलिए, अपनी ज्वेलरी बचाने के साथ-साथ अपनी वित्तीय साख बचाना भी जरूरी है।
नीलामी के बाद पैसों का हिसाब-किताब
जब बैंक आपकी ज्वेलरी नीलाम करता है, तो उससे प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल सबसे पहले आपके बकाया मूलधन (Principal), ब्याज और नीलामी के खर्चों को कवर करने के लिए किया जाता है । एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर नीलामी से मिली राशि आपके कुल कर्ज से अधिक है, तो बैंक को अतिरिक्त पैसा (Surplus) ग्राहक को वापस करना पड़ता है।
अगर आपका कुल बकाया 1 लाख रुपये है और ज्वेलरी 1.20 लाख में बिकी, तो बैंक को 20 हजार रुपये आपको लौटाने होंगे। इसके विपरीत, अगर सोने की कीमतें गिर गई हैं और नीलामी से पूरा कर्ज वसूल नहीं हो पा रहा है, तो बाकी की राशि के लिए बैंक आप पर कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है ।
नीलामी से बचने के क्या हैं रास्ते?
अगर आप आर्थिक संकट में हैं और लोन नहीं चुका पा रहे हैं, तो सबसे बेहतर रास्ता है कि आप बैंक जाकर बात करें। आप बैंक से लोन की अवधि बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं। इसके अलावा, आप केवल ‘ब्याज’ चुकाकर भी कुछ समय के लिए नीलामी रुकवा सकते हैं। एक और विकल्प यह है कि आप अपनी ज्वेलरी के एक हिस्से को बेचकर बाकी का लोन खत्म कर दें, ताकि कम से कम कुछ ज्वेलरी आपके पास वापस आ सके । याद रखें, बैंक का प्राथमिक काम सोना बेचना नहीं बल्कि अपना पैसा वसूलना है, इसलिए वे अक्सर बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए तैयार रहते हैं।









